पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Delhi ncr
  • Faridabad
  • IPA Creates "Draft Of Unedit Private School Security And Service To Employees Bill 2021, Suggestions Sought From Academics, Final Draft Will Go To P.M.

टीचरों को शोषण से बचाने के लिए:आइपा ने बनाया "अनएडिट प्राइवेट स्कूल सिक्योरिटी और सर्विस टू एंप्लाइज बिल 2021 का ड्राफ्ट, शिक्षाविदों से मांगे सुझाव, फाइनल ड्राफ्ट पीएम के पास जाएगा

फरीदाबाद3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
इस समय प्राइवेट स्कूलों में का - Dainik Bhaskar
इस समय प्राइवेट स्कूलों में का

ऑल इंडिया पैरेंट्स एसोसिएशन (आइपा) ने टीचरों को निजी स्कूलों के शोषण से बचाने के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग की है। आइपा ने इस संबंध में "अनएडिट प्राइवेट स्कूल सिक्योरिटी और सर्विस टू एंप्लाइज बिल 2021 का ड्राफ्ट तैयार कर शिक्षाविदों से सुझाव मांगे हैं। इसके बाद फाइनल ड्राफ्ट पीएम के पास भेजा जाएगा।

आइपा ने इसलिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग की
आइपा ने कहा कि पूरे देश में गैर अनुदान व मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों में कार्यरत टीचर्स व कर्मचारियों के कल्याण व उनकी सर्विस सिक्योरिटी के लिए एक केंद्रीय कानून बनाया जाए। आइपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ एडवोकेट अशोक अग्रवाल ने इस कानून के संबंध में "अनएडिट प्राइवेट स्कूल सिक्योरिटी ऑफ सर्विस टू इंप्लाइज बिल 2021" नाम से एक ड्राफ्ट बनाया है। इसे शुक्रवार को आम जनता के लिए जारी करते हुए उस पर शिक्षाविदों, समाजसेवियों, कानूनविदों से 25 अप्रैल तक महत्वपूर्ण सुझाव मांगे हैं। आइपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश शर्मा ने कहा कि मिलने वाले सुझाव व विचारों को ड्राफ्ट में शामिल कर एक फाइनल ड्राफ्ट प्रधानमंत्री को उचित कार्रवाई करने के अनुरोध के साथ भेजा जाएगा। ड्राफ्ट की प्रति सभी संसद सदस्यों को भेजकर उनसे लोकसभा व राज्यसभा में ड्राफ्ट पर चर्चा कराने व उसमें लिखी बातों पर केंद्रीय कानून बनवाने में मदद करने की गुहार लगाई जाएगी।

टीचर व स्टाफ से प्राइवेट स्कूल कर रहे मनमानी​​​​​
आइपा के पदाधिकारियों ने कहा कि इस समय प्राइवेट स्कूलों में कार्यरत टीचर्स व कर्मचारियों के कल्याण व उनकी नौकरी की सुरक्षा के लिए कोई भी वैधानिक कानून नहीं है। इससे प्राइवेट स्कूल संचालक अपने टीचर्स व कर्मचारियों का आर्थिक, मानसिक व शारीरिक शोषण कर रहे हैं। अपनी बनाई गई शर्तों पर उन्हें नौकरी पर रखते हैं। स्थायी वेतनमान न देकर अपनी मर्जी से वेतन देते हैं। बिना किसी उचित कारण के नौकरी से निकाल देते हैं। तनख्वाह कम देते हैं और हस्ताक्षर ज्यादा पर कराते हैं।

केंद्रीय कानून में इन बातों को शामिल किया जाए
इन सब बातों को रोकने के लिए केंद्रीय कानून का बनना बहुत जरूरी है। इस कानून में किन बातों को शामिल किया जाए इसके लिए आइपा ने यह ड्राफ्ट बनाया है। एडवोकेट अशोक अग्रवाल ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने 2002 में केन्द्र सरकार से कहा था कि प्राइवेट कॉलेजों व स्कूलों में कार्यरत अध्यापकों व कर्मचारियों के कल्याण व उनकी समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र व प्रत्येक राज्य में एक ट्रिब्यूनल बनाया जाए। इसे व्यापक अधिकार मिलें। जांच के बाद यह साबित हो जाए कि प्राइवेट स्कूल संचालकों ने अपने अध्यापक व कर्मचारियों के साथ ज्याजती व अन्याय किया है तो उस स्कूल के खिलाफ वह कठोर कार्रवाई कर सके। उच्चतम न्यायालय के इस निर्देश को ध्यान में रखकर ही यह ड्राफ्ट बनाया गया है। अशोक अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री को ड्राफ्ट भेजने के बाद अगर उस पर केंद्र सरकार ने कोई उचित कार्रवाई नहीं की तो फिर उच्चतम न्यायालय का सहारा लिया जाएगा।