किसान परेशान:नदी में पानी छाेड़ा तो तरबूज की खेती बर्बाद दो करोड़ का नुकसान, रेत माफिया पर शक

पलारी5 महीने पहले
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महानदी में तरबूज की खेती पानी में डूब गई। किसानों की झोपड़ी में भी घुसा महानदी का पानी। - Dainik Bhaskar
महानदी में तरबूज की खेती पानी में डूब गई। किसानों की झोपड़ी में भी घुसा महानदी का पानी।

महानदी में जमीन लीज पर लेकर तरबूज की खेती करने वाले 20 गांव में दो सौ एकड़ तरबूज की खेती बर्बाद हो गई। इससे 100 से अधिक किसानों को 2 करोड़ का नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है रेत माफियाओं के कारण ही बर्बाद हो गए। अवैध रेत निकालने के लिए डैम और एनीकट से लगातार साजिश कर महानदी में पानी छुड़वाने से तरबूज और सब्जी बाड़ी को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया है ताकि मनमानी पूर्वक रेत निकाल सके।

साहूकारों से लाखों रुपए कर्ज लेकर खेती कर रहे थे। अब कर्ज में डूब गए हैं। महानदी में लीज पर सालों से तरबूज की खेती कर रहे किसानों ने कहा कि वे लोग सालों से महानदी में सब्जी, तरबूज, ककड़ी व खरबूज की खेती करते आ रहे हैं। पहले कभी भी इस तरह का नुकसान उठाना नहीं पड़ा मगर जब से रेत घाटों को नीलाम किया गया और जगह-जगह अवैध रेत उत्खनन कार्य हो रहा है तभी से बाड़ी लगाने वाले किसानों को नुकसान होने लगा है।

लगातार हो रहा नुकसान
महानदी में जगह-जगह एनीकट और डैम बन जाने से अधिक मात्रा में पानी स्टोरेज होता है और महानदी में चैन माउंटेन से 24 घंटे अवैध रेत उत्खनन से घाटों की रेत तेजी से खत्म हो रहा है। इससे माफियाओं की नजर महानदी में खेती करने वाले किसानों की लीज वाले बाड़ी पर है, जहां भरपूर रेत है इसलिए तरबूज की खेती को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने पानी छुड़वाया।

किसानों की कोई नहीं सुनता
लीज पर खेती करने वाले किसानों ने कहा कि वे छोटे लोग हैं। एक दो एकड़ जमीन लीज पर लेकर नदी में खेती करते हैं। लगातार हो रहे नुकसान को लेकर वे जनप्रतिनिधि और अधिकारियों के दरवाजे खटखटा चुके हैं कि एनीकट और डैम में उतना ही पानी रखे और नदी में छोड़ें, जिससे किसानों को नुकसान न हो मगर किसानों की बातों पर किसी ने गौर नहीं किया।

जलस्तर बढ़ने पर छोड़ा जाता है पानी: ईई
इस मामले में जल संसाधन कसडोल के ईई एनके पांडेय ने कहा कि जब ऊपर जल स्तर बढ़ता है तो पानी महानदी में छोड़ा जाता है। अभी बारिश होने के कारण ज्यादा पानी छोड़ना पड़ा है।

इन गांवों में तरबूज की खेती बर्बाद
महानदी में लीज पर लेकर ग्राम डोंगरीडीह, परसापाली,डोंगरा, तिल्दा, लाटा, दर्रा, चाटीपाली, मोहतरा, चिचपोल, दतरेंगी, दतान, बम्हनी, मोहान, अमेठी में महानदी पर तरबूज व सब्जी की खेती करने वाले शिव वर्मा, भुनेश्वर, रामकिशन, हरबंस खिलावन, रामा, पुनीत, रामरतन, पुरुषोत्तम, हरिराम, अरुण साहू, ओमप्रकाश, अमर सिंह, बलराम, डेरहा राम, उत्तम, अनीता राव, रामनाथ, पूर्णिमा साहू आदि किसानों ने कहा कि वे लोग पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। रेत माफियाओं को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नदी में पानी छोड़कर किसानों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया है, क्योंकि इतनी बारिश नहीं हुई कि नदी में पानी छोड़ना पड़े।