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ओपीडी बंद हड़ताल:सुरक्षा संबंधी केंद्रीय कानून बनाने की मांग, डाॅक्टरों ने बंद रखीं 5 घंटे ओपी़डी, पीएम के नाम ज्ञापन सौंपा

फरीदाबादएक महीने पहले
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डाक्टरों ने 2 बजे के बाद ही मरीजों को देखा - Dainik Bhaskar
डाक्टरों ने 2 बजे के बाद ही मरीजों को देखा

डॉक्टरों ने अपनी सुरक्षा के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग को लेकर शुक्रवार को सुबह 9 से दोपहर 2 बजे तक ओपीडी बंद रखीं। यह बंद नेशनल और स्टेट आईएमए के आह्वान पर था। ओपीडी बंद रहने से मरीजों को दिक्कत हुई। डाक्टरों ने 2 बजे के बाद ही मरीजों को देखा। इस दौरान आईएमए की प्रधान डा. पुनीता हसीजा, मीडिया प्रभारी डा. सुरेश अरोड़ा, डा. अजय कपूर, डा. शिप्रा गुप्ता, डा. संजय टुटेजा, डा. वंदना उप्पल, डा. हेमंत अत्री, डा. सुनील कश्यप ने एक ज्ञापन डीसी यशपाल यादव को प्रधानमंत्री के नाम सौंपा।

जिलाध्यक्ष डा. पुनीता हसीजा और मीडिया प्रभारी डा. सुरेश अरोड़ा ने ज्ञापन में कहा है कि कई वर्षों से देखा जा रहा है कि डॉक्टरों के ऊपर हिंसा की वारदातें होती रहती हैं ,मगर इसके खिलाफ कोई भी एक्शन नहीं लिया जाता।

आईएमए चाहती है कि एक केंद्रीय कानून बनाया जानाए। इसके तहत देश के सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में अगर किसी भी प्रकार से डॉक्टर के खिलाफ, नर्सिंग होम या हॉस्पिटल में कोई हिंसा होती है तो तुरंत हिंसा करने वालों के खिलाफ केस दर्ज होना चाहिए और यह केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाना चाहिए।

अस्पतालों को एक सुरक्षित स्थान घोषित किया जाए। साथ ही सुरक्षा के मानक भी घोषित किए जाए। डॉ. अरोड़ा ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान कुछ डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं हुईं तो केंद्र सरकार ने एपिडेमिक एक्ट के अंदर कुछ बदलाव कर एक कानून बनाया। इसमें हिंसा करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

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