CG में नक्सली गांव से पहली बार ग्रामीण बाहर निकले:कोंटा पहुंचकर अफसरों से कहा- गांव में सड़क-बिजली-पानी और स्कूल-अस्पताल खोलिए

कोंटा4 महीने पहले
सुकमा में अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन देने अफसरों के पास पहुंचे ग्रामीण। - Dainik Bhaskar
सुकमा में अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन देने अफसरों के पास पहुंचे ग्रामीण।

छत्तीसगढ़ के सुकमा में शनिवार का दिन ऐतिहासिक हो गया। नक्सली साए में रहने वाले युवा, महिलाएं और बुजुर्ग विकास के लिए 'नक्सल' गढ़ की सीमाओं को लांघ गए। जिले के धुर नक्सल प्रभावित गांव उसक्वाया से निकल कर ग्रामीण अफसरों के पास पहुंचे। कहा कि उन्हें अब गांव में सड़कें, बिजली, पानी, स्कूल और अस्पताल चाहिए। उनकी समस्याओं को जल्द दूर किया जाए। इसको लेकर एक ज्ञापन भी सौंपा।

दरअसल, प्रदेश के अंतिम छोर पर कोंटा का बंडा ग्राम पंचायत का गांव है उसक्वाया। यह पूरा गांव नक्सल प्रभावित है। कहते हैं, नक्सलियों के डर से इस गांव के लोग कभी बाहर ही नहीं निकले। हालात यह थे कि शहरी लोगों से कटे और डरे हुए रहते थे। अफसर क्या होते हैं, उन्हें भी नहीं देखा। हां, कलेक्टर का नाम जरूर सुना था। अब शनिवार को गांव के युवा, महिलाएं और बुजुर्ग अपनी मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर कोंटा पहुंच गए।

ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन।
ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन।

ग्रामीण तहसील ऑफिस पहुंचे। वहां SDM राजस्व बनसिंह नेताम और तहसीलदार से मिलना चाहते थे। हालांकि दोनों ही अफसर नहीं मिले। इस पर दफ्तर के क्लर्क को ही कलेक्टर के नाम अपना आवेदन दे आए। कहा कि उन्हें बिजली, सड़क, पानी, तालाब, स्कूल और अस्पताल सब चाहिए। तालाब उनके गांव में खोदा जाना है। सालों से इसका इंतजार है। पीने का पानी नहीं है। इसलिए गांव में टंकी बनाई जाए और उनकी समस्या का निराकरण हो।

कोंटा थाने में भी पुलिस से मिलने पहुंचे।
कोंटा थाने में भी पुलिस से मिलने पहुंचे।

इस प्रतिनिधि दल में शामिल एक युवक कहता है कि उसे गांव में उसे सड़क चाहिए। बिजली भी नहीं है। इसके चलते बहुत दिक्कत है। कभी किसी ने कहा नहीं, पर हम ऐसे कैसे रहें। गांव में स्कूल तो है, लेकिन टीचर नहीं आते। एक मैडम आती हैं, लेकिन वह भी आंगनवाड़ी केंद्र में चली जाती हैं। वहीं एक युवती कहती है कि गांव में अस्पताल चाहिए। बीमार होने पर बहुत समस्या होती है। इन सबके साथ पीने का पानी बहुत जरूरी है।

युवाओं ने रखी अपनी बात।
युवाओं ने रखी अपनी बात।

युवाओं ने बताया कि इस क्षेत्र में लंबे समय से नक्सलियों का आतंक है। उन्होंने सड़कें काट दिए, रास्ते बाधित किए, इसी के चलते गांव भी विकास से कट गया। लंबे समय से इस गांव के लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। ग्रामीण थाने भी पहुंचे, वहां भी समस्या बताई। कहा कि वे पूना नार्कोम अभियान से बहुत प्रभावित हैं। इसके तहत कोंटा पुलिस और आला अफसर के साथ प्रशासन उनकी मदद करे। जिससे वह बेहतर जीवन बच्चों को दे सकें।

क्या है पूना नार्कोम अभियान?
'पूना नर्कोम' अभियान,क्षेत्रीय बोली गोंडी का शब्द है, जिसका हिंदी अनुवाद 'नई सुबह' है। विश्व आदिवासी दिवस के मौके 9 अगस्त 2021 को सुकमा के SP सुनील शर्मा ने इस अभियान की शुरुआत की थी। अभियान का मुख्य उद्देश्य नक्सल इलाके में सुरक्षा और विकास जमाना है। युवाओं को रोजगार देने से लेकर नक्सलवाद के खात्मे तक पुलिस काम कर रही है। अभियान के तहत अब तक 2500 से ज्यादा युवाओं ने ट्रेनिंग लेने रजिस्ट्रेशन कराया है।