कौन है कालीचरण:बापू को अपशब्द कहने वाला 8वीं पास, राजनीति में भी हाथ आजमाया; भय्यू जी आश्रम पहुंचा तो 'महाराज' बना

रायपुर7 महीने पहले
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को गालियां देने वाला कालीचरण अब पुलिस गिरफ्त में है।

रायपुर की धर्म संसद में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को गालियां देने वाला कालीचरण अब पुलिस गिरफ्त में है। रायपुर पुलिस ने उसे गुरुवार तड़के ही MP के खजुराहो से छिपने की कोशिश करने के दौरान पकड़ लिया। महाराष्ट्र में अकोला के शिवाजी नगर के रहने वाला कालीचरण महज 8वीं तक पढ़ा है। फिर बीच में ही स्कूल छोड़ दिया। राजनीति में भी हाथ आजमाया। इसके साथ ही इंदौर के आश्रम से उसके 'महाराज' बनने की कहानी शुरू हुई।

भावसार समाज से आने वाले कालीचरण का असली नाम अभिजीत धनंजय सराग है। पिताजी का नाम धनंजय सराग और माता सुमित्रा सराग हैं। साधारण परिवार से आने वाला कालीचरण के पिता धनंजय सराग की अकोला के जयन चौक में मेडिकल शॉप है। उसकी पढ़ाई शहर के पेठ इलाके के टाउन जिला परिषद स्कूल में हुई है। कालीचरण को करीब से जानने वालों का कहना है कि महाराज ने कई धर्मग्रंथों का अध्ययन किया है।

रायपुर पुलिस ने खजुराहो से कालीचरण को गिरफ्तार किया।
रायपुर पुलिस ने खजुराहो से कालीचरण को गिरफ्तार किया।

अभिजीत से कालीचरण और महाराज बनने का सफर
अभिजीत का बचपन से ही झुकाव अध्यात्म की ओर था। उसमें भी वह कालीमाता की पूजा करता था। समय के साथ उसका अध्यात्म में झुकाव बढ़ता गया। फिर वो कालीपुत्र 'कालीचरण' बन गया। आर्थिक तंगी के चलते उसे उसकी मौसी के घर यानी इंदौर भेज दिया गया। इसलिए मराठी भाषी होने के बावजूद उसकी हिन्दी पर अच्छी पकड़ है। वहां वह भय्यूजी महाराज के आश्रम में जाने लगा और उनके करीब हो गया। यहीं से उसके नए नाम से 'महाराज' जुड़ा।

कालीचरण खुद कहता है कि वह महाराज नहीं बल्कि 'काली माता' का भक्त और पुत्र है।
कालीचरण खुद कहता है कि वह महाराज नहीं बल्कि 'काली माता' का भक्त और पुत्र है।

खुद को काली माता का पुत्र और भक्त बताता है

'कालीचरण कहता है कि वह महाराज नहीं बल्कि 'काली माता' का भक्त और पुत्र है। इसलिए वह स्वयं को अगस्त्य मुनि का शिष्य मानते हैं। एक इंटरव्यू में उसने बताया था कि बचपन में हुए एक्सीडेंट में उसका पैर टूट गया। इसके बाद स्वयं काली माता ने आकर उसे ठीक किया था। वह बार-बार किस्सा भी सुनाते है कि माता काली उसके सपने में आती हैं और दर्शन देती हैं। 45 साल के कालीचरण के 6000 से अधिक शिष्य हैं।

कालीचरण हमेशा खुले बाल रखता है और माथे पर लाल रंग की बड़ी बिंदी लगाता है।
कालीचरण हमेशा खुले बाल रखता है और माथे पर लाल रंग की बड़ी बिंदी लगाता है।

माथे पर लाल बिंदी लगाता है कालीचरण
कई साल तक इंदौर में रहने के दौरान कालीचरण ने एक अनूठी वेशभूषा अपनाई और जल्द लोगों में फेमस हो गए। कालीचरण हमेशा खुले बाल रखता है और माथे पर लाल रंग की बड़ी बिंदी लगाता है। वह आमतौर पर लाल रंग के कपड़े पहनता है। हल्की दाढ़ी, रुद्राक्ष की माला उसकी पहचान में शामिल हैं। कालीचरण अपनी फिटनेस को मेंटेन करने के लिए रोजाना जिम में वर्कआउट भी करता है। सोशल मीडिया पर इसके नाम से कई पेज बने हैं और उनमें लाखों फॉलोवर हैं।

कालीचरण महाराज ने 2017 में हुए अकोला नगर निकाय चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई थी।
कालीचरण महाराज ने 2017 में हुए अकोला नगर निकाय चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई थी।

चुनावी मैदान में आजाई किस्मत
कालीचरण महाराज ने 2017 में हुए अकोला नगर निकाय चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई थी। हालांकि, इस चुनाव में कालीचरण की हार हुई थी। 2019 के विधानसभा चुनाव में अकोला पश्चिम सीट से उसके उम्मीदवार को लेकर बड़ी चर्चा थी। हालांकि, उसने चुनाव नहीं लड़ा। उसका कहना है कि भविष्य में वह गोरक्षा, 'गो' सेवा जैसे रचनात्मक कार्य करेगा।

मध्य प्रदेश में शिव तांडव स्त्रोत गाकर चर्चा में आया थे।
मध्य प्रदेश में शिव तांडव स्त्रोत गाकर चर्चा में आया थे।

शिव तांडव स्त्रोत से चर्चा में आया
कालीचरण महाराष्ट्र अकोला में हर साल कांवड़ यात्रा में हिस्सा लेता है। कालीचरण पिछले साल उस समय चर्चा में आया था जब उसने मध्य प्रदेश में शिव तांडव स्त्रोत गाया था। उसका ये वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया था। अभिनेता अनुपम खेर ने भी वीडियो शेयर किया था।