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हौसला अफजाई:खिलाड़ियों की सफलता की भूख ही उन्हें चैम्पियन बनाती है, इसलिए आंखों में स्वप्न व पेट में भूख की आग जरूर पालें

फरीदाबाद3 महीने पहले
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फरीदाबाद. मानव रचना यूनिवर्सिटी में नेशनल टीम के खिलाड़ियों को किट प्रदान करते फेडरेशन के पदाधिकारी। - Dainik Bhaskar
फरीदाबाद. मानव रचना यूनिवर्सिटी में नेशनल टीम के खिलाड़ियों को किट प्रदान करते फेडरेशन के पदाधिकारी।
  • कैंप में खेल विशेषज्ञों ने खो-खो की नेशनल टीम की हौसला अफजाई कर बोले

मानव रचना यूनिवर्सिटी परिसर में चल रहे खो-खो के नेशनल कैंप में खेल विशेषज्ञों ने खिलाड़ियों की हौसला अफजाई करते हुए उन्हें खेल से संबंधित टिप्स दिए। खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए खो-खो फेडरेशन आफ इंडिया के अध्यक्ष सुधांशु मित्तल ने कहा कि खिलाड़ी की सफलता की भूख ही उसे चैंपियन बनाती है।

सफलता की ये भूख हर खिलाड़ी में होनी चाहिए। इसलिए खिलाड़ी को अपने आंखों में सपने और पेट में भूख की आग जरूरी पालनी चाहिए। इस मौके पर मानव रचना यूनिवर्सिटी के वाइस प्रेसीडेंट डॉ. अमित भल्ला, अंतर्राष्ट्रीय खेल विशेषज्ञ डॉ. ललित भनोट, एमएस त्यागी, संतोष, प्रो वाइस चांसलर जीएल खन्ना, रूबीना मित्तल आदि ने खिलाड़ियों को किट प्रदान कर उनकी सफलता की कामना की।

इस समय मानव रचना यूनिवर्सिटी में 19 जनवरी से 16 फरवरी तक खो खो नेशनल टीम का कैंप चल रहा है। इस टीम में देश के सभी राज्यों के खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। इनमें 53 पुरुष और 20 लड़कियां हैं। नेशनल कैंप में हिस्सा लेने वाले इन सभी खिलाड़ियों को वैज्ञानिक तरीके से रोज नौ से एक बजे तक ट्रेनिंग दी जाती है।

शनिवार को परिचय सत्र के दौरान सभी नेशनल टीम के खिलाड़ियों को किट प्रदान की गई। मानव रचना यूनिवर्सिटी के वाइस चेयरमैन डॉ. अमित भल्ला एवं अंतरराष्ट्रीय खेल विशेषज्ञ डॉ. ललित भनोट ने कहा कि अब हमारे देश में भी वैज्ञानिक तरीके से खो-खो खिलाड़ियों को तैयार करने की ओर कदम बढ़ाए गए हैं। आने वाले दिनों में यह खेल भी अन्य खेलों की तरह अंतर्राष्ट्रीय स्तर का खेल बनेगा। ओवर प्रैक्टिस हमेशा नुकसानदेह होती है। उन्होंने कहा जब हम वैज्ञानिक तरीके से खिलाड़ियों की प्रतिभा निखारेंगे तभी वे देश के लिए पदक लाने में कामयाब होंगे।

फेडरेशन के अध्यक्ष सुधांशु मित्तल ने कहा कि प्रत्येक खेल के खिलाड़ी के लिए दो बातें सबसे अधिक जरूरी होती हैं। पहली उसकी आंखों में एक सपना हो। दूसरा पेट के लिए भूख की आग। यही दो बातें किसी खिलाड़ी को चैंपियन बनाती हैं। उन्होंने कहा कि खो-खो पहले जमीन की मिट्‌टी से जुड़ा खेल माना जाता था लेकिन अब इसमें तेजी से बदलाव आया है। दुनियाभर के कई देश जैसे ईरान, कजाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका आदि में यह खेल खेला जा रहा है।

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