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लोकगीत संग्रह का किया विमोचन:साहित्यकार व फिल्म विशेषज्ञ बोले, हर साहित्य समाज को कोई न कोई सीख जरूर देता है

फरीदाबाद9 दिन पहले
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लोक साहित्य के मर्मज्ञ साहित्यकार डाॅ हरिसिंह पाल व प्रसिद्ध लेखक एवं फिल्म विशेषज्ञ डाॅ राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि हर प्रकार का साहित्य समाज को कोई न कोई सीख जरूरत देता है। जरूरत है समाज को उसे ग्रहण करने की। साहित्य समाज को समृद्ध बनाने और सभ्य समाज बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। दोनेां लेखक यहां मैगपाई होटल में कमलेश सिंघल के लोकगीत-संग्रह- लोकगीत-मंजरी का लोकार्पण करने के बाद अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।

साहित्यकारों ने अपने वक्तव्य में प्रसिद्ध लोकगीत-संग्राहक देवेंद्र सत्यार्थी का उल्लेख करते हुए जीवन में लोकगीतों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। डाॅ राजीव श्रीवास्तव ने भी लोकगीतों के महत्व को स्वीकार करते हुए कहा कि इन गीतों का फिल्मांकन कर इन्हें और भी उपयोगी तथा सार्थक बनाया जा सकता है। इसी अवसर पर किशोर कुमार कौशल के दोहा-संग्रह मानवता का द्वार पर डाॅ राजीव ने बहुत ही अनूठे व सहज अंदाज़ में कुछ चुनिंदा दोहे उद्धृत करते हुए दोहावली की समीक्षा प्रस्तुत कर सबको प्रभावित किया। इस मौके पर प्रसिद्ध विद्वान डाॅ. टीडी दिनकर, कमलेश सिंघल के पति प्रेम सिंघल, किशोर कौशल, मनफूल सिंह, प्रसिद्ध कवि नवाब केसर आदि मौजूद रहे।

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