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प्राइवेट एम्बुलेंस संचालक पूरी तरह बेलगाम:रेट तय किए जाने के दूसरे दिन प्राइवेट एम्बुलेंस चालकों ने सड़कों पर नहीं उतारी गाड़ियां

गुड़गांवएक दिन पहले
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डेडबॉडी अस्पतालों से शमशान तक ले जाने के लिए भी प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना पड़ा। - Dainik Bhaskar
डेडबॉडी अस्पतालों से शमशान तक ले जाने के लिए भी प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना पड़ा।

गुड़गांव में कोरोना महामारी के दौरान प्राइवेट एम्बुलेंस संचालक पूरी तरह बेलगाम हो गए हैं। गत सोमवार को जहां प्रदेश सरकार ने प्राइवेट एम्बुलेंस के रेट तय दिए और तय रेट से अधिक वसूल करने पर आरसी व लाइसेंस रद्द करने व गाड़ियां जब्त करने का नियम बना दिया तो मंगलवार को प्राइवेट एम्बुलेंस ऑपरेटर ने अपनी गाड़ियां नहीं चलाई। इसे वे हड़ताल नहीं कह रहे हैं, बल्कि उनका कहना है कि सरकार अधिक रेट वसूलने पर गाड़ियां जब्त करने की बात कह रही है, तो हम गाड़ियां चलाएंगे ही नहीं।

उन्हें अपनी गाड़ियां जब्त नहीं करवानी है। लेकिन जो रेट सरकार ने तय किए हैं, उसमें उनका खर्च तक नहीं निकलता। राष्ट्रीय एम्बुलेंस संचालक एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव सुरेन्द्र तंवर ने कहा कि बीएलएस में 12 रुपए प्रति किलोमीटर हमारा डीजल का खर्च आता है, जबकि 7 रुपए रेट तय किया गया है। जबकि एएलएस एम्बुलेंस को चलाने का खर्च करीब इससे दोगुना होता है।

आरटीए हरेन्द्र पर आरोप लगाते हुए सुरेन्द्र तंवर ने बताया कि वह एम्बुलेंस संचालकों को सीधे धमकी दे रहे हैं। ऐसे में वे गाड़ियों को सड़कों पर कैसे चलाएं। सरकार के रेट तय करने में तुगलकी फरमान हैं, उनके खर्च को देखते हुए रेट तय करने चाहिए थे। प्राइवेट एम्बुलेंस नहीं चलने से गुड़गांव में मरीज व तिमारदारों को काफी परेशानी हुई। कई मरीजों को अपनी निजी वाहनों से मरीजों को रेफर कराकर दूसरे अस्पतालों तक ले जाना पड़ा। वहीं डेडबॉडी अस्पतालों से शमशान तक ले जाने के लिए भी प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना पड़ा।

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