राहत का टीका:शहर में युवाओं का टीकाकरण डबल वैक्सीन सप्लाई जरूरत से चौथाई ही

रायपुर3 महीने पहले
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18 प्लस वाले 12.01 लाख, सिर्फ 5% को दोनों डोज, 61% को सिंगल। - Dainik Bhaskar
18 प्लस वाले 12.01 लाख, सिर्फ 5% को दोनों डोज, 61% को सिंगल।

राजधानी में टीकाकरण की स्थिति प्रदेश से कुछ बेहतर है और तीन माह में यहां राज्य के औसत की तुलना में दोगुने लोगों को पहली या दोनों डोज लग चुकी हैं। शहर में 61 फीसदी को पहली डोज लगी है और 5 प्रतिशत ने दोनों डोज लगवा ली हैं। लेकिन ज्यादा बड़ा खतरा यह मंडरा रहा है कि यहां टारगेट के हिसाब से रोजाना 1 लाख टीकों की जरूरत है, जबकि सप्लाई प्रतिदिन औसत 25 हजार के आसपास ही है। इस आयु वर्ग के 12.01 लाख लोगों को वैक्सीन लगनी है। टीकाकरण की रफ्तार और वैक्सीन की सप्लाई के हिसाब से अफसरों का अनुमान है कि सभी लोगों को दोनों डोज लगाने के लिए 60 महीने यानी 5 साल का समय लग सकता है।

राजधानी में सितंबर अंत या अक्टूबर के पहले पखवाड़े तक 18-44 आयु वर्ग के सभी लोगों को सिंगल डोज लग सकता है। राजधानी समेत प्रदेश में 1 मई से 18 प्लस वालों को टीके लगाए जा रहे हैं। कोविशील्ड व कोवैक्सीन के अलावा निजी अस्पताल में स्पूतनिक भी लग रहे हैं। हालांकि आबादी ज्यादा है, इसलिए यहां टीके की भारी कमी हो रही है। जैसे, शनिवार को 92 सेंटरों में केवल 15510 डोज ही लगाए जाएंगे, जबकि औसत 25 हजार का है। इनमें कोविशील्ड के 13640 व कोवैक्सीन के केवल 1870 टीके लगाए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि राजधानी में अगर पर्याप्त वैक्सीन उपलब्ध हो तो रोजाना 1 लाख टीके लगाए जा सकते हैं। हालांकि ऐसा संभव इसलिए नहीं हो रहा है, क्योंकि क्षमता से एक-चौथाई डोज ही मिल रहे हैं।

कोविशील्ड की दूसरी डोज में देरी
राजधानी में रात 9 बजे तक 11.09 लाख लोगों को कोविशील्ड का पहले डोज लग चुके हैं। इनमें 18 प्लस वाले 730502 लोग शामिल है। कोविशील्ड के पहले डोज के बाद दूसरे डोज के लिए 84 दिनों का इंतजार करना पड़ता है, इसलिए इसका दूसरा डोज कम लोगों को लगा है। कोवैक्सीन का दूसरा डोज 28 दिनों बाद लगता है। इसीलिए इस टीके के 325794 लोगों को दोनों डोज लग चुके हैं। हालांकि इसमें फिलहाल 18 प्लस वालों का आंकड़ा नहीं है। महिला व पुरुषों की बात करें तो 754038 पुरुष व 686463 महिलाओं को दोनों डोज लगे हैं।

टीके के परिवहन में भी हो रही लापरवाही
प्रदेश में पहली बार 5 लाख से अधिक टीके आने के बाद टीके के ट्रांसपोर्टेशन में स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। अधिकांश जिलों ने टीके लेने के लिए वैक्सीन वाहन की जगह एंबुलेंस, जीप जैसे वाहन भिजवाए जिसके चलते वैक्सीन को ऐसी ही गाड़ियों में राजधानी के वैक्सीन स्टोर से भिजवाया गया। वैक्सीन के ट्रांसपोर्ट के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल के मुताबिक वैक्सीन वाहन जिसमें वैक्सीन को नियत तापक्रम में रखा जा सकता है उसके जरिए दूरस्थ इलाकों में टीके भेजे जाने चाहिए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इसके पहले जिलों की लापरवाही पर कड़ा एक्शन भी लिया गया लेकिन एक बार फिर जिलों ने इस तरह के वाहन भिजवा दिए। प्रदेश में सभी जिलों में वैक्सीन को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए कोल्ड चैन को मेंटेन रखना जरूरी होता है। कोल्ड चैन ब्रेक होने पर करोड़ों रुपए के टीके बर्बाद तक हो सकते हैं। चूंकि बुधवार को पहली बार टीके की इतनी बड़ी खेप आई लिहाजा सभी जिलों को पहले से ही टीके लेने के लिए बुलवा लिया गया था। जल्दबाजी के चक्कर में बहुत से जिलों की ओर से वैक्सीन वाहन नहीं भिजवाए गए।

हमें जिस तरह टीके मिलते हैं, वैक्सिनेशन उसी रफ्तार से किया जा रहा है। वैक्सीन मिलते ही सेंटरों को भेज दी जाती है। सेंटरों की संख्या कम-ज्यादा करने की वजह वैक्सीन की उपलब्धता ही है।
-राजीव पांडेय, नोडल अफसर रायपुर

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