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छग में महंगाई का डोज:एक साल के भीतर दवाइयों के 15 से 50% तक बढ़े दाम, स्किन और मल्टी विटामिन समेत कई जरूरी दवाओं की कीमत दोगुनी

रायपुरएक महीने पहले
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पेनकिलर के दाम भी 25 से 30 फीसदी तक बढ़े।- प्रतीकात्मक इमेज - Dainik Bhaskar
पेनकिलर के दाम भी 25 से 30 फीसदी तक बढ़े।- प्रतीकात्मक इमेज

कोरोनाकाल के एक साल में कई जरूरी दवाओं की कीमत डेढ़ से दोगुना तक बढ़ गई है। बुखार के अलावा मल्टी विटामिन, प्रोटीन और मिनरल से लेकर स्किन व पेन किलर दवाओं की कीमत सबसे ज्यादा बढ़ी है। एंटी फंगल दवाइयों की कीमत में भी 15 से 20 फीसदी बढ़ोतरी हुई है।

कोरोना के पहले और बाद में मल्टी विटामिन दवाओं की जबरदस्त मांग के कारण इसके दाम 50 से 60 फीसदी तक बढ़ गए हैं। स्किन की कुछ दवाइयों के रेट 50 से 55 फीसदी तो पेन किलर की कीमत 25 से 30 फीसदी तक बढ़ी है। दवाओं की कीमत में बढ़ोतरी केवल ब्रांडेड नहीं जेनेरिक में भी हुई है। मेडिकल स्टोर संचालकों व थोक दवा कारोबारियों के अनुसार मार्च 2020 से प्रदेश में कोरोना की दस्तक हुई है। उसके बाद कई तरह की चर्चाएं उड़ीं। उसके बाद अचानक ही मल्टी विटामिन टेबलेट और सीरप की बिक्री बढ़ गई।

कुछ लोग डाक्टरों की सलाह पर तो कई अपने रिश्तेदारों और परिचितों के कहने पर मल्टी विटामिन लेने। मांग बढ़ने का असर जैसे ही बाजार में पड़ा, मल्टी विटामिन के दाम बढ़ने लगे। कोरोना नहीं भी हुआ तो लोग इम्युनिटी बढ़ाने के लिए मल्टी विटामिन का उपयोग करने लगे। विटामिन सी, जिंक के अलावा अन्य विटामिन की दूसरी दवाएं बिकने लगी। कीमतें बढ़ने के बावजूद इन दवाओं की मांग में कमी नहीं हुई। हालांकि जुलाई के बाद कोरोना के नए केस लगातार कमी होने से अब इन दवाओं की मांग में कमी आई है। एंटीबायोटिक दवाओं की कीमत में भी 25 फीसदी तक की वृद्धि हुई है।

जेनेरिक दवाओं में उछाल
जेनेरिक दवा के दामों में भी काफी उछाल आया है। अंबेडकर अस्पताल समेत जिला अस्पताल पंडरी व कालीबाड़ी में जेनेरिक दवा का स्टोर है। कीमत बढ़ने का असर लोगों पर पड़ रहा है। हालांकि रेडक्रास मेडिकल स्टोर में लोगों को 20 से 60 फीसदी छूट पर दवा बेची जा रही है, जबकि दूसरे मेडिकल स्टोर्स पर जेनेरिक दवाएं प्रिंट मूल्य पर बेची जा रही है। लोगों को छूट पर दवा लेनी हो तो वे रेडक्रास मेडिकल स्टोर पर जाकर इसे खरीद सकते हैं।

ट्रांसपोर्टेशन भी महंगा हुआ
दवा विक्रेता संघ के अध्यक्ष विनय कृपलानी और सचिव लोकेश साहू का कहना है कि चीन से कच्चा माल कम आ रहा है। यहां कास्टिंग महंगी है। ट्रांसपोटेशन भी दोगुना हो गया है। पहले गुजरात से ट्रक 40 हजार में आता था अब 75 हजार तक चार्ज देना पड़ जाता है। इस वजह से एक साल में ही दवाओं की कीमत बढ़ गई है।

वजह ये बतायी जा रही
दवाओं की कीमत बढ़ने का कारण इसमें इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल को बताया जा रहा है। ज्यादातर दवाओं का कच्चा माल चीन से आता है। कोरोना के दौर में कच्चा माल चीन से नहीं आ पाया। कारोबारियों के अनुसार इसी वजह से दवाओं की कीमतें बढ़ गई हैं। अब कारोबार शुरू हो गया है लेकिन कच्चे माल का दाम एक बार बढ़ने के बाद कम नहीं हो रहा है। इसलिए दवाओं की कीमत बढ़ गई है।

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