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नई शिक्षा नीति पर शिक्षाविदों से बातचीत:9वीं से चुन सकेंगे विषय, आर्ट्स के साथ पढ़ सकेंगे साइंस-कॉमर्स भी; 6वीं से 8वीं तक के स्टूडेंट्स को दी जाएगी वोकेशनल ट्रेनिंग

रायपुर8 दिन पहले
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प्रतीकात्मक फोटो।

नई शिक्षा नीति से आने वाले समय में एजुकेशन सिस्टम में कई बड़े बदलाव नजर आएंगे। 34 साल बाद बनाई गई नई नीति के तहत स्टूडेंट अब 9वीं में सब्जेक्ट चुन सकेंगे। अब तक साइंस, कॉमर्स व ह्यूमैनिटीज जैसी स्ट्रीम्स ही स्टूडेंट्स काे चुननी पड़ती थी। स्ट्रीम सिस्टम अब खत्म कर दिया गया है। स्टूडेंट अपनी इच्छानुसार सब्जेक्ट ले पाएंगे। आर्ट्स के साथ साइंस, कॉमर्स के साथ आर्ट्स जैसे कोई भी मनपसंद सब्जेक्ट लेकर पढ़ाई कर सकेंगे। वर्तमान में अमेरिका सहित कई देशों में इसी सिस्टम के तहत पढ़ाई होती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार ये नियम लागू होने के बाद पहले साल से लगभग 50 फीसदी स्टूडेंट क्रॉस सब्जेक्ट लेकर पढ़ाई करने को तवज्जो देंगे। नई शिक्षा नीति के तहत अब 6वीं से 8वीं तक के स्टूडेंट्स को वोकेशनल ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके तहत स्टूडेंट्स को कोडिंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के साथ ही रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाली प्रैक्टिकल प्रॉब्लम को सॉल्व करने की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। बात करें प्ले स्कूल की तो इसमें बच्चों काे किताबों के बजाय खेल-खेल में पढ़ाई कराई जाएगी। नई शिक्षा नीति में टीचर्स को केंद्र में रखकर भी बदलाव किए गए हैं। टीचर्स को अब हर एकेडमिक ईयर में 50 घंटे की ट्रेनिंग लेनी होगी। इसका मकसद टीचर्स को पढ़ाने के रोचक तरीकों से लगातार अपडेट रखना है।

ऐसे समझें स्कूल एजुकेशन का नया पैटर्न
तीन साल की उम्र में बच्चों को प्ले स्कूल में एडमिशन दिया जाएगा। कुल 15 साल की पढ़ाई के बाद 18 साल की उम्र में स्कूल एजुकेशन पूरी होगी। 5+3+3+4 पैटर्न के तहत प्ले स्कूल में बच्चों को तीन साल पढ़ाई करनी होगी। इसके बाद पहली से दूसरी तक की पढ़ाई करेंगे। इसे नाम दिया गया है फाउंडेशन क्लासेस। प्रीपरेट्री स्टेज के तहत तीसरी से पांचवीं तक की पढ़ाई हाेगी। मिडिल स्टेज के तहत कक्षा छठवीं से 8वीं तक की पढ़ाई हाेगी। सेकेंडरी स्टेज के तहत कक्षा 9वीं से कक्षा 12वीं तक पढ़ाई हाेगी। सेकेंडरी स्टेज में स्टूडेंट पसंद के विषय चुन सकेंगे।

अब मास्टर डिग्री के बाद कर सकेंगे पीएचडी, इससे बढ़ेगी स्काॅलर्स की संख्या
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार एमफिल कोर्स को बंद कर दिया जाएगा। इसकी जगह स्टूडेंट मास्टर डिग्री या चार साल के बैचलर डिग्री प्रोग्राम के बाद पीएचडी कर सकेंगे। ऐसे में पीएचडी स्कॉलर्स की संख्या में बढ़ोतरी हाेगी। एक्सपर्ट के अनुसार नए नियम से स्टूडेंट्स के दाे से तीन साल बचेंगे। एमफिल से स्टूडेंट्स काे अधिक फायदा भी नहीं था। नए नियम के तहत स्टूडेंट्स 30 साल तक की उम्र तक पीएचडी कंपलीट कर सकेंगे। राज्य में वर्तमान में गवर्नमेंट और प्राइवेट संस्थानों से लगभग 300 पीएचडी स्कॉलर्स सालाना निकल रहे हैं। इनमें से चुनिंदा रिसर्च ही ग्लाेबल लेवल की हाेती है।

पसंद का सब्जेक्ट चुनने से बढ़ेगी सक्सेस रेट, सुधरेगी परफॉर्मेंस
एक्सपर्ट्स के अनुसार स्ट्रीम खत्म करके बच्चों को कोई भी मनपसंद सब्जेक्ट पढ़ने की छूट देने के नियम का बहुत अच्छा असर बच्चों की सक्सेस रेट और प्रोेडक्टिविटी पर पड़ेगा। वर्तमान में बायोलॉजी लेकर पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे साइंस और केमिस्ट्री में तो अच्छे होते हैं, लेकिन फिजिक्स में कमजोर होते हैं। चूंकि अब तक फिजिक्स पढ़ना अनिवार्य था, इसलिए बायोलॉजी लेने वालों को मजबूरन फिजिक्स भी लेना पड़ता था। फिजिक्स के कारण उनका सक्सेस रेट काफी प्रभावित होता था। अब बच्चा बायोलॉजी और केमिस्ट्री के साथ सोशियोलॉजी या म्यूजिक या पसंद का कोई भी विषय चुन सकेगा। इसका सीधा असर उसके परफॉर्मेस पर पड़ेगा। हर स्ट्रीम के बच्चों पर ये बात लागू होती है।

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