कार्रवाई पर राजनीतिक ब्रेक...:छापे के बाद पीछे हटी पुलिस, फूड एंड सेफ्टी ने सैंपल तक नहीं लिया

राजनांदगांव2 महीने पहले
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फैक्ट्री में मिले सामान को पुलिस ने फैक्ट्री में ही छोड़ रखा है। सील भी नहीं किए। - Dainik Bhaskar
फैक्ट्री में मिले सामान को पुलिस ने फैक्ट्री में ही छोड़ रखा है। सील भी नहीं किए।

अवैध रूप से चल रही गुटखा फैक्ट्री में छापेमारी के बाद पुलिस ने पल्ला झाड़ना शुरू कर दिया है। फैक्ट्री के संबंध में आगे की पूछताछ की बजाय पुलिस ने कार्रवाई की जिम्मेदारी फूड एंड सेफ्टी विभाग को दे दी है। वहीं फूड एंड सेफ्टी विभाग ने अब तक जब्त गुटखों की सैंपलिंग भी नहीं की है। सबसे गंभीर बात यह है कि फैक्ट्री से जब्त 82 लाख के सामान को फैक्ट्री में ही रखा गया है। इसे पुलिस ने अपनी कस्टडी तक में नहीं लिया है। वहीं अवैध फैक्ट्री को विधिवत सील तक नहीं किया जा सका है।

इससे स्पष्ट है कि बड़े अवैध कारोबार में लिप्त मुख्य लोगों को बचाने की कवायद शुरू हो गई है। फैक्ट्री से इतने बड़े पैमाने पर मिले सामानों के बाद भी मैनेजर की गिरफ्तारी नहीं की गई है। वहीं मैनेजर से सख्ती से पूछताछ तक नहीं हो सकी है। सीएसपी अमित पटेल ने बताया कि फैक्ट्री के मालिक की जानकारी जुटाने के लिए संबंधित क्षेत्र के पटवारी से नक्शा खसरा की जानकारी मांगी गई है।

हालांकि यह अब तक केवल मौखिक स्तर पर ही है। राजस्व विभाग से इस तरह का कोई भी पत्र व्यवहार नहीं किया गया है। अवैध गुटखे बनाने का पूरा खेल अब विभागीय पेंच में फंसाया जा रहा है। इसमें अफसरों की उदासीनता भी बड़ी वजह बनी हुई है। इसे लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।

अफसर नेमीचंद बोले- प्रोसेस जारी, सैंपलिंग नहीं की गई
फूड एंड सेफ्टी विभाग के अफसर नेमीचंद पटेल ने बताया कि पुलिस द्वारा जब्त गुटखों की सैंपलिंग अब तक नहीं की गई है। हालांकि उन्होंने दावा किया है कि विभागीय प्रक्रिया जारी है। लेकिन कार्रवाई के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी सैंपल नहीं लिया गया है। यह विभाग की कार्यशैली पर ही सवाल उठा रहा है। आमतौर पर छोटी मोटी कार्रवाई के दौरान विभाग के अफसर तत्काल सैंपल लेकर जांच के लिए लैब में भेजते हैं। लेकिन इतने बड़े पैमाने पर माल जब्त होने के बाद भी सैंपलिंग को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई है।

चार साल से शहर में नहीं हुई गुटखों की सैंपलिंग
नकली गुटखे बनाने और खपाने के कारोबार में अप्रत्यक्ष सहयोग संबंधित विभाग का भी बना हुआ है। शहर में गुटखों की क्वालिटी जांचने के लिए फूड एंड सेफ्टी विभाग ने अंतिम बार साल 2018 में सैंपल लिया था। इसके बाद से अब तक याने चार साल में किसी भी हिस्से में गुटखों की सैंपलिंग नहीं की गई है। इससे नकली गुटखा बनाकर बाजार में खपा रहे लोगों को बड़ी हिम्मत मिली हुई है। सोमनी इलाके में और भी फैक्ट्रियां मौजूद हैं, जहां गुटखा बनाने का काम चल रहा है। लेकिन विभाग ने यहां भी पहुंचकर कभी जांच नहीं की है। यह सीधे तौर पर विभागीय लापरवाही को स्पष्ट कर रहा है।

इसमें गिरफ्तारी नहीं बनती
आगे की कार्रवाई को लेकर सीएसपी अमित पटेल ने बताया कि जब्त माल को फैक्ट्री में ही पुलिस कस्टडी में रखवाया गया है। फैक्ट्री के मैनेजर ने पूछताछ में ज्यादा जानकारी नहीं दी है। इसकी वजह से मालिक के संबंध में पता नहीं चल पाया है। इस प्रकरण में गिरफ्तारी नहीं बनती, जिसकी वजह से मैनेजर को गिरफ्तार नहीं किया गया है। आगे की कार्रवाई अब फूड एंड सेफ्टी विभाग के माध्यम से होगी। विभाग ही पूरे प्रकरण को कोर्ट में पेश करेगा। इधर प्रशासन ने इसे पुलिसिया कार्रवाई का विषय कहा है।

सोमनी में स्थित है गोदाम

सोमनी इलाके में कई जगहों पर गुटखा बनाने का काम जारी है। लेकिन बड़े पैमाने पर हो रहे ऐसे कार्य में कभी भी विभागीय अफसरों ने जांच की गंभीरता नहीं दिखाई है। सोमनी से लगे ककरेल में भी गुटखे की फैक्ट्री संचालित हो रही है। वहीं सोमनी में एक बड़ा गोदाम भी मौजूद है। लेकिन इन जगहों की जांच सालों से नहीं हुई है। इधर शहर में धड़ल्ले से प्रतिबंधित गुटखा और नकली पान मसाला बिक रहा है। इस नेटवर्क से कई स्थानीय दुकानदार भी जुड़े हुए हैं। विभागीय अनदेखी पर सवाल उठ रहे हैं।

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