महिला आयोग में सुनवाई:अंतरजातीय विवाह करने पर पंचायत में अपमानित किया था, अब समाज पदाधिकारी बोले - ठेस लगी हो तो माफ कर दें

रायपुरएक महीने पहले
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महिला आयोग के समझाने के बाद समाज के पदाधिकारी ने पीड़ित परिवार से माफी मांगी है। - Dainik Bhaskar
महिला आयोग के समझाने के बाद समाज के पदाधिकारी ने पीड़ित परिवार से माफी मांगी है।

अंतरजातीय विवाह की वजह से जातीय प्रताड़ना झेल रहे एक परिवार को महिला आयोग ने बड़ी राहत दी है। आयोग में सुनवाई के बाद उनके समाज के पदाधिकारी वह रकम वापस लौटाने को राजी हो गये हैं, जो उन्होंने इस परिवार से जुर्माने के तौर पर ली थी। वहीं समाज की एक बैठक में महिला को अपमानित करने वाले एक पदाधिकारी ने आयोग के सामने ही महिला और उसके परिवार से हाथ जोड़कर माफी मांगी।

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने बताया, पीड़ित महिला की शिकायत थी, अंतरजातीय विवाह के कारण समाज ने उसके परिवार का बहिष्कार कर दिया। उसको समाज में शामिल करने के लिए 42 हजार रुपए का हर्जाना वसूला। उसके बाद भी महिला और उसके परिवार को जाति से बहिष्कृत रखा गया। महिला ने आयोग को एक वीडियो दिया। इसमें एक सामाजिक बैठक के दौरान एक पदाधिकारी महिला के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करते रिकॉर्ड हुये थे।

वीडियो देखने के बाद महिला आयोग ने संबंधित पदाधिकारी से बात की। उसने स्वीकार किया कि उसने ऐसा कहा है, लेकिन उसका इरादा किसी को अपमानित करने का नहीं था। आयोग की सख्ती के बाद समाज के उस पदाधिकारी ने महिला और उसके परिवार से कहा, अगर उसके शब्दों से उनकी भावना को ठेस पहुंची है तो उसके लिए माफी मांगता है। समाज के दूसरे पदाधिकारी भी महिला के परिवार से वसूले गये 42 हजार रुपये वापस करने को तैयार हो गये हैं। आयोग ने मामले को अगली सुनवाई में भी लगाने की बात कही है ताकि महिला और उसके परिवार को पूरी राहत दी जा सके।

आयोग पहुंच रहे हैं जातीय पंचायतों के मामले

राज्य महिला आयोग के सामने जातीय पंचायतों की प्रताड़ना के बहुत से मामले पहुंच रहे हैं। पिछले महीने आयोग के सामने एक मामला आया था। इसमें लड़की ने दुल्हे को शराब के नशे में देखकर शादी से इन्कार कर दिया था। उसके समाज ने इसे जातीय नियम भंग बताकर लड़की के परिवार पर जुर्माना लगा दिया था। अंतरजातीय विवाह के एक अन्य मामले में सामाजिक बहिष्कार और जुर्माने की बात आई थी।