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  • Vegetables Grown By Vertical Method, Not On The Ground, Will Not Be Spoiled By Staying In The Air With The Help Of Bamboo Sticks

आधुनिक खेती से किसानों का फायदा:वर्टिकल पद्धति से उगाए सब्जियां, जमीन पर नहीं, बांस की बल्लियों के सहारे हवा में रहने से नहीं होंगी खराब

गुड़गांव13 दिन पहले
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वर्टिकल पद्धति से खेती का जायजा लेते किसान। - Dainik Bhaskar
वर्टिकल पद्धति से खेती का जायजा लेते किसान।
  • इस पद्धति पर बागवानी विभाग किसानों को दे रहा है 50 प्रतिशत अनुदान: दीन मौहम्मद

नूंह बागवानी विभाग ने उन्नत तरीके से सब्जियों के उत्पादन लेने के लिए शुरु की गई वर्टिकल पद्धति किसानों के लिए वरदान बन रही है। जिसके तहत सब्जियां उगाने में किसानेां को न केवल बागवानी विभाग की और से 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है, वही इस पद्धति से खेती करने पर किसान दो-तीन गुना उत्पादन भी प्राप्त कर सकते है। नूंह जिला में वर्टिकल पद्धतिसे 82 एकड़ जमीन पर सब्जी उगाने का लक्ष्य रखा गया है।

जिला बागवानी अधिकारी डा. दीन मौहम्मद ने बताया कि जिले के गांव नसीराबास, अहमदबास,नांगल मुबारिकपुर, हसनपुर सोहना, नंगली, आदि गांव में 50 एकड़ में घिया य तोरई उगाने की प्रक्रिया शुरु हो चुकी है। इसमें किसानों 31 हजार 250 रुपए प्रति एकड़ सब्सिडी दी जाती है। इस हाईटैक पद्धति से हर मौसम में सब्जियों का उत्पादन बढ़ाने के साथ ही सब्जियों की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि इस पद्धति से घीया टमाटर, शिमला मिर्च, तोरई, खीरा, करेला, सादा मिर्च, धनिया उगाया जा सकता है।

नूंह जिला में किसानों ने वर्टिकल पद्धति पर खेती शुरु की दी है। उन्होंने बताया कि सब्जियों पर ओले, ज्यादा बरसात व कीड़े लगने की अधिक समस्यां रहेती है, जिसमें फसले नष्ट हो जाती थी। इस पद्धति से सब्जियों पर बारिश, ओले व कीडो का भी प्रभाव नहीं पड़ता। यह पद्धति किसानों के लिए वरदान बन रही है तथा किसानों को काफी फायदा हो रहा है। सब्जियां जमीन को नहीं छूने के कारण उनके आकार व रंग काफी साफ होते है। जिससे सब्जी के दाम भी अच्छे मिलते है। वर्टिकल पद्धति के तहत पाली हाउस बनाकर उसमें सब्जियों की बागवानी विभाग द्वारा पौधे लगाई जाती है सब्जियों के पौधों को पाली हाउस में उपर बांध दिया जाता है और बांस-बल्सियों के सहारे बेल को उपर चढ़ा दिया जाता है। जिससे सब्जियां जमीन पर नहीं टिकती है। पौधे उपर की और बढते हुए अधिक उत्पादन लिया जाता है। इसके अलावा फसलें जमीन पर फैलने की बजाय उपर की और बढते हुए अधिक उत्पादन लिया जाता है। इसके अलावा फसलें जमीन पर फैलने की बजाए उपर की और बढ़ती है जिसेसे ओले, बारिश और कीडों का प्रभाव नहीं पडता है।

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