कार्यवाही / दिल्ली सरकार के एम्स नाइट शेल्टर में 22 कोरोना संक्रमित मिले :हाईकोर्ट ने दिए जांच के आदेश

दिल्ली एम्स के बाहर बने नाइट शेल्टर होम में बैठे लोग। (फाइल) दिल्ली एम्स के बाहर बने नाइट शेल्टर होम में बैठे लोग। (फाइल)
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दिल्ली एम्स के बाहर बने नाइट शेल्टर होम में बैठे लोग। (फाइल)दिल्ली एम्स के बाहर बने नाइट शेल्टर होम में बैठे लोग। (फाइल)

  • जनहित की याचिका पर हाईकोर्ट ने शेल्टर का दिया विडियोग्राफी के दिए आदेश

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रजनीश भटनागर की बेंच ने एक जनहित में दाखिल याचिका के माध्यम से एम्स अस्पताल के सामने नाइट शेल्टर में रहने वाले लोगों में से 22 लोगों के कोरोना पॉजिटिव होने की सूचना मिलने के बाद वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई करते हुए शुक्रवार नाइट शेल्टर की तत्काल जांच का आदेश दिए है। कोर्ट इस मामले पर अगली सुनवाई 27 मई को करेगा। 
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने जांच की वीडियोग्राफी भी कराने का आदेश दिए है। कोर्ट सुनवाई के दौरान पाया कि इस मामले की याचिकाकर्ता और सरकार के दावों में काफी अंतर है।

 कोर्ट ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के निदेशक को निर्देश दिया कि नाइट शेल्टर के जांच के समय उनका प्रतिनिधि भी मौजूद रहेगा। जांच के लिए किसी नोटिस या कोर्ट के आदेश की प्रति की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने  जांच की वीडियो दूसरे वकीलों को भी उपलब्ध कराने के आदेश दिए है। बेंच ने सुनवाई के दौरान जांच के समय वीडियोग्राफी कराने का भी निर्देश दिया है। बेंच ने कहा है कि नाइट शेल्टर में रह रहे लोगों के बयान भी रिकार्ड किए जाएं ताकि सच्चाई का पता चल सके। 
शेल्टर में पानी और सफाई की भी व्यवस्था नहीं:हाईकोर्ट
याचिका कर्ता ने कोर्ट से कहा कि नाइट शेल्टर में पानी और सफाई की पूरी व्यवस्था नहीं है। नाइट शेल्टर में रोजाना आने वाले की मॉनिटरिंग के लिए एक रजिस्टर मेंटेन करने की जरूरत है। मलिक ने कहा कि उन्होंने नाइट शेल्टर के केयरटेकर से कोरोना मरीज के बारे में सूचना दी थी। उसके बावजूद उस मरीज की मां को अपने घर जाने दिया गया अब उसकी मां भी कोरोना की मरीज है। दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड ने याचिका कर्ता के सभी  आरोपों को नकारा दिया। दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड की ओर से वकील परविंदर चौहान ने मलिक की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि नाइट शेल्टर में रहने वाले लोगों के अपने किचन और टॉयलेट हैं। वे सभी विश्राम सदन की सुविधाओं का लाभ नहीं उठाते हैं। उन्होंने कहा कि नाइट शेल्टर में आने-जाने वाले लोगों की मॉनिटरिंग की जाती है।  जिन मरीजों को कोरोना का संक्रमण हुआ है उन्हें लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल और राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में यहां से इलाज के लिए शिफ्ट किया गया है। 
जब एम्स के परिसर में शेल्टर तो एम्स ने कोरोना मरीजों को क्यों नहीं किया भर्ती: दिल्ली हाईकोर्ट 
बेंच ने सुनवाई के दौरान दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड की वकीलों के दलीलों पर हैरत जताते हुए कहा कि यह शेल्टर एम्स परिसर में है। तो नाराजगी जताते हुए कहा कि कोरोना के 22 मरीज नाइट शेल्टर में रह रहे हैं और ये एम्स के परिसर में आता है।  हमें ये नहीं समझ में आता है कि उन 22 मरीजों को एम्स के कोरोना सुविधा केंद्र में क्यों नहीं भर्ती किया गया। उन्हें दूर के अस्पताल क्यों ले जाया गया। उसके बाद कोर्ट ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सचिव, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के निदेशक और एम्स प्रशासन को निर्देश दिया कि हलफनामा दाखिल कर ये बताएं कि नाइट शेल्टर के कोरोना मरीजों को एम्स में क्यों नहीं भर्ती किया गया।

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