बिगड़ रहे हालात:भारत में अब बड़े शहरों से छोटे शहरों में तेजी से फैल रहा है कोरोना वायरस

नई दिल्ली7 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
छोटे शहरों में चिकित्सा सुविधाएं न होने से खतरा ज्यादा। - Dainik Bhaskar
छोटे शहरों में चिकित्सा सुविधाएं न होने से खतरा ज्यादा।
  • जो शहर पहली लहर में अछूते रहे, उनमें अब ऑक्सीजन और बेड के लिए भटक रहे हैं लोग

भारत में कोरोना की दूसरी लहर ने दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में कहर बरपा रखा है। अस्पतालों में मरीजों को ऑक्सीजन और बेड नहीं मिल रहे हैं। लेकिन अब कोरोना की यह दूसरी लहर देश के उन छोटे कस्बों, शहरों और गांवों में भी पैर पसार रही है, जो पहली लहर के दौरान इससे अछूते थे।

सबसे बड़ी परेशानी यह है कि देश के छोटे शहरों में चिकित्सा सुविधाएं सीमित होने के कारण लोग बेहतर इलाज के लिए अपनों लेकर बड़े शहरों की ओर जाने को मजबूर भी हो रहे हैं। आलम ये है कि बीते 24 घंटे में जयपुर के प्राइवेट अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से 4 मरीजों की मौत हुई है। यूपी के लखनऊ में ऑक्सीजन के लिए लोग भटक रहे हैं। दिल्ली के सराय काले खां श्मशान घाट के सामने 27 और शवदाह प्लेटफाॅर्म बन रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार यूपी में वायरस का रिप्रोडक्शन नंबर (आर) 2.14, झारखंड में 2.13 और बिहार में 2.09 है। यानी यहां एक व्यक्ति औसतन इतने लोगों को संक्रमित कर रहा है। वायरस कितनी तेजी से फैल रहा है, इसे परखने के लिए आर नंबर का प्रयोग किया जाता है।

डॉक्टर, नर्स, लैब टेक्निशियन तक की कमी

कोटा: 27 दिन में दोगुने मरीज और एक हफ्ते में 6 हजार केस

राजस्थान के कोटा जिले में पिछले हफ्ते 6000 से अधिक मरीज मिले और मौतें करीब 264 हुईं। सर्वाधिक मौतें अप्रैल में हुई हैं। बीते 7 अप्रैल तक नए मामलों दोगुने होने में 72 दिन लगे थे, अब 27 दिन में केस दोगुने हो रहे हैं। अस्पतालों में ऑक्सीजन वाले बेड खाली नहीं हैं। 27 अप्रैल को जिले की 329 आईसीयू यूनिट्स में से केवल दो ही खाली थीं।

प्रयागराज: कोरोना से अप्रैल महीने में ही करीब 32% मौतें

यूपी के प्रयागराज जिले में 20 अप्रैल तक कोरोना के 54,339 केस थे, उसके बाद नए केस 21% बढ़े। पिछले हफ्ते 11,318 केस मिले, 614 की मौत हुईं। अप्रैल महीने में ही करीब 32% मौतें हुईं हैं। असल मौतों की संख्या सरकारी रिकॉर्ड से ज्यादा है। सोशल मीडिया पर राज्य के लोग ऑक्सीजन और दवा की कमी पर सवाल उठा रहे हैं।

भागलपुर: जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के बेड फुल

बिहार के भागलपुर जिले में 20 अप्रैल तक नए केस 26% बढ़े हैं और 33% की मौत हुई है। जहां तक बेड की बात है, तो यहां के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की सभी यूनिट्स 28 अप्रैल तक भर गई थीं। यहां हालत यह कि पिछले 10 दिनों के दौरान यहां के 220 डॉक्टरों में से 40 कोरोना संक्रमित पाए गए और इनमें से भी करीब 4 डॉक्टरों की मौत हो गई है।

कबीरधाम: सात वेंटिलेटर, पर चलाने वाले डॉक्टर ही नहीं हैं

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में 1 मार्च तक कोई एक्टिव केस नहीं था, लेकिन पिछले एक हफ्ते में यहां मरीजों की संख्या तीन हजार हो गई है। यहां के जिला अस्पताल में सात वेंटिलेटर हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर ही नहीं हैं। इसके साथ ही अस्पताल में नर्सेस और लैब टेक्निशियन्स का भी अभाव है। इसलिए लोगों को सही इलाज नहीं मिल रहा है।

वायरस को ट्रैक करने में चूकने से बिगड़े हाल

जेफरी गेटमैन/शालिनी वेणुगोपाल/अपूर्व मंडाविलिभारत में इन दिनों कोरोना के कारण बुरा हाल है। लेकिन इसके पीछे सिर्फ डबल मयूटेंट या बी.1.617 वैरियंट को वजह बताया जा रहा है। जबकि विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया में और जगह भी घातक वैरियंट मिले हैं, ब्रिटेन का वैरियंट इसका एक उदाहरण है।

न्यूयॉर्क के बेलव्यू अस्पताल की डॉ. सेलाइन गाउंडर के अनुसार भारत में वायरस से लड़ने में गंभीरता से काम नहीं किया गया। इतने मरीज आने के बाद भी जीनोम सीक्वेंसिंग पर पूरी तरह फोकस नहीं हुआ। तमिलनाडु के वायरोलॉजिस्ट डॉ. थेक्केरा जैकब जॉन के अनुसार हमारा फोकस वैरियंट्स को ट्रैक करने पर था ही नहीं।