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शहादत को सलाम:सियाचिन में शहीद हुए तरुण भारद्वाज पंचतत्व में विलीन, नम आंखों से हजारों लोगों ने दी श्रद्धांजलि

गुरुग्राम9 दिन पहले
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  • जिला प्रशासन की ओर से डीसी डाॅ. यश गर्ग ने दी शहीद को श्रद्धांजलि
  • सोहना के वर्तमान विधायक संजय सिंह व पूर्व विधायक तेजपाल तंवर समेत कई लोगों ने दी श्रद्धांजलि

सियाचिन में गश्त के दौरान ग्लेशियर के नीचे दबने से शहीद हुए भोंडसी निवासी तरुण भारद्वाज पंचतत्व में विलीन हो गए। उनकी अंत्येष्ठी रविवार दोपहर करीब दो बजे उनके पैतृक गांव भोंडसी के शमशान घाट में हुई। इस दौरान जिला प्रशासन की ओर डीसी डा. यश गर्ग ने राजकीय सम्मान के साथ शहीद को नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। शहीद के गांव भोंडसी पहुंचने से पहले ही सोहना क्षेत्र से वर्तमान विधायक संजय सिंह व पूर्व विधायक तेजपाल तंवर पहुंच गए और उन्होंने शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित किए। वहीं भोंडसी गांव के अलावा आसपास के हजारों लोग अंतिम दर्शन करने के बाद अंतिम यात्रा में शामिल हुए। भीड़ अधिक होने व सोहना रोड पर चल रहे निर्माण कार्य के कारण सोहना से गुड़गांव की ओर जाने वाले ट्रैफिक को दमदमा रोड होते हुए जेल रोड के लिए डायवर्ट कर दिया गया, जिससे वाहन चालकों को ट्रैफिक जाम की समस्या का भी सामना करना पड़ा।

भोंडसी गांव में जैसे ही शहीद तरुण भारद्वाज (21 वर्षीय) युवा सैनिक का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर पहुंचा तो चारों तरफ वंदे मातरम व तरुण भारद्वाज जिंदाबाद के नारे गूंजने लगे। 16 राजपूत के जवान पहले पार्थिव शरीर को गांव की तंग गलियों से होते हुए घर लेकर गए और माता-पिता व भाईयों के अलावा अन्य रिश्तेदारों के अंतिम दर्शन कराने के बाद गांव के कम्पयुनिटी सेंटर में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। जहां भारी भीड़ जुटने के कारण उमस भरी गर्मी के बावजूद युवा सैनिक को श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे। इस दौरान भोंडसी गांव के कर्नल संतपाल राघव ने बताया कि भोंडसी गांव फौजियों गांव रहा है। अकेले भोंडसी गांव से प्रथम विश्व युद्ध से लेकर अब तक करीब 36 सैनिक अपने प्राणों की आहूति देश के लिए दे चुके हैं।

तरुण भारद्वाज समेत तीन भाई हैं, जिनमें से सबसे छोटे तरुण करीब डेढ़ पहले ही 16 राजपूत में भर्ती हुए थे। पहली पोस्टिंग सियाचिन में हुई। कर्नल संतपाल राघव ने बताया कि सियाचिन विश्व की सबसे ऊंची चोटियों में से हैं और वहां मौसम अक्सर खराब रहता है, जिससे हमारे जवान विपरीत परिस्थितियों में तैनात रहते हैं। गश्त के दौरान तीन दिन पहले तरुण ग्लेशियर की चपेट में आ गया था, जिसमें कई सैनिक शहीद हुए थे। कर्नल संतपाल राघव ने बताया कि वर्ष 2001 से 2021 तक 20 साल में ही भोंडसी गांव से चार सैनिक शहीद हुए हैं, जिनमें 2001 में कैलाश सिंह छौकर, खेमचंद राघव, कुमरपाल राघव व तरुण भारद्वाज के नाम शामिल हैं।

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