जनजाति समाज को हो रहा नुकसान:भोजराज नाग ने कहा असली आदिवासी अधिकारों से वंचित हो रहे

सुकमाएक महीने पहले
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देशभर में लगभग 705 जनजातियां हैं। जनजातियों के विकास व उन्नति के लिए संविधान निर्माताओं ने आरक्षण और अन्य सुविधाओं का प्रावधान किया है। धर्मांतरित लोग अनुसूचित जनजाति के साथ-साथ अल्पसंख्यक होने का दोहरा लाभ ले रहे हैं। जबकि असली अनुसूचित जनजाति वर्ग की बड़ी आबादी अपने अधिकारों से वंचित है। इससे जनजाति समाज को नुकसान हो रहा है।

जनजाति वर्ग के लोग जो धर्मांतरण के बाद अपनी संस्कृति, रीति रिवाज को मानना व देवी-देवताओं की पूूजा-पाठ करना छोड़ चुके हैं। ऐसे लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। उक्त बातें जनजाति सुरक्षा मंच के प्रांतीय संयोजक भोजराज नाग ने स्थानीय पीडब्लयूडी विश्राम गृह में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही।

उन्होंने बताया कि जनजाति समाज से धर्मांतरित होकर आरक्षण का लाभ लेने वालों के विरुद्ध आवाज बुलंद करने व असली जनजाति समाज को उनका अधिकार दिलाने के उद्देश्य से साल 2006 में प्रदेश की राजधानी रायपुर में जनजाति सुरक्षा मंच का गठन किया गया। इसमें 14 राज्यों 85 जनजाति प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इसके बाद से जनजाति सुरक्षा मंच लगातार इस दिशा में काम कर रही है।

धर्मांतरित व्यक्तियों को अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर करने की उनकी मांग को देशभर के 475 सांसदों का समर्थन प्राप्त होने व आगामी मानसून सत्र में विधेयक पेश किए जाने की बात कही। इस दौरान संभागीय संयोजक महेश कश्यप व जिला संयोजक सन्नू कोरसा मौजूद रहे।

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