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धान खरीदी 1 से:1405 नए किसान जुड़े पर गिरदावरी में 1930 हेक्टेयर रकबा कम भी हुआ

पलारी2 महीने पहले
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  • पिछली बार 187623 हेक्टेयर तो इस साल घटकर 185693 हेक्टेयर का ही पंजीयन हुआ

जिले में धान खरीदी 1 दिसंबर से शुरू होने जा रही है। इस साल धान बेचने वाले किसानों की संख्या पिछले वर्ष से ज्यादा है। गिरदावरी के चलते जिले में 1405 नए किसान जरूर बढ़े मगर इससे ज्यादा रकबा घट गया, इस बार जिले में कुल 1930 हेक्टेयर धान का रकबा कम हुआ है। पिछली बार 187623 हेक्टेयर का पंजीयन हुआ था तो इस साल घटकर 185693 हेक्टेयर का पंजीयन हुआ है। गिरदावरी में फसल की किस्मों का सर्वे होता है, जिसमें यह देखा जाता है कि किसान ने कितने एकड़ में धान बोया है और कितनी जमीन पड़त है या कितनी जमान में सब्जी आदि ली गई है। इसी आधार पर केवल धान के रकबे पंजीयन किया जाता है, शेष फसलों का नहीं। जिले में पहुंचे 50 लाख नए बारदाने पहुंच चुके हैं जिससे 15 की खरीदी की व्यवस्था हो चुकी है।

कोलकाता से जूट के बोरे कम आ रहे, गुजरात
से आ रही प्लास्टिक की बोरियां: डीएमओ

डीएमओ जसवीर बघेल का कहना है कि इस बार कोलकाता से जूट बारदानों की कम सप्लाई के चलते प्लास्टिक बोरी में भी धान खरीदी की जाएगी जिसके लिए 45 लाख बोरियों का आर्डर दिया जा चुका है। इस बार कोरोनाकाल में कारखाने बंद होने के कारण कोलकाता में जूट के बोरों का उत्पादन हुआ ही नहीं। प्लास्टिक की बोरियां गुजरात से सप्लाई हो रही हैं। वैसे प्लास्टिक बोरी सिर्फ एक ही सीजन में काम आती है क्योंकि धूप बारिश में जल्दी खराब हो जाती है और जूट का बोरा 2 से 3 साल तक काम आता है। कोरोना के कारण इस बार बारदानों की सप्लाई थोड़ी धीमी है मगर हमारे पास एक माह का स्टॉक हो गया है।

15 दिन की खरीदी की व्यवस्था पूरी हो चुकी
अधिकारियों की मानें तो प्लास्टिक की बोरियां 5 दिसंबर तक बलौदाबाजार पहुंच जाएंगी। बताना लाजिमी है कि प्लास्टिक बोरी में धान खरीदी सिर्फ एक सीजन तक ही हो सकती है, इसी कारण जूट बोरी का ही उपयोग किया जाता था मगर सप्लाई न होने से प्लास्टिक बोरी का उपयोग करने की तैयारी है। जिले में जूट के 30 लाख बारदाने ही पहुंचे हैं, करीब 20 लाख पुराने बारदानों को मिलाकर यह संख्या 50 लाख के लगभग हो गई है। अब तक 100 से अधिक खरीदी केंद्रों में 10 लाख बारदाने पहुंच भी चुके हैं। उपलब्ध बोरों से जिले में 15 दिनों तक खरीदी की व्यवस्था हो चुकी है। धान खरीदी के लिए 1 करोड़ 74 लाख बारदानों की जरूरत होगी, जिसमें 45 लाख प्लास्टिक बोरियां भी पहुंचने वाली हैं।

आज से कटना शुरू होगा टोकन
धान बेचने के लिए इस साल भी टोकन सुविधा दी गई है ताकि खरीदी केंद्र में भीड़ न लगे। इसके लिए 27 नवंबर से टोकन कटना प्रांरभ हो जाएगा वहीं कोविड 19 को देखते हुए इस बार खरीदी केंद्रों में धान बेचने वालों की संख्या कम हो सकती है ।

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