आश्वासन पर आंदोलन खत्म:सहायक आरक्षकों के परिजन ने सड़कें घेरीं तो DGP ने दफ्तर बुलाया और कहा- मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे

रायपुर5 महीने पहले
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नवा रायपुर के पुलिस हेड क्वार्टर (PHQ) में DGP अशोक जुनेजा ने सहायक आरक्षकों की पत्नियों से मुलाकात की। उन्होंने महिलाओं से बात कर उनकी मांगों को गंभीरता से सुना। पुलिस परिवार के प्रतिनिधियों का ज्ञापन लिया। इसके बाद जुनेजा ने कहा कि आपकी मांगे पूरी हों हम इसका प्रयास करेंगे। आपकी मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाएगा। DGP से मिले आश्वासन के बाद महिलाएं नवा रायपुर से अब बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा जिलों को लौट जाएंगी। सोमवार से ये सभी महिलाएं रायपुर में विरोध-प्रदर्शन कर रहीं थीं।

मुलाकात के दौरान DGP।
मुलाकात के दौरान DGP।

सुबह नवा रायपुर में हंगामा
मंगलवार की सुबह सहायक आरक्षकों की पत्नियों ने नवा रायुपर में हंगामा कर दिया। चीचा की सड़क घेरकर महिलाएं सड़क पर ही बैठ गईं। आनन-फानन में फिर इस जगह पर पुलिस पहुंची। करीब 2 घंटे तक चले हंगामे के बाद PHQ से बुलावा आने पर महिलाएं शांत हुईं।

नवा रायपुर में चक्का जाम।
नवा रायपुर में चक्का जाम।

सोमवार को भी दिन में नवा रायपुर में विरोध प्रदर्शन के बाद सप्रे स्कूल में बनाए अस्थाई जेल में महिलाओं को लाया गया था। रात भी इसी कैंपस में बितानी पड़ी। सभी महिलाएं प्रदेश के DGP अशोक जुनेजा से मुलाकात करना चाहती थीं। पुलिस विभाग का कोई बड़ा अफसर इन महिलाओं से मिलने नहीं आया। सहायक आरक्षकों की इन पत्नियों ने मजबूरी में छोटे बच्चों के साथ गंदगी और मच्छर के बीच रात बिताई।

छोटे बच्चे भी मां के साथ इस बदहाली को झेलते रहे रात भर।
छोटे बच्चे भी मां के साथ इस बदहाली को झेलते रहे रात भर।

यह सभी महिलाएं बस्तर, रायगढ़, बिलासपुर जैसे शहरों से रायपुर पहुंची हुई थीं। यहां किसी को जानती भी नहीं थीं। खाने का बंदोबस्त तक करने में दिक्कत हुई। महिलाओं की मांग है कि इनके पतियों की वेतन विसंगति को दूर किया जाए, पुलिस विभाग में उन्हें नियमित नौकरी दी जाए, रिटायरमेंट- पेंशन और अनुकंपा नियुक्ति के नियम लागू किए जाएं। सोमवार की सुबह इन्हीं मांगों को लेकर ये महिलाएं PHQ घेरने पहुंची थीं। पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया।

इन युवकों ने पूछा क्या बड़े ऐसे खाना खाते हैं।
इन युवकों ने पूछा क्या बड़े ऐसे खाना खाते हैं।

रात होते ही गंदगी और मच्छरों ने महिलाओं को काफी तंग किया। जहां इन्हें रखा गया था वहां निगम ने शहर से फ्लेक्स उखाड़कर फेंके थे, इसे ही बिछाकर बच्चों को उस पर सुलाया। किसी के पास चादर थी तो बच्चों को ओढ़ाया किसी ने अपने आंचल से ही मच्छरों से बचाने बच्चों को ढंक लिया। कुछ देर बाद पीने के पानी के लिए एक टैंक आया। इसका पानी और गंदगी बहकर वहां आ गई, जहां महिलाएं सो रही थीं। आधी रात ये सभी नया बस स्टैंड जाने को मजबूर हुईं, फिर वहां जाकर रात काटी।

जहां बच्चे को सुलाया वहां पानी बहकर आ गया।
जहां बच्चे को सुलाया वहां पानी बहकर आ गया।

परिजन की मांग- सरकार के प्रतिनिधि आकर मिलें
इन महिलाओं के साथ विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे उज्जवल दीवान ने कहा कि पुलिस अगर अपनी कस्टडी में किसी को रखती है तो उसके खाने-पीने का भी बंदोबस्त करती है। यहां महिलाएं और छोटे बच्चे हैं, मगर प्रशासन ने किसी का ध्यान नहीं दिया।

पुलिसकर्मियों के लिए आंदोलन करने वाले कार्यकर्ता राकेश यादव भी रातभर डटे रहे।
पुलिसकर्मियों के लिए आंदोलन करने वाले कार्यकर्ता राकेश यादव भी रातभर डटे रहे।