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चक्काजाम:किसानों ने नेशनल हाईवे को किया जाम, ट्रैफिक करना पड़ा डायवर्ट

फरीदाबाद19 दिन पहले
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नेशनल हाईवे-19 पर चक्का जाम में उमड़ी किसानों की भीड़। - Dainik Bhaskar
नेशनल हाईवे-19 पर चक्का जाम में उमड़ी किसानों की भीड़।
  • उपद्रव की आशंका को देखते हुए पुलिस रही मुस्तैद
  • कुछ किसानों ने इस आंदोलन को बताया राजनीति से प्रेरित, इसलिए आंदोलन से हो गए थे अलग

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत शनिवार को पलवल में किसानों ने दोपहर 12 बजे नेशनल हाइवे 19 पर जाम लगा दिया। इससे वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई। पुलिस ने जाम को देखते हुए आगरा और मथुरा से आने वाले ट्रैफिक को होडल, हथीन और पलवल के रास्ते फरीदाबाद की ओर निकाला। जबकि फरीदाबाद से मथुरा आगरा जाने वाले ट्रैफिक को पलवल से हथीन और होडल के रास्ते निकाला गया।

किसी उपद्रव की आशंका को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। उधर फरीदाबाद में सभी प्रमुख मार्गों और हाइवे पर भारी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे। किसान आंदोलन के चलते केजीपी के एमपी चौक क्षेत्र नेशनल हाईवे नंबर 19 पर किसानों ने पूर्व घोषणा के अनुसार शनिवार को दोपहर 12 बजे से धरना शुरू कर दिया। इसके चलते नेशनल हाईवे नंबर-19 पूरी तरह बंद हो गया।

किसानों का कहना है यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो इससे भी कठोर चेतावनी के साथ मैदान में उतरा जाएगा। उधर पुलिस ने सात स्थानों पर नाका लगाकर ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया था। वाहनों को जाम से बचाने के लिए सोफ्ता मोड़, दुधौला चौक, आगरा चौक, असावटा मोड़, किठवाड़ी चौक, अंटोहा मोड़ और होडल के रास्ते मथुरा आगरा की ओर आने जाने वाले वाहनों को निकाला जा रहा था। इससे कई स्थानों पर जाम की स्थिति रही।

घूंघट की आड़ में विरोध का जोश
पलवल के जाम स्थल पर विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में महिलाएं भी पहुंची थीं। घूंघट की आड़ में हाथों में तिरंगा लिए कृषि कानूनों के खिलाफ नारेबाजी कर रही थीं। महिलाओं का कहना था कि वे अपने परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस आंदोलन को गति देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगी। महिलाएं किसान एकता जिंदाबाद के नारे लगाते हुए अपनी आवाज बुलंद कर रही थीं।

जाम लगाकर बैठे किसानों नइमरजेंसी सेवाओं को नहीं रोका

जाम लगाकर बैठे किसानों ने इमरजेंसी सेवाओं एंबुलेंस, स्कूल बस, फॉयर बिग्रेड आदि की गाड़ियों को नहीं रोका। किसान मोर्चा ने चक्का जाम के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपनी युवाओं की टीम को निगरानी में लगा रखा था। जिससे कोई शरारत न कर सके।

किसान आंदोलन व चक्का जाम का नेतृत्व कर रहे 52 पालों के प्रधान अरुण जेलदार, किसान नेता रतन सिंह सौरोत, मास्टर महेंद्र चौहान, ज्ञान सिंह चौहान, सोहनपाल चौहान, शशिबाला तेवतिया आदि ने कहा कि उनका विरोध कृषि कानूनों को लेकर है। जब तक सरकार इसे वापस नहीं लेती आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन का समर्थन करने पूर्व मंत्री करण दलाल, पूर्व विधायक उदयभान, रघुवीर तेवतिया भी पहुंचे थे।

आंदोलन दिशाहीन बताकर अलग हो गए
फरीदाबाद के किसानों की बात करें तो यहां के अधिकांश किसानों ने आंदोलन से दूरी बना रखी थी। उनका कहना था कि यह आंदोलन अब दिशीहीन हो गया है। हरियाणा किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष डीके शर्मा एवं किसान संघर्ष समिति ईस्टर्न पैरिफेरल एक्सप्रेस के अध्यक्ष राजेश भाटी ने कहा कि आंदोलन दिशीहीन हो गया है। लोगों ने इसे वोट बैंक का जरिया बना लिया।

इसलिए हमारा संगठन इस आंदोलन से अलग हो गया है। दोनों किसान नेताओं ने ये भी कहा कि आंदोलन के अगुआकर्ता बने राकेश टिकैत को कानून रद्द करने की जिद छोड़ संशोधन कराने पर जोर देना चाहिए। किसानों ने कहा कि वह राकेश टिकैत को पत्र लिख अपनी जिद छोड़ने और किसानों के हितों की बात सरकार से करने की अपील भी करेंगे।

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