हौसले की उड़ान:एक्सीडेंट में एक पैर खोया, बॉडी बिल्डर बन जीत लाए मेडल

राजनांदगांव14 दिन पहले
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व्यायाम शाला में  प्रैक्टिस करते महेन्द्र यदु। - Dainik Bhaskar
व्यायाम शाला में प्रैक्टिस करते महेन्द्र यदु।

इच्छा शक्ति मजबूत हो, तो कुछ भी हासिल करना असंभव नही है। 9 साल की उम्र में सड़क हादसे में पैर गवां चुके दिव्यांग ने बॉडी बिल्डिंग को अपना शौक बनाया और 15 साल की कड़ी मेहनत के बाद मिस्टर छत्तीसगढ़ टूर्नामेंट में हिस्सा लेकर दिव्यांग वर्ग से मिस्टर छत्तीसगढ़ का खिताब अपने नाम कर लिया। आज भी दुध बेचकर डाइट का खर्च निकालते है। चौखड़िया पारा निवासी महेंद्र यदु पिता संत राम यदु बॉडी बिल्डिंग में दिव्यांग वर्ग से मिस्टर छत्तीसगढ़ चुने गए हैं।

यह राजनांदगांव शहर के लिए बड़े गर्व की बात है कि एक दिव्यांग ने शरीर सौष्ठव जैसे खेल में अपना दबदबा कायम किया। महेंद्र उर्फ लल्ला ने कई टूर्नामेंट में हिस्सा लिया है और पुरस्कार भी जीते हैं। लेकिन मिस्टर छत्तीसगढ़ बनने को एक बड़ी उपलब्धि मानते है। उन्होंने बताया कि 9 साल की उम्र में हाइवे पर सड़क हादसे के दौरान दाएं पैर में चोट लगी थी। कुछ दिनों में पैर में पॉइजन फैल गया और डॉक्टरों के कहने पर एक पैर कटवाना पड़ गया।

इससे थोड़ी निराशा हुई पर खुद को संभालने के लिए व्यायाम को अपना शौक बना लिया। इसमें परिवार के लोगों ने भी पूरा साथ दिया। भाई के साथ घूमने के बहाने व्यायाम शाला जाने लगे। जिम में घंटों तक बैठकर युवाओं को व्यायाम करता देख मन में बॉडी बिल्डिंग करने का ख्याल आया और यहीं से यह शौक बन गया है। मेरी कमजोरी को ताकत बनाने में जिम के संचालक तामेश्वर बंजारे समेत अन्य खिलाड़ियों ने भी प्रोत्साहित किया।

डाइट में ज्यादा खर्च होता है: महेंद्र ने बताया कि टूर्नामेंट की जब तैयारी होती है, तो सबसे ज्यादा डाइट पर ध्यान दिया जाता है, खर्च भी इसमें ही होता है। परिवार के दूध व्यवसाय से होने वाली आय से ही डाइट की व्यवस्था करते है। यहां बता दें कि मिस्टर छत्तीसगढ़ हर रोज दूध बेचने भी जाते हैं। परिवार को पैतृक व्यवसाय डेयरी का है।

जिम समिति के अवसर देने पर जीता सिल्वर मेडल
प्रोत्साहन के बाद बॉडी बिल्डिंग के लिए प्रैक्टिस शुरू की। एक पैर से दिव्यांग होने की वजह से शुरुआत में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था लेकिन संचालक समेत वहां आने वाले अन्य लोगों को भरपूर सहयोग मिलने की वजह से सबकुछ आसान लगने लगा। इसके बाद तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। यहां बता दिव्यांग को टूर्नामेंट में शामिल होने का पहला अवसर एक्सपर्ट जिम समिति ने दिया। यहां मिस्टर एक्सपर्ट टूर्नामेंट कराया गया, जिसमें महेंद्र ने बाजी मारी और उन्हें कांकेर में सिल्वर मेडल प्राप्त हुआ। ।

अब नेशनल खिताब अपने नाम करने की तैयारी
आंधप्रदेश में आयोजित हुए नेशनल टूर्नामेंट में शामिल हो, यहां अनुभव प्रमाण पत्र मिला। पहले दिव्यांग वर्ग से होने की वजह से पहले टूर्नामेंट में हिस्सा लेने में हिचक होती थी। लेकिन अब बिना किसी संकोच के टूर्नामेंट में शामिल हो रहे। हाल ही में दिव्यांग वर्ग से मिस्टर छत्तीसगढ़ चुने गए। अब नेशनल स्तर पर आयोजन होने वाले बड़े टूर्नामेंट की तैयारी कर रहे है। महेंद्र ने कहा कि युवाओं को चाहिए कि वे नशे से दूर रहकर स्पोर्टस में अपना पसीना बहाएं। यहां भी कॅरियर बनाने के कई अवसर है।

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