सुकमा में सीएम:पहले संविधान को मानें नक्सली, उसके बाद जहां बुलाएंगे वहां बातचीत करूंगा: सीएम

सुकमा2 महीने पहले
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सर्किट हाउस में चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व अन्य। - Dainik Bhaskar
सर्किट हाउस में चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व अन्य।

भारत देश एक संघीय गणराज्य है। एक राज्य का मुख्यमंत्री हाेने नाते मैं एक संवैधानिक पद पर बैठा हूं। ऐसे में मैं उसी से बातचीत करुंगा जो भारत के संविधान को मानता व उस पर विश्वास रखता हो। अगर आप भारत के संविधान पर विश्वास नहीं रखते तो मैं आपसे बातचीत नहीं करुंगा।

नक्सली अगर भारत के संविधान को मानने व उस पर विश्वास होने की घोषणा करते हैं तो हम बातचीत को तैयार हैं, मैं सुकमा या वे जहां बुलाएंगे जाकर उनसे बातचीत करने को तैयार हूं। उक्त बातें सीएम भूपेश बघेल ने गुरुवार को स्थानीय सर्किट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता में पत्रकारों द्वारा नक्सलियों से शांति वार्ता को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा।

नक्सलियों द्वारा सशर्त शांति वार्ता के लिए सरकार को अनुकूल वातावरण बनाने को लेकर जारी बयान पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शांति वार्ता के लिए बस्तर में अनूकूल वातावरण पहले से ही बना हुआ है। अगर मूल में जाएं तो बात जल, जंगल व जमीन की थी। शासन की नरवा योजना से जल बचाने का काम हो रहा है। आदिवासियों को वनअधिकार पट्टा देकर उन्हें जमीन का मालिकाना हक देने और जंगलों के संरक्षण के साथ वहां बड़ी मात्रा में फलदार पौधे लगाने का काम भी हो रहा है।

सिलगेर गोलीकांड के बाद बीते एक साल से यहां सरकार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन पर सीएम ने कहा कि कुछ लोग अपनी पूछ परख बनी रहे और उनकी रोजी-रोटी चलती रहे इसलिए बेवजह आंदोलन को हवा देने में लगे हुए हैं। उनकी मंशा कभी भी सफल नहीं होगी। मैंने सिलगेर पीड़ितों से सीधे मुलाकात की। समाज प्रमुखों व एनजीआे के जिम्मेदारों से भी बातचीत की। उनकी मांगों को सुनने के लिए बस्तर सांसद के नेतृत्व में टीम भी सिलगेर भी गई। इस दौरान उद्योग व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, बस्तर सांसद दीपक बैज व मुख्य सचिव अमिताभ जैन उपस्थित रहे।

गलत समय पर आंदोलन कर रहे मनरेगाकर्मी
नियमितिकरण समेत दो सूत्रीय मांग को लेकर पिछले लगभग डेढ़ महीने से जारी मनरेगा कर्मियों की हड़ताल से मजदूरी भुगतान में देरी पर सीएम ने कहा कि मनरेगा कर्मी अपनी मांगों को लेकर गलत समय पर आंदोलन कर रहे हैं। मनरेगा कर्मियों से मुलाकात के बाद सरकार ने उनका मानदेय भी बढ़ा दिया है। बावजूद वे हड़ताल पर बैठे हुए हैं। उन्हें काम पर लौट जाना चाहिए।

पहले नेताओं के पास 50 राशन कार्ड होते थे
मुख्यमंत्री ने कहा जिले के अंदरुनी इलाकों में शिविर लगाकर वास्तविक हितग्राहियों के राशन व आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं। पिछली सरकार में भाजपा के नेताओं के पास ही 50-50 राशन कार्ड हुआ करते थे। हमने राशन कार्ड को आधार से लिंक कर वास्तविक हितग्राहियों को राशन देने का काम किया। प्रदेश के 98 फीसदी राशन कार्ड आधार से लिंक हो गए हैं।

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