रेत के अवैध उत्खनन का मामला:अवैध रेत परिवहन के लिए सहायक आरक्षक कर रहा था वसूली

पखांजूर8 महीने पहले
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ग्राम परतापुर में पुलिस के संरक्षण में हो रेत के अवैध उत्खनन के मामले में सोमवार को जब प्रशासन के दल ने छापा मारा, तो पुलिस का सहायक आरक्षक नदी के घाट में अवैध पैसे की वसूली करता मिला। जवान नदी के घाट के पास अपनी स्कूटी और हिसाब का रजिस्टर लेकर रेत ले जा रहे ट्रैक्टरों की एंट्री कर रहा था।

इसके साथ ही पैसे का भी हिसाब रख रहा था। प्रशासन के दल ने जब उसे रंगे हाथ पकड़ा, तो वह अपनी स्कूटी में प्रशासन के दल को चकमा दे भाग गया। दल ने उसे पकड़ने करीब दो घंटे मशक्कत की लेकिन जवान को नहीं पकड़ पाए। ग्राम परतापुर में पुलिस के संरक्षण में कोटरी नदी में हो रहे अवैध रेत खनन में जब तहसीलदार शेखर मिश्रा के दल ने सोमवार को छापा मारा तो पुलिस का जवान ही अवैध रेत खनन में लगे ट्रैक्टरों से रेत का पैसा लेता मिला। थाना परतापुर में पदस्थ सहायक आरक्षक देवसिंह पोटाई रेत घाट के ऊपर ही अपनी स्कूटी में बैठ रेत ले जा रहे ट्रैक्टरों का हिसाब किताब कर रहा था।

इसके बाद जवान ने बड़ी चालाकी से प्रशासन को यह विश्वास दिला दिया की वह वसूली नहीं कर रहा, बल्कि वसूली थोड़ी दूर में दूसरा जवान कर रहा है। वह उसके पास ले जाएगा। प्रशासन का दल उसके झांसे में आ गया और वह अपनी स्कूटी में चल पड़ा। प्रशासन के अधिकारी अपनी चार पहिया वाहन में उसके पीछे-पीछे चलते रहे। इसके बाद जवान गांव से बाहर आया और तेजी से फरार हो गया।

रजिस्टर में पूरी जानकारी
जवान से मिले रजिस्टर में हिसाब-किताब और वसूली की पूरी जानकारी प्रशासन के हाथ लग गई। रजिस्टर में बाकायदा इसके लिए नियुक्त जवान का नाम, पद नाम, उसका क्रमांक दर्ज है। चकमा दे रहे जवान की पहचान रजिस्टर में दर्ज नाम के जवान के रूप में हुई है।

रेत खनन में वसूली के आरोप गलत
परतापुर के थाना प्रभारी विसेन पिस्दा से इस संबंध में जानकारी ली गई तो उन्होंने सहायक आरक्षक देवसिंह पोटाई उनके थाने का स्टाफ होना तो स्वीकारा, लेकिन अवैध रेत खनन में पुलिस द्वारा वसूली जैसे आरोपों को नकार दिया।

वसूली करना ही जवान का था काम
प्रशासन के अधिकारियों को प्राप्त रजिस्टर में अवैध रेत खनन का कच्चा चिट्ठा है। इस अवैध वसूली के काम में लगे जवान का पहले पन्ने में नाम लिखा है। जो जवान प्रशासन को चकमा दे कर भागा, उसकी पहचान भी उस रजिस्टर के पहले पन्ने में लिखे जवान के नाम के रूप में ही हुई। जवान का इस थाने में वसूली का ही काम है। वह लंबे अर्से से इस काम में लगा है। प्रशासन के अधिकारी जवान को खोजते हुए जब उसके घर पहुंचे तो उसकी पत्नी ने भी उसका काम रेत ट्रैक्टर का हिसाब रखना बताया।

रेत के अवैध परिवहन का एक भी मामला नहीं
परतापुर थाने में हो रही रेत खनन का कार्य पुलिस संरक्षण में हो रहा है। रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टर इस थाने के सामने से ही रेत खनन कर ले जा रहे है, लेकिन आज तक परतापुर पुलिस ने एक ट्रैक्टर के खिलाफ भी मामला दर्ज नहीं किया। ग्राम पंचायत परतापुर के सरपंच राजाराम कोमरा ने तो पुलिस पर रेत खनन कराने का सीधा आरोप लगाया है। सरपंच ने कहा वर्तमान थाना प्रभारी प्रति ट्रैक्टर से चार से पांच हजार रुपए महीना ले रहे हैं और घाट में जवान बैठा इसकी वसूली करा रहे हैं। ग्रामीण इसका विरोध करते हैं तो उन्हें नक्सली प्रकरण में फंसा तो कभी 151 के तहत केस बना जेल भेजा जा रहा है।

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