पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

कंटेनमेंट जोन:दिल्ली में 15 दिन में बढ़ गए 231 कंटेनमेंट जोन, शुरुआती 335 बनने में लगे थे करीब तीन महीने

नई दिल्लीएक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
  • सरकार का अब प्रभावी निगरानी व बड़ी आबादी को प्रभावित होने से बचाने के लिए माइक्रो कंटेनमेंट पर जोर
  • सरकार का बड़ी आबादी को प्रभावित होने से बचाने को माइक्रो कंटेनमेंट पर जोर

राजधानी में कोरोना के संक्रमण के नए मामले आने की रफ्तार कम होती जा रही है, जबकि दूसरी तरफ कंटेनमेंट जोन की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। 11 जुलाई की दिल्ली सरकार की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में अब तक 773 कंटेनमेंट जोन बन चुके है। इसमें से 121 को डी-कंटेंड किया जा चुका है। 

अभी दिल्ली में 652 एक्टिव कंटेनमेंट जोन है। खास बात तो यह है कि दिल्ली में शुरुआती 335 कंटेनमेंट जोन बनने मेंं 85 दिन का समय लगा था, जबकि पिछले 15 दिनों में ही दिल्ली में 231 नए कंटेनमेंट जोन बन गए। इसका कारण अब बड़े एरिया की जगह माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाना है। इसमें एक पूरी गली की जगह आसपास के तीन से चार घरों को कंटेन कर दिया जाता है। ऐसे में आसपास में ही दो से तीन माइक्रो कंटेनमेंट बनाने पर जोर दिया जा रहा है। 

एक अधिकारी ने बताया कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कंटेनमेंट जोन से कम से कम लोग प्रभावित हो। पहले आस पड़ोस की दो गलियों में मामले सामने आने पर दोनों गलियों को ही कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया जाता था। अब दो माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाने की कार्रवाई की जा रही है। ताकि संक्रमण भी रोका जा सके और इलाके के दूसरे लोगों को भी परेशानी ना हो। 

दिल्ली में कोरोना के नए मामले आने की रफ्तार थमी, कंटेनमेंट जोन की संख्या बढ़ी

क्या है कारण | दरअसल बड़े कंटेनमेंट जोन बनाने से बड़ी आबादी प्रभावित होती है। वहीं, जोन के अंदर की मॉनीटरिंग भी नहीं हो पा रही थी। कंटेनमेंट जोन के अंदर लोगों के एक दूसरे के घर आने-जाने और मिलने से संक्रमण के फैलने की आशंका ज्यादा रहती थी। बड़े एरिया के कंटेनमेंट जोन में एक पॉजिटिव मामला आने पर लोगों की परेशानी दो से तीन महीने तक बढ़ जाती थी। अब छोटे माइक्रो कंटेनमेंट जोन में मॉनीटरिंग भी बेहतर तरीके से हो रही है। वहीं, इससे कम लोग प्रभावित हो रहे है। वहीं, इसे डी-कंटेट करने में भी आसानी है।

कमेटी की सिफारिश | दिल्ली में कोरोना के मामले बढ़ने पर केन्द्रीय गृहमंत्रालय की तरफ से मरीजों के इलाज, कंटेनमेंट जोन के रिव्यू समेत अन्य उपाय पर सुझाव देने के लिए डॉ. वीके पॉल कमेटी गठित की थी। इस कमेटी ने भी कंटेनमेंट जोन में संक्रमण को रोकने के लिए  उसके री डिजाइनिंग और बेहतर मॉनीटरिंग के लिए कदम उठाने के सुझाव दिए थे।  इस पर भी जिला उपायुक्त और एसडीएम ने कोरोना संक्रमण के मामले आने पर उसको गंभीरता से लेकर माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाने की कार्रवाई की जा रही है।

खबरें और भी हैं...