कार्रवाई पर सवाल:बेला भाटिया ने कहा- फर्जी केस बना 8 को जेल भेजा, एसपी बोले- 6 पर 17 लाख का इनाम, दो हार्डकोर

सुकमाएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
पकड़े गए नक्सलियों के साथ पुलिस व सीआरपीएफ के अफसर। - Dainik Bhaskar
पकड़े गए नक्सलियों के साथ पुलिस व सीआरपीएफ के अफसर।

जिले के मोरपल्ली के जंगलों से पुलिस ने कुछ नक्सलियों को पकड़ने का दावा किया है। दावा है कि जो नक्सली पकड़े गये हैं उनमें से कई लाखों के इनामी हार्डकोर नक्सली हैं। इधर पुलिस की यह गिरफ्तारी विवादों में आ गई है। मामले में सामजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया ने पुलिस के द्वारा की गई गिरफ्तारी को फर्जी बताया है। उन्होंने दावा किया कि निर्दोष लोगों को फंसाया जा रहा है।

बस्तर में लंबे समय के बाद इस तरह से फर्जी गिरफ्तारी वाला विवाद सामने आया है। हालांकि पुलिस ने जो कहानी बताई है उसके अनुसार एरिया डोमिनेशन के दौरान कोबरा 201 बटालियन के जवानों के हत्थे चढ़े 17 लाख के इनामी 8 नक्सलियों को पुलिस ने शुक्रवार काे गिरफ्तार कर स्थानीय न्यायालय में पेश किया।

जहां से सभी को जेल भेज दिया गया। पकड़े गए नक्सलियों में 8 लाख का इनामी बटालियन सदस्य कवासी राजू उर्फ संतू, 5 लाख का इनामी मिलिशिया कंपनी कमांडर कलमू माड़ा, 1-1 लाख का इनामी दण्डकारण्य आदिवासी किसान मजदूर संगठन अध्यक्ष कोमरान कन्ना व तुरमस मुदराज, मिलिशिया कमांडर मड़कम हिड़मा, सीएनएम कमांडर मड़कम एंका के अलावा दो मिलिशिया सदस्य मड़कम सोमा व मड़कम मुत्ता शामिल हैं। पकड़े गए नक्सली भेज्जी, चिंतागुफा गोलापल्ली थाना क्षेत्र के गांवों के निवासी हैं। गिरफ्तार नक्सलियों के पास से बैटरी, डोटोनेटर, जिलेटिन राॅड, आईईडी, कोर्डेक्स वायर, जिलेटिन कैप्सूल, इलेक्ट्रिक वायर समेत अन्य विस्फोटक पदार्थ व सामग्री बरामद होने का पुलिस ने दावा किया है।

ग्रामीणों को अदालत में पेश नहीं किया गया: बेला
शुक्रवार को जेल भेजे गए 8 नक्सलियों में 2 नक्सली मड़कम मुत्ता व कमलू माड़ा के परिजनों मड़कम हुर्रा, नरेश मड़कम, किशोर कुमार व कलमू गंगा के साथ शनिवार दोपहर स्थानीय प्रेस क्लब भवन में सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया ने प्रेसवार्ता कर बताया कि सिलगेर गोलीकांड के बाद से इलाके के आदिवासी अपनी विभिन्न मांगाें को लेकर पिछले 6 महीने से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। इसी क्रम में मूलवासी बचाव मंच के बैनर तले 1 नवम्बर को सिलगेर में बड़ी संख्या में आदिवासियों ने सभा व रैली की थी।

दूर-दराज के ग्रामीण भी बड़ी संख्या में सभा व रैली में शामिल होने सिलगेर पहुंचे थे। 2 नवम्बर की सुबह 9 बजे लगभग 55 की संख्या में साइकिल से वापस लौटते ग्रामीणों को फोर्स ने मोरपल्ली के जंगलों में रोक लिया। यहां से उन्हेंं जबरन चिंतलनार लेकर आए। यहां उनकी फोटो ली गई। पूछताछ के बाद 3 नवम्बर को 43 लोगों को छोड़ दिया गया। 1 महिला, 3 नाबालिग समेत कुल 12 लोगों को सुकमा लाया गया।

इनमें से 8 को नक्सली बताकर उनके पास से विस्फोटक व विस्फोटक बनाने में उपयोग में लाई जाने वाली सामग्री बरामद होने का झूठा केस बनाकर उन्हें जेल भेज दिया। बेला भाटिया ने बताया कि शनिवार को वह खुद फर्जी केस में जेल भेजे गए लोगों से मुलाकात करने जेल गईं थीं। जेल भेजने से पहले किसी को भी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया। उन्हें बस में बिठाकर ले जाया गया और वे बस में ही बैठे थे। जो पूरी तरह से गलत है। दो लोगों ने सालों पहले नक्सली संगठन छोड़ दिया है।

कोबरा जवानों की कार्रवाई, आरोप झूठे
एसपी सुनील शर्मा ने कहा कि पकड़े गए 8 नक्सलियों को विस्फोटक सामग्री के साथ कोबरा 201 बटालियन के जवानों ने संदिग्ध अवस्था में सर्चिंग के दौरान मोरपल्ली के जंगलों से मंगलवार को पकड़ा था। पूछताछ के बाद गुरुवार को उन्हें गिरफ्तार कर शुक्रवार को स्थानीय न्यायालय में पेश किया। जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पकड़े गए दो नक्सली एसीएम कैडर के हार्डकोर नक्सली हैं। इनमें से एक पर 8 और दूसरे पर 5 लाख का इनाम था। इसके अलावा अन्य 4 नक्सली 1-1 लाख के इनामी हैं। सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया द्वारा पुलिस पर लगाए गए आरोपों को एसपी सुनील शर्मा ने सिरे से खारिज करते हुए उन्हें झूठा बताया।

खबरें और भी हैं...