धार्मिक आयोजन:भगवत गीता से युवा पीढ़ी को मिलती है संस्कार की शिक्षा

राजनांदगांवएक महीने पहले
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गांधी चौक के रामायण प्रचार भवन में चल रही श्रीमद्भागवत के तीसरे दिन प्रवचनकर्ता आचार्य मोनू महाराज ने ध्रुव चरित्र, भरत चरित्र, प्रह्लाद चरित्र की कथा बताई। उन्होंने कहा कि जीवन का आधार आध्यात्म की छांव है। बिना आध्यात्म के जीवन को पूर्ण रूप से नही जिया जा सकता। आज हर समाज नवयुवकों को आगे बढ़ाना चाहता है, लेकिन इसके लिए सबसे पहले युवा पीढ़ी को संस्कारित बनाना जरूरी है और वह संस्कार भागवत कथा के माध्यम से जन जन तक पहुचती है।

नवयुवक देश के भविष्य निर्माण में अमूल्य सहयोग देंगे, इसलिए उन्हें अधिक से अधिक सत्संग और आध्यात्म की छांव में रहना चाहिए। आचार्य ने कहा कि भारत देश की संस्कृति और धर्म पर आज विश्व नतमस्तक हो रहा है, लेकिन हम भारतीय अपनी ही संस्कृति और सभ्यता को छोड़ कर पाश्चात्य सभ्यता को अपना रहे हैं, यह अनुचित है। हर परिवार अपने बच्चों की शिक्षा के साथ संस्कार भी दें।

भगवान की भक्ति करने के लिए कोई उम्र नहीं होती महाराज ने ध्रुव चरित्र की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान की प्राप्ति के लिए कभी उम्र का बंधन नहीं होता है। जिस उम्र में हो उसी उम्र में भगवान की भक्ति करना शुरू करें, क्योंकि जीवन का कोई भरोसा नहीं। मृत्यु मानव जीवन का अटल सत्य है, वह तो एक दिन आनी ही है, लेकिन उससे पहले अपने भव को सुधारने भक्ति भजन जरूर कर लें।

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