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जरूरत का जोखिम:पूरी बरसात तेज बहाव के बीच 20 हजार लोग पार करते हैं एनीकट

पलारी10 महीने पहले
  • अमेठी एनीकट से गुजरने पर पास पड़ता है कसडोल, बलौदाबाजार और रायपुर का रास्ता

ब्लॉक मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर पलारी कसडोल ब्लॉक को जोड़ने वाली महानदी पर 2009-10 में अमेठी एनीकट बना जो बरसात के 4 माह लोगों के लिए मुसीबत भरा रहता है। लोग जान जोखिम में डालकर इसे 4 माह इसी तरह पार करते हैं क्योंकि सारे जरूरी कामों‌ का सेतु यही है। कसडोल, बलौदाबाजार, राजधानी जाने का यही एकमात्र पास का रास्ता है। इस एनीकट से ग्राम पीपरछेड़ी, रीवासरार, मुड़ीपार, सुकदा, भटभेरा ,अर्जुनी, खैरा, बलदा, भड़ोडा, भोथाही ,पैरागुड़ा ,बरबसपुर, दौनाझार, घिरघोल आदि गांव के करीब 20 हजार लोगों का आना-जाना होता है।  एनीकट के उस पार पड़ने वाले कसडोल ब्लाक तक लोगों को शासकीय काम व अन्य जरूरतों के लिए जिला मुख्यालय बलौदाबाज़ार एवं राजधानी रायपुर जाने के लिए अमेठी एनीकट पार करना ही पड़ता है। इस रास्ते की दूरी भी कम है। यहां से 30 किलोमीटर जिला मुख्यालय और 85 किलोमीटर राजधानी पड़ती है मगर बरसात में आए दिन एनीकट उफान पर रहता है और रास्ता बंद हो जाता है तब ग्रामीण इस तरह जान जोखिम में डालकर एनीकट पार करते हैं। 

विकल्प के रास्ते 70 और 150 किमी लंबे
पार करते हैं। इस खतरे को कम करने के लिए अमेठी महानदी घाट पर सेतु निर्माण की जरूरत वर्षों से महसूस की जा रही है, जिसकी मांग भी लगातार ग्रामीण कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब राम वनगमन का तुरतुरिया पर्यटन स्थल बन रहा है तो वहां तक जाने के लिए भी पलारी बलौदाबाज़ार एवं राजधानी के लोगों के लिए भी ये एनीकट का रास्ता काफी पास का सफर होगा क्योंकि एनीकट से तुरतुरिया महज 15 किलोमीटर दूर ही है ।

सेतु बनाने राज्य गठन के समय से हो रही मांग
 महानदी के अमेठी एनीकट पर ऊंचा सेतु बनाने की मांग ग्रामीण जबसे छत्तीसगढ राज्य बना है तब से कर रहे हैं पर जिम्मेदार अफसर व नेता बड़े बजट का हवाला देकर मांग को टाल रहे हैं। तत्कालीन सीएम अजीत जोगी के  2000 में रोहांसी दौरे पर भी यह मांग जोरों से उठी थी। जोगी की सभा में पहुंचे ग्रामीणों ने अमेठी सेतु निर्माण की मांग की थी पर आश्वासन के सिवा कुछ नहीं हुआ। ग्रामीण भक्तू कंवर, रामनाथ, पारस, कमल नारायण राजपूत, कमलनारायण, राधेश्याम, बद्री नारायण, रामसिंग, जीवन, मोतीलाल, रिखी, ओमप्रकाश पांडेय सहित सैकड़ो‌ं ग्रामीणों ने फिर से भूपेश बघेल सरकार से इस दिशा में कदम उठाने की मांग की है। आदि ग्रामीणों ने जल्द ही एनीकट को उच्च सेतु निर्माण की मांग की है ।

हर बरसात में बहाव बढ़ने से डूब जाता है एनीकट

एनीकट हल्की बारिश या समोदा का डायवर्सन का बहाव बढ़ने से भी डूब जाता है। अगर कोई सुबह एनीकट पार कर गांव गया है तो एक दो-घंटे बाद वापस लौटने के पहले उसे लोगों से फोन पर पूछना पड़ता है कि एनीकट डूबा तो नहीं है, बरसात के पूरे 4 माह यही स्थिति रहती है। यही कारण है जो लोग सुबह या दोपहर में एनीकट पार करके गाड़ियों से बाहर गए होते हैं वे उफनती नदी को जान जोखिम में डाल पार करते हैं। अमेठी एनीकट रविवार की सुबह 10 बजे अचानक डूब गया जबकि बारिश नहीं हुई थी पर उपरी क्षेत्रों आरंग, रायपुर आदि में पानी गिरने से महानदी का बहाव बढ़ गया, जिससे अमेठी एनीकट का पानी पुल पर आ गया और लोग खतरों की बीच एनीकट पार करते रहे।

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