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  • Between 2014 And 2021, 5 Colleges Closed Every Month, 4.18 Lakh Seats Decreased; The Good Trend Is That Placements Rose From 28% To 46%

7 साल में देश के 422 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद:2014 से 2021 के बीच हर माह 5 कॉलेज बंद हुए, 4.18 लाख सीटें घटीं; अच्छा ट्रेंड ये कि प्लेसमेंट 28% से 46% पहुंचा

नई दिल्ली8 महीने पहलेलेखक: अनिरुद्ध शर्मा
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कोरोनाकाल में बिना परीक्षा के असेसमेंट की वजह से 12वीं पास करने वाले छात्रों की संख्या बढ़ गई। ऐसे में यह बहस भी शुरू हो गई थी कि इन छात्रों को बेहतर उच्च व तकनीकी शिक्षा का मौका देने के लिए इंजीनियरिंग-मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाई जानी चाहिए। मगर पिछले 2014-15 से 2020-21 का ट्रेंड बताता है कि देश में इंजीनियरिंग कॉलेजों और उपलब्ध सीटों की संख्या लगातार कम हुई है। इस दौरान 422 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो गए, 4.18 लाख सीटें घट गईं।

अक्टूबर से शुरू होने वाले 2021-22 के नए सत्र में तो पिछले वर्ष के मुकाबले भी 34,952 सीटें घट गई हैं, 86 कॉलेज भी घट गए हैं। हालांकि ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) इसे एक पॉजिटिव ट्रेंड मानता है। एआईसीटीई के मुताबिक पिछले एक दशक में औसतन 45% इंजीनियरिंग की सीटें खाली ही रह जा रही थीं।

जरूरत से ज्यादा कॉलेज खुले हुए थे। अब प्रक्रिया में बदलाव की वजह से कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधरी है। यही वजह है कि प्लेसमेंट पाने वाले छात्रों की संख्या बढ़ गई है। 2012-13 में इंजीनियरिंग में प्रवेश लेने वाले 28% छात्रों को ही प्लेसमेंट मिला था, जबकि 2020-21 में यह आंकड़ा 46% तक पहुंच गया।

एआईसीटीई का आकलन: दोगुने कॉलेज खोले, इसीलिए सीटें खाली रह गईं
एआईसीटीई के चेयरमैन प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे ने कहा कि ‘जितनी जरूरत है, उससे दो गुने से ज्यादा कॉलेज खोल लिए गए तो यही नतीजा होने वाला था। 1985 से 2014 तक इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या लगातार बढ़ती ही रही। यदि उसी समय मांग के हिसाब से उचित अनुमति दी जाती तो यह स्थिति नहीं पैदा होती। पिछले एक दशक में लगातार करीब 45% सीटें खाली बच रही हैं।
मंजूर सीटों के हिसाब से फैकल्टी रखने पड़ते हैं, अब जब पर्याप्त संख्या में छात्र दाखिला ही नहीं लेंगे तो संस्थान फैकल्टी को वेतन कैसे दे पाएंगे। खराब गुणवत्ता के कॉलेज बंद हो रहे हैं। अच्छी गुणवत्ता के कॉलेज बच जाएंगे। आज कॉलेज बंद होने से इमारतें व अन्य बुनियादी ढांचा खाली पड़ा है। हमने उन्हें सलाह दी है कि वे इनमें स्किल डेवलेपमेंट के सेंटर या स्नातक कॉलेज खोल लें, ताकि निवेश बर्बाद न हो।

गुणवत्ता के लिए ये कदम उठाए गए

  • मैकेनिकल, सिविल, एग्रीकल्चरल या किसी भी मेजर डिग्री कोर्स में माइनर सब्जेक्ट के तौर पर मशीन लर्निंग, एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे कोर्स ऑफर किए जाएं ताकि छात्रों को मेजर व माइनर दोनों डोमेन के जॉब मिल सकें।
  • बीते तीन वर्षों से सभी इंजीनियरिंग छात्रों के लिए इंटर्नशिप अनिवार्य की गई है।
  • कोर्सेज में संशोधन किए जा रहे हैं। फैकल्टी सर्टिफिकेशन किया जा रहा है।
  • सभी संस्थानों से कहा गया है कि वे कम से कम 5 उद्योग समूहों के साथ करार करें।
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