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तोड़फोड़ मामला::सुप्रीम कोर्ट में किसी को नहीं मिली राहत, सरकार ने एक हफ्ते का और समय मांगा, जमाई कॉलोनी में भी चलेगा बुल्डोजर

फरीदाबाद20 दिन पहले
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर खोरी कॉलोनी में हुई तोड़फोड़ के बाद अरावली वन क्षेत्र में बने सभी अवैध निर्माण तोड़ने को लेकर कोई राहत नहीं मिल पायी है। सरकार ने एक सप्ताह का समय और मांग लिया है। वहीं दूसरी ओर जमाई कॉलोनी में तोड़फोड़ की तलवार लटक रही है।

माना जा रहा है कि जिन लोगों ने हाईकोर्ट में मल्कियत को लेकर याचिका दायर की थी और जिन्हें स्टे मिला हुआ है उनके मकानों को छोड़कर अन्य सभी पर मकान तोड़े जाएंगे। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की। वन विभाग के अधिकारी का भी यही कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी को स्टे नहीं दिया है। तोड़फोड़ की कार्रवाई जारी रहेगी। उधर जमाई कॉलोनी के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले कांग्रेसी नेता विजय प्रताप का कहना है कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भी जमाई कॉलोनी में बड़खल के लाेगों की मल्कियत मानी है। यहां निगम की कोई मल्कियत ही नहीं है। ऐसे में जब तक हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है तो निगम तोड़फोड़ नहीं कर सकता। फिर भी यदि तोड़फोड़ करता है तो उसके खिलाफ अवमानना याचिका दायर की जाएगी।

विस्थापित लोगों को आवास का आवंटन करें

सोमवार को अरावली वन क्षेत्र मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खोरी कॉलोनी में जिन लोगों को उजाड़ा गया है और जिन पात्र लोगों ने पुनर्वास के लिए आवेदन िकया है उन्हें एक सप्ताह के अंदर प्रोविजनल आवंटन करना सुनिश्चित करें। कोर्ट ने सरकार को सुझाव दिया है कि वह आठ सप्ताह का इंतजार न करें। कोर्ट ने साफ किया है कि पुनर्वास सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलेगा जो सरकार की पाॅलिसी के अनुसार पात्र होंगे। केस की अगली सुनवाई अब 13 सितंबर को होगी।

आदेश की पालना नहीं करा पा रहा वन विभाग

अरावली वन क्षेत्र में बने अवैध निर्माण मामले को लेकर न तो सरकार अपना रूख साफ कर पायी है और न ही वन विभाग और नगर निगम सुप्रीम काेर्ट के आदेश की पालना करा पाया है। जबकि खोरी कॉलोनी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को सुनवाई करते साफ शब्दों में कहा था कि चार हफ्ते के अंदर अरावली वन क्षेत्र से अवैध निर्माण को हटा दिया जाए। लेकिन वन विभाग और नगर निगम अभी तक दस फार्म हाउस और गुरुकुल में डेरा के पास बसी महालक्ष्मी कॉलोनी में तोड़फोड़ कर चुप्पी साध ली।

मिल रही है तारीख पर तारीख

वन विभाग ने खुद माना है कि अरावली वन क्षेत्र पांच हजार हेक्टेयर के करीब है। जिसमें से 500 हेक्टेयर जमीन पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है। इनमें अवैध फार्म हाउस, बैंकेट हॉल, गौशाला, आश्रम, शैक्षणिक संस्थान बनाए गए हैं। चंूंकि ये सभी अवैध निर्माण शर्माएदारों के हैं। ऐसे में सरकार इन्हें हरसंभव बचाने के प्रयास में लगी है। इस केस में पहले सुनवाई 20 अगस्त को हुई थी। उसमें सरकार ने समय मांग लिया था। इसके बाद 23 अगस्त् को सुनवाई हुई जिसमें फिर से सरकार ने दो हफ्ते का समय मांग लिया। इसके बाद 6 सितंबर सुनवाई हुई तो फिर एक सप्ताह का समय मांग लिया।

अधिकारी बोले, की जाएगी तोड़फोड़

जिला वन अधिकारी राजकुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी अवैध निर्माण पर कोई स्टे नहीं दिया है। ऐसे में अरावली वन क्षेत्र में बने सभी प्रकार के अवैध निर्माण तोड़े जाएंगे। जमाई कॉलोनी के मामले में अभी निगम कमिश्नर के साथ बैठक नहीं हो पायी है। कोर्ट का आर्डर भी अभी नहीं मिला है। ऐसे में कोर्ट के आदेश का अध्ययन करने के बाद कार्रवाई की जाएगी। उधर निगम सूत्रों का कहना है कि कोर्ट में कुल 33 लोगों की सूची सौंपी गयी है जिनको हाईकोर्ट से स्टे मिला है। उनका मिलान करके बाकी सभी निर्माण तोड़े जाएंगे।

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