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पीड़ा:दूसरे राज्यों में फंसे मजदूर बोले-घर पहुंचा दीजिए मर भी गए तो सुकून रहेगा कि अपनों के साथ थे

पलारी10 महीने पहले
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  • पलारी ब्लाक के छेरकाडीह के 250 मजदूर फंसे हैदराबाद व चंद्रपुर में, खाना-पानी भी नसीब नहीं

चंद्रशेखर वर्मा। पलारी क्षेत्र के छेरकाडीह तेलंगाना व महाराष्ट्र में फंसे मजदूर परिवारों ने गांवों के सरपंचों से घर वापस बुलाने की गुहार लगाई है। वहां करीब 250 मजदूर फंसे हैं।  इन मजदूरों का कहना है कि हम भूखे-प्यासे हैं, कभी एक समय का खाना मिल जाता है तो कभी पूरा दिन भूखे गुजारना पड़ता है। छोटे बच्चे तो कई बार भूख से रोते रहते हैं, हमारे पास पैसा है न राशन, हम करें तो क्या करें। इन मजदूरों में कई कुशल भी हैं, जो वाट्सएप आदि से कनेक्ट हैं। 
उन्होंने मजदूर दिवस का हवाला देकर कहा है कि हमें सम्मान मत दो बस हमारे घर वापस पहुंचा दो। घर पहुंचकर मर भी गए तो सुकून तो रहेगा कि अपनों के बीच मौत हुई। मामले में 225 लोगों के फंसे होने की जानकारी सरपंच मोहर नीलकंठ बंजारे ने जनपद पंचायत के सीईओ सनत महादेवा को सौंपी है, सीईओ ने कहा कि उन्होंने छेरकाडीह के 216 की सूची जिला प्रशासन को प्रेषित कर दी है।  
पलारी ब्लाक के छोटे से गांव छेरकाडीह जहां की कुल आबादी 1100 है, इस गांव से करीब 250 लोग जीने खाने-कमाने महाराष्ट्र, तेलंगाना (हैदराबाद) गए हैं। ये सभी लॉकडाउन के कारण वहां फंस गए हैं।  गांव के सरपंच मोहर नीलकंठ बंजारे को छेरकाडीह के ग्रामीणों  महेश लहरी, रामकुमार, सुरेश, सारिका, शत्रुघ्न, ईश्वरी, गोकुल, डोमार, संतोषी सहित 30 लोगों ने फोन पर बताया कि वे हैदराबाद के मयूरी नगर (मियांपुर थाना) में फंसे हैं। सारे मजदूर भवन निर्माण के कार्य मे लगे थे, उनके पास खाने-पीने का सामान नहीं है। कभी किसी शिविर में समय पर पहुंच गए तो खाना मिल जाता है वरना भूखे सोने की नौबत आ जाती है। इसी तरह चंद्रपुर (महाराष्ट्र) में निखिल यमुना धनेश हेमलता, खिलेंद्र, ईश्वर, दुर्गा बाई, लक्ष्मी, रिंकू, सहित 150  से अधिक लोगों ने अपने परिवार के माध्यम से सरपंच से वापस गांव आने की गुहार लगाई है। इनका भी हाल तेलंगाना में फंसे मजदूरों जैसा ही है। परिजन को फोन पर इन मजदूरों ने बताया कि न तो यहां काम मिल रहा है, न खाने-पीने की सुविधा। इनमें से कई तो फोन पर बात करते-करते रो पड़े। इन्हीं में से कुछ ने मजदूर दिवस का हवाला देकर परिजन से कहा कि ये दिवस हमारे किस काम का? बस हमें घर पहुंचा दो, यही बहुत है। सभी ने सरपंच से निवेदन किया कि हमें हमारे ही गांव या आसपास काम दिला दें, अब वे घर छोड़कर बाहर नहीं जाएंगे। 

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