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फाइजर और मॉडर्ना का रास्ता साफ:विदेश में बनी कोरोना वैक्सीन की अब देश की लैब में जांच की जरूरत नहीं; डीसीजीआई ने मंजूरी के नियमाें में छूट दी

नई दिल्ली2 महीने पहले
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डीजीसीआई प्रमुख वीजी सोमानी ने कहा- भारत में कोविड मामलों की बढ़ोतरी और टीकों की उपलब्धता बढ़ाने की आवश्यकता के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है। - Dainik Bhaskar
डीजीसीआई प्रमुख वीजी सोमानी ने कहा- भारत में कोविड मामलों की बढ़ोतरी और टीकों की उपलब्धता बढ़ाने की आवश्यकता के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है।

देश में विदेशी कंपनियाें के वैक्सीन के लिए सरकार ने नियमाें में छूट दी है। भारत के शीर्ष दवा नियामक औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने इसकी घाेषणा की है। अब विदेश में बने काेराेना के टीकाें काे देश में ट्रायल से नहीं गुजरना हाेगा, बशर्ते कि उसे बाहरी देशों में इस्तेमाल की मंजूरी मिली हाे और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिली हाे।

हालांकि देश में बन रही वैक्सीन के हर बैच के सैंपल की जांच लैब में पहले की तरह होती रहेगी।डीसीजीआई के इस फैसले से अमेरिकी कंपनी फाइजर और माॅडर्ना के टीकाें के देश में आने का रास्ता साफ हाे गया है। ये दाेनाें कंपनियां इसकी लंबे समय से मांग कर रही थीं।

डीसीजीआई के अनुसार, जिन वैक्सीन को अमेरिका के खाद्य एवं ड्रग्स प्रशासन, ब्रिटेन के ईएमए, ईके, एमएचआरए और जापान के पीएमडीए द्वारा मंजूरी मिली है, उन टीकाें के लिए अब देश में परीक्षण या ट्रायल जरूरी नहीं हाेगा। डीजीसीआई प्रमुख वीजी सोमानी ने कहा है कि यह निर्णय भारत में कोविड मामलों की बढ़ोतरी और टीकों की उपलब्धता बढ़ाने की आवश्यकता के मद्देनजर लिया गया है।

ये छूट दी- अब विदेश में बने टीकाें का पाेस्ट-लाॅन्च ब्रीजिंग ट्रायल नहीं

किसी विदेशी वैक्सीन के हर बैच को टेस्ट करने के नियम में छूट दी गई है। यानी हिमाचल प्रदेश के कसाैली के केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला में हाेने वाली पाेस्ट-लाॅन्च ब्रीजिंग ट्रायल काे नहीं किया जाएगा। फाइजर और मॉडर्ना ने इसकी शर्त रखी थी। अब सिर्फ पहले 100 लोगों को जो वैक्सीन दी जाएगी, उन लोगों में वैक्सीन के सेफ्टी की जांच की जाएगी।

सबसे बड़ा सवाल: कोई नुकसान होता है तो कौन होगा जिम्मेदार?

ब्रीजिंग ट्रायल को खत्म करना बिल्कुल गलत फैसला है। आपात स्थिति है, तब भी वैक्सीनेशन के दौरान कंपनी को ट्रायल करने से छूट नहीं मिलनी चाहिए। कुछ सैंपल की रैंडम जांच जरूरी है, क्योंकि दवा का मूल सिद्धांत है कि फायदा हो या न, नुकसान नहीं होना चाहिए। इस तरह की छूट के बाद नुकसान होता है तो जिम्मेदार कौन होगा, यह जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

-डॉ संजय रॉय, प्रेसिडेंट, इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन (आईपीएचए)

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