संजय नगर कॉलोनी में तोड़फोड़ का मामला:इन साइड स्टोरी: भू-माफिया रेलवे की जमीन बेचकर खाते रहे, अधिकारी सोते रहे, एक से चार लाख तक में बेची थी जमीन

फरीदाबाद9 महीने पहले
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50 साल से चल रहा था जमीन बेचने का धंधा। - Dainik Bhaskar
50 साल से चल रहा था जमीन बेचने का धंधा।

अरावली के वादियों में सरकारी जमीन पर बसाई गई खोरी कॉलोनी की तर्ज पर ही न्यूटाउन रेलवे स्टेशन के पास 16 हजार स्क्वायर मीटर रेलवे की जमीन भूमाफिया बेचकर कॉलोनी बसाते रहे और रेलवे अधिकारी सोते रहे। भूमाफियाओं ने यूपी, बिहार व राजस्थान के गरीब मजदूरों को एक लाख से चार लाख रुपए प्लाट की दर से जमीन बेच 720 मकानों की पूरी कॉलोनी बसा दी।

नगर निगम और बिजली विभाग ने यहां कनेक्शन देकर सीवर लाइन और गली तक बना दी। लेकिन रेलवे अधिकारियों ने भी इस ओर देखने का प्रयास नहीं किया। जानकर हैरानी होगी कि पचास साल पहले कॉलोनी बसनी शुरू हुई और रेलवे अधिकारी अपना समय काटकर जाते रहे। अधिकारियों को अब अपनी जमीन पर कब्जे की याद आयी। इसके बाद तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कराई। सोमवार को दूसरे चरण में अभियान चलाकर करीब 240 मकान तोड़ दिए गए।

80 से 90 करोड़ कीमत की है जमीन

बता दें कि न्यूटाउन रेलवे स्टेशन के पास में ही झलानी कंपनी की जमीन है। ये जमीन अभी खाली पड़ी है। कंपनी ने अपनी दीवार बना रखी है। इस दीवार के बाद ही रेलवे की जमीन है। रेल अधिकारियों की मानें तो रेलवे की जिस 16000 स्क्वायर मीटर जमीन पर संजय नगर कॉलोनी में बसी थी आज उसकी कीमत 80 से 90 करोड़ की है। न्यूटाउन एरिया का प्राइम लोकेशन माना जाता है।

संजय नगर कॉलोनी में चार घंटे में ताड़ दिए गए 240 मकान
संजय नगर कॉलोनी में चार घंटे में ताड़ दिए गए 240 मकान

सन् 1971 से बसनी शुरू हुई थी कॉलोनी

स्थानीयवासी पुष्पा, तारा, कैलाशी, माया देवी, सावित्री आदि ने बताया कि दिनेश और उसके साथी भूमाफियाओं ने इस जमीन को अपनी बताकर गरीबों को एक लाख से चार लाख प्रति प्लाट की दर से बेचे थे। उक्त लोगों ने बताया कि कॉलोनी वर्ष 1971-72 से बसनी शुरू हुई थी। यहां लोगों की दूसरी-तीसरी पीढ़ी रह रही थी। नगर निगम ने सीवरलाइन और पक्की गलियां तक बनाई थी। 20 से 60 वर्ग गज तक के मकान बने थे। उन्होंने सवाल किया कि जब भूमाफिया रेलवे की जमीन बेच रहे थे और कॉलोनी बस रही थी तब अधिकारी कहां सो रहे थे। इसका जवाब रेलवे अधिकारियों के पास नहीं है।

घर से साामान निकालने के दौरान घायल हुई महिला को ले जाती आरपीएफ महिलाकर्मी व स्थानीयवासी
घर से साामान निकालने के दौरान घायल हुई महिला को ले जाती आरपीएफ महिलाकर्मी व स्थानीयवासी

चार घंटे में तोड़ दिए 240 मकान

सोमवार को इस केस की सुनवाई पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में शुरू हुई। रेल अधिकारियांे ने बताया कि सुबह 10.30 बजे हाईकोर्ट ने राहत देने से इंकार कर दिया। इसके बाद आरपीएफ, जीआरपी व 250 सिविल पुलिस की मौजूदगी में 11 बजे से पांच जेसीबी मशीन लगाकर बाकी बचे 240 मकानों को तोड़ दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक करीब 6000 स्क्वायर मीटर जमीन खाली कराई गई। जिसकी कीमत करीब 30 करोड़ आंकी जा रही है। इसके पहले 29 सितंबर को अभियान चलाकर 480 मकान तोड़े गए थे। उस दिन एक हजार स्क्वायर मीटर जमीन खाली कराई गयी थी।

रिपोर्ट: भोला पांडेय

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