अव्यवस्था:चार साल पहले खुले अंग्रेजी स्कूल में जगह नहीं हफ्ते में 3 दिन लगती हैं अलग-अलग कक्षाएं

पखांजूरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक

कोयलीबेड़ा ब्लॉक में चार साल पूर्व खुले अंग्रेजी माध्यम स्कूल उपेक्षा का शिकार हो गया है। चार साल बाद भी स्कूल में न अब तक शिक्षकों की नियुक्ति हुई है और न ही स्कूल को स्वयं का भवन मिल सका है। शिक्षक के अभाव में हिंदी मीडियम के शिक्षक ही बच्चों को पढ़ा रहे हैं। छात्र संख्या अधिक होने और स्कूल जगह न होने के चलते सप्ताह में तीन दिन दो कक्षा तथा तीन दिन दो कक्षाओं का संचालन हो रहा है।

चार साल पूर्व बड़े दावों के साथ खुले इंग्लिश मिडियम शासकीस प्राथमिक तथा माध्यमिक स्कूल का हाल आज ठीक वैसा ही है, जैसा अन्य शासकीय स्कूलों का है। अंग्रेजी माध्यम का स्कूल होने के चलते बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रवेश ले लिया, तो अब बच्चों को बैठने की जगह भी नहीं मिल रही। रोजाना कक्षाओं में इतनी संख्या में छात्र रहते हैं कि एक कुर्सी टेबल में दो से तीन छात्रों को बैठना होता है।

स्कूल में चौथी तक 144 बच्चे : हर साल एक-एक कक्षा बढ़ाए जाने के कारण आज चौथी कक्षा तक पढ़ाई शुरू हो गई है और प्राथमिक स्कूल में 144 छात्र हैं। इसके पहले यह हिंदी माध्यम से संचालित था। इस दौरान शाला में छात्रों की संख्या काफी कम थी और दो कक्षाओं में ही पांचवी तक पढ़ाई हो रही थी। अब दो कक्षाओं में इतने छात्र नहीं बैठ पाते। ऐसे में दो पाली में प्राथमिक शाला का संचालन हो रहा है। सप्ताह के सोम, मंगल तथा बुधवार को कक्षा पहली तथा दूसरी की पढ़ाई होती है और तीन दिन तीसरी व चौथी के छात्रों को पढ़ाया जाता है।

एक साथ स्कूल लगाएंगे तो बैठने की जगह नहीं होगी : प्रधान पाठिका सुभद्रा राय ने बताया शाला में जगह के साथ शिक्षक भी नहीं है। इस कारण इस तरह सप्ताह में दो पाली में बांटकर स्कूल का संचालन हो रहा है। एक साथ इतने बच्चों को बुला लिया जाए, तो बैठने तक की जगह नहीं होगी, पढ़ाई लिखाई तो दूर की बात है।

स्कूल में शिक्षकों की नहीं हो पाई पदस्थापना
चार साल पूर्व पखांजूर के ग्राम पीवी 116 में संचालित हिंदी माध्यम स्कूल को अंग्रेजी माध्यम में बदल दिया गया। तुरंत शिक्षकों की नियुक्ति न होने तक हिंदी माध्यम के उन शिक्षकों को जिन्होंने अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की थी, इस शाला में अटैच कर दिया गया। यहां चार शिक्षकों को अटैच किया गया था जो अब केवल तीान बचे हैं। इस दौरान इस शाला में हिन्दी मीडियम के छात्रों की भी पढ़ाई हो रही थी। आज माध्यमिक तथा प्राथमिक शाला में एक भी हिंदी माध्यम का छात्र नहीं है, लेकिन उनका पूरा स्टाफ इसी स्कूल में पदस्थ है और इनके द्वारा ही छात्रों को पढ़ाई कराई जा रही है।

खबरें और भी हैं...