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कुछ अलग:जमालपुर के किसान ने गाय के गोबर से पेंट व डिस्टेंपर बनाया

गुड़गांव15 दिन पहले
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  • पटौदी के गांव में गाय के गोबर से बने प्राकृतिक पेंट की बढ़ रही डिमांड, मिल रहे ऑर्डर

हम अभी तक गोबर्धन को एक त्योहार के रूप में मनाते आ रहे हैं, लेकिन अब बदलते समय में सच में ही गोबर से धन कमाने का मौका आ गया है। गाय के गोबर से अब गंधहीन पेंट व डिस्टेंपर बनने लगा है। हरियाणा में पहली बार पटौदी के गांव जमालपुर निवासी विनोद कुमार ने गाय के गोबर से पेंट बनाना शुरू कर दिया है। यही नहीं वे करीब 170 किलो पेंट आसपास के लोगों को बेच चुके हैं।

साथ ही उन्होंने अपने घर को भी इसी पेंट से चमकाया है। ऐसे में गाय के गोबर से बनने वाले पेंट की चर्चा आम हो गई है। यही नहीं विनोद का कहना है मंदिरों में पेंट करने के लिए उसके प्राकृतिक पेंट की खास डिमांड रहती है। भारतीय परंपरा में किसी भी पर्व-त्यौहार में या अन्य विशेष मौकों पर मिट्टी के कच्चे घरों को गोबर से लीपने की परंपरा रही है, लेकिन अब पक्के मकानों में यह परंपरा पेंट कराने के तौर पर बदल गई है।

ऐसे में अब लोग इस पेंट को पुरानी परंपरा और बदलाव का मिश्रण भी कह रहे हैं। गोबर से पेंट बनाने की ट्रेनिंग विनोद कुमार ने जयपुर में ली थी। जहां केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा ट्रेनिंग शुरू की थी। हालांकि इससे पहले गत 12 जनवरी 2021 को खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग की ओर से गोबर से तैयार होने वाले पेंट को लॉन्च किया था।

ऐसे बनाते हैं गाय के गोबर से पेंट

विनोद कुमार ने बताया कि पहले हम गाय का गोबर लेते हैं। इसके लिए गोबर की मात्रा कम ही चाहिए। बराबर मात्रा में पानी मिलाकर इसकी रिफाईनिंग करते हैं। गोबर में 70 प्रतिशत नमी होनी चाहिए। इसके लिए हम बायोगैस प्लांट की खाद भी ले सकते हैं। फिर इस घोल को 80 डिग्री सेल्सियस पर गर्म करते हैं। इसके बाद उकसे ब्लीचिंग करते हैं।

करीब छह घंटे के लिए उसको छोड़ देते हैं। कपड़े से छानने के बाद जो तरल पदार्थ बचता है उसे कार्बोक्सी मिथाईल सल्युलोज कहते है। जो पेंट का मुख्य तत्व होता है। इसके बाद इसमें प्राकृतिक पदार्थ जैसे ग्वारगम, चूना, बाईंडर आदि मात्रा में डालते हैं। फिर इसे मधानी से मिलाते और ठंडा होने के बाद पेंट तैयार हो जाता है।

कहां और कैसे ले सकते हैं प्रशिक्षण
राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) की यूनिट कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट ने इस तरह के अनोखे पेंट को तैयार करने में सफलता हासिल की थी। जयपुर स्थित इस यूनिट ने इसके लिए एक फैक्ट्री सह प्रशिक्षण केंद्र भी बनाया है, यहां लोगों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विनोद कुमार ने बताया कि उन्होंने इसी प्रशिक्षण केन्द्र से ट्रेनिंग ली थी।

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