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घोटाले पर चोट:स्ट्रीट वेंडर घोटाले में तीन एजेंसियों के लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई, बकाया वसूली करने की भी तैयारी

गुरुग्रामएक महीने पहले
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नगर निगम के सिटी परियोजना अधिकारी समीर श्रीवास्तव ने कहा कि नगर निगम की तरफ से तीन एजेंसियों के लाइसेंस कैंसिल कर दिए गए हैं। - Dainik Bhaskar
नगर निगम के सिटी परियोजना अधिकारी समीर श्रीवास्तव ने कहा कि नगर निगम की तरफ से तीन एजेंसियों के लाइसेंस कैंसिल कर दिए गए हैं।
  • नगर निगम को करीब 6.66 करोड़ रुपए का लगाया चूना
  • पार्षदों ने निगम अधिकारियों पर लगाया था 10 करोड़ के घोटाले का आरोप

गुड़गांव नगर निगम ने स्ट्रीट वेंडर घोटाले में तीन एजेंसियों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। एजेंसियों से बकाया राशि की वसूली करने की तैयारी में नगर निगम जुट गया है। कितनी राशि इन एजेंसियों ने स्ट्रीट वेंडर से वसूला है। निगम को कितने करोड़ रुपए का चूना लगाया। इसका पूरा हिसाब निगम में तैयार कर रहा है। वहीं एजेंसियों पर आरोप है कि निगम अधिकारियों से मिलीभगत कर रेवड़ी की तरह स्ट्रीट वेंडर के लाइसेंस दिए गए। जिसकी राशि निगम में जमा कराने के बजाय एजेंसियां खुद डकार मार गई। अब इन एजेंसियों से पूरी राशि वसूली करने की तैयारी की गई है।

सेक्टर-31 मार्केट में स्ट्रीट वेंडर एरिया में लाइसेंस दिए गए हैं। एजेंसियों ने एक स्ट्रीट वेंडर से 85300 रुपए लिया था। जिस स्थान के लिए लाइसेंस दिया था। उस स्थान के बजाय दूसरे स्थान पर लगाने के लिए वेंडरों के सामान उठाने को लेकर एजेंसियां डराती रही है। स्ट्रीट वेंडर रमन ने बताया कि एजेंसी के दबाव में उनके बताए हुए स्थान पर नहीं लगाया तो निगम अधिकारी के साथ मिलकर उसका लाइसेंस कैंसिल कर दिया।

लाइसेंस कैंसिल करने के नाम पर 50 हजार रुपए का चेक दिया। बाकी 35300 रुपए नहीं दिए। इसी तरह लक्ष्मण का भी लाइसेंस कैंसिल कर उसे 50 हजार रुपए थमा दिया। ऐसे 20 से अधिक स्ट्रीट वेंडरों को डराकर लाइसेंस कैंसिल किए गए। उनके लाईसेंस को एजेंसियों को दूसरे लोगों को हाथों बेच कर मोटी रकम ले ली गई। जो निगम में दर्ज नहीं कराए गए हैं। ऐसे में शहर में सात हजार स्ट्रीट वेंडरों के नाम निगम में दर्ज नहीं है।

न तो बैठक और न ही फैसला हुआ

गत 18 मार्च को नगर निगम की बैठक में स्ट्रीट वेंडिंग को लेकर पार्षदों ने दस करोड़ रुपए का घोटाला करने का आरोप निगम अधिकारियों पर लगाया था। पार्षदों ने पूर्व सिटी परियोजना अधिकारी पर आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी। जिसके बाद निगम अधिकारियों ने एक सप्ताह में बैठक कर फैसला लेने की बात कही थी। लेकिन न तो बैठक हुई और न ही कोई फैसला हुआ।

निगम में मात्र 1620 रेहड़ी के रिकॉर्ड

निगम सदन के समक्ष प्रस्तुत किए गए रिपोर्ट में नगर निगम क्षेत्र में कुल 3452 रेहड़ी लगाने के वर्क ऑर्डर हुए थे। जिसमें से मात्र 1620 रेहड़ी का रिकॉर्ड निगम में है। बाकी एजेंसियां निगम अधिकारियों के साथ मिलकर गोलमाल कर गई। इसमें स्पिक एंड स्पैन एजेंसी ने 429 रेहड़ी, लियो मीडियाकॉम ने 594 और एगमैक एजेंसी ने 597 रेहडियां स्थापित करना था। एजेंसी द्वारा 1500 रुपए प्रति रेहड़ी प्रति माह की दर से किराया लिए जाते थे। इसमें से नगर निगम को 500 रुपए मिलता था। बाकी एक हजार रुपए एजेंसी लेती थी। जो स्ट्रीट वेंडरों के रखरखाव से लेकर सुविधाएं दिए जाने थे। लेकिन एजेंसियां ऐसा कुछ नहीं करती थी।

6.66 करोड़ रुपए का चूना लगाया

नगर निगम के अनुसार वर्क ऑर्डर में दिए गए स्कॉप ऑफ वर्क मुताबिक 3452 रेहड़ियों से अनुमानित राशि 6.98 करोड़ रुपए होती है, जबकि तत्कालीन सिटी प्रोजेक्ट ऑफिसर की तरफ उपलब्ध करवाई गई रिपोर्ट में मात्र 1620 रेहडी की अनुमानित राशि 1.79 करोड़ रुपए बनती है। इसमें से 31.51 लाख रुपए की राशि नगर निगम में जमा हुई है। बाकी 6.66 करोड़ रुपए का एजेंसियों ने नगर निगम को चूना लगाया है।

क्या कहते हैं अधिकारी

नगर निगम के सिटी परियोजना अधिकारी समीर श्रीवास्तव ने कहा कि नगर निगम की तरफ से तीन एजेंसियों के लाइसेंस कैंसिल कर दिए गए हैं। इन एजेंसियों से रिकवरी करने के लिए रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। पूरी राशि ब्याज सहित वसूल की जाएगी।

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