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दिल्ली दंगे के एक मामले में सुनवाई:निचली अदालत के आदेश के बाद तीनों छात्र-कार्यकर्ता जमानत पर रिहा

नई दिल्ली2 महीने पहले
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कोर्ट ने रिहाई में देरी के लिए पुलिस पर नाराजगी दिखाई, कहा- हाईकोर्ट की टिप्पणी याद करें - Dainik Bhaskar
कोर्ट ने रिहाई में देरी के लिए पुलिस पर नाराजगी दिखाई, कहा- हाईकोर्ट की टिप्पणी याद करें

निचली अदालत ने गुरुवार को तीन छात्र-कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई के आदेश दिए। उसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की छात्राएं देवांगना कलिता व नताशा नरवाल को जमानत पर रिहा कर दिया गया।

दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने मामले की सुनवाई की। आरोपियों के वकील ने अदालत को बताया कि उन्हें रिहाई के आदेश के दस्तावेज नहीं मिले हैं। इस पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रविंदर बेदी ने कहा, ‘हस्तलिखित आदेश दिए जा चुके हैं।’ अदालत ने पते और जमानतदारों के सत्यापन में देरी को लेकर पुलिस पर नाराजगी दिखाई।

जज ने कहा, ‘आप (पुलिस) रिहाई में देरी का उचित कारण नहीं बता पा रहे हैं। ऐसे में आरोपियों को जेल में क्यों रखा जा रहा है।’ अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी का हवाला दिया। हाईकोर्ट ने कहा था कि जमानत के आदेश देने और मुचलके के साथ जमानतदारों के पेश होने के बाद कैदी को एक मिनट भी सलाखों के पीछे नहीं रखना चाहिए। इसके बाद अदालत ने तिहाड़ जेल के अधीक्षक को आरोपियों की तत्काल रिहाई के लिए वारंट भेजा।

हाईकोर्ट के आदेश के 36 घंटे बाद भी आरोपी जमानत पर रिहा नहीं किए गए थे

दिल्ली हाईकोर्ट ने इन छात्र-कार्यकर्ताओं को दो दिन पहले जमानत दे दी थी। लेकिन पुलिस ने इन्हें रिहा नहीं किया था। इसके बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। उन्होंने याचिका में कहा, “जमानत के आदेश के 36 घंटे बाद भी हमें रिहा नहीं किया जा रहा है।’

हाईकोर्ट के जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और एजे भंभानी की बेंच ने आरोपियों के वकील और दिल्ली पुलिस को निचली अदालत में जाने को कहा। हाईकोर्ट ने निचली अदालत को आदेश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं की रिहाई पर तेजी से फैसला करे।