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IT कानून से कंपनियों में डर:भारत में विस्तार को लेकर आशंकित हैं अमेरिकी टेक कंपनियां; सरकार की सख्ती को बता रहीं इसकी वजह

नई दिल्ली3 महीने पहले
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विदेशी कंपनियां आईटी व प्रतिस्पर्धा के कानूनों में सरकारी सख्ती को गिना रही हैं। - Dainik Bhaskar
विदेशी कंपनियां आईटी व प्रतिस्पर्धा के कानूनों में सरकारी सख्ती को गिना रही हैं।

दुनियाभर की सोशल मीडिया, आईटी और इंटरैक्टिव प्लेटफॉर्म बेस्ड कंपनियां भारत को अपना प्रमुख बाजार मानती रही हैं। अमेरिकी और अन्य बहुराष्ट्रीय टेक कंपनियां चीन के मुकाबले भारत को ही निवेश के लिए सही मान रही थीं। मगर अब इन कंपनियों के बोर्ड रूम्स में उठ रही सुगबुगाहट को सही मानें तो भारत में विस्तार की इन कंपनियों की योजनाएं ठंडे बस्ते में जाती नजर आ रही हैं।

हालांकि अभी तक किसी भी कंपनी ने भारत में निवेश प्रोजेक्ट्स को रोकने की घोषणा नहीं की है। लेकिन इनके अधिकारी दबी जुबान में स्वीकार करते हैं कि ऐसी चर्चा जरूर उठी है। इसकी वजह के तौर पर ये कंपनियां आईटी व प्रतिस्पर्धा के कानूनों में सरकारी सख्ती को गिना रही हैं। भारत में काम कर रही एक बड़ी तकनीकी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं- ‘हाल ही में कंपनियों में डर का माहौल बना है।

इसका असर कंपनियाें की रणनीति और संचालन दोनों पर दिख रहा है।’ मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम न छापने का अनुरोध पर कहा कि सरकार का इरादा फेसबुक, ट्विटर या किसी अन्य सोशल मीडिया ऐप पर अंकुश लगाने का नहीं है। जिस तरह भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिका में व्यापार करने जाती हैं वहां के नियमों का पालन करती हैं, वैसी ही हम यूएस की कंपनियों से भी भारत में यही उम्मीद करते हैं।

अब तक कंपनियों की योजनाएं मुकम्मल थीं

  • आंकड़े बताते हैं कि यूजर्स की संख्या के लिहाज से फेसबुक और वॉट्सएप के लिए भारत सबसे बड़ा बाजार है। जबकि ट्विटर के लिए तीसरा बड़ा।
  • 42 हजार करोड़ का निवेश पिछले साल फेसबुक ने रिलायंस समूह के जियो प्लेटफॉर्म में किया था।
  • 47 हजार करोड़ का निवेश भारत में करने की तैयारी अमेरिकी कंपनी अमेजन की है।
  • 73 हजार करोड़ का फंड गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट ने बनाया है। इस राशि का निवेश अगले 5-7 साल में भारत में होगा।

...मगर इन फैसलों से खलबली

  • नए आईटी नियमों के जरिए ओटीटी, ऑनलाइन मीडिया और सोशल मीडिया को पाबंद किया जा रहा है।
  • सरकार ने मास्टर कार्ड जैसी अमेरिकी कंपनियों से साफ कह दिया है कि उन्हें भारत में ही डेटा रखना होगा। मास्टर कार्ड ने इसकी शिकायत अमेरिकी प्रशासन से की है।
  • भारत के प्रतिस्पर्धा आयोग ने अमेरिकी कंपनी अमेजन के कारोबारी तौर-तरीकों को साफ-सुथरा नहीं माना है। नए नियमों के कारण 2019 में अमेजन को हजारों उत्पाद प्लेटफॉर्म से हटाने पड़े थे।
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