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जाम के लिए जाम:शराब पर 70 फीसदी सेस लगाने के बाद भी उमड़ी भीड़, 1 घंटे में बंद करनी पड़ीं दुकानें

नई दिल्ली 7 महीने पहले
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भीड़ कराती मधुशाला: झील खुरेजा में लगी लंबी लाइन
  • ढील के दूसरे दिन भी सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ी धज्जियां, प्रशासन और पुलिस के बीच नहीं सुलझा मामला

राजधानी में अरविंद केजरीवाल सरकार ने मंगलवार से शराब पर 70% अतिरिक्त टैक्स वसूलना शुरू कर दिया है। इसके बाद भी आज सुबह से यहां शराब की दुकानों पर लोगों की लंबी कतारें दिखीं। सोमवार को ‘सस्ती’ शराब के लिए जिस तरह भीड़ तड़के कतारबद्ध हो गई थी, उसी तरह मंगलवार ‘70% महंगी’ शराब लेने के लिए सुबह से ही लोगों की लाइन दिखी। मंगलवार को 172 दुकानों को अनुमति मिली थी जिनमें से 83 दुकानें खुलीं।

चंद्रनगर, झील चौक, शिवपुरी, चंद्रनगर मेन रोड पर सुबह 5-6 बजे लोग लाइन में थे। उम्मीद थी कि 9 बजे दुकान खुलेगी लेकिन चंद्र नगर में भीड़ को देखते हुए दुकान नहीं खोली गई। चंद्र नगर मेन रोड की दुकान खोली गई तो शुरुआत में लोगों ने एक-एक पेटी खरीद ली। आधे घंटे से पौने घंटे तक ‘दो गज’ की दूरी से एक-डेढ़ किमी लंबी लाइन में खड़े लोग आपाधापी में नजर आए और फिर पुलिस ने दुकान बंद करा दी। ऐसा ही हाल शिवपुरी और झील चौक की दुकान पर हुआ। विश्वास नगर और मयूर विहार की दुकान जरूर इससे थोड़ी ज्यादा देर खुलने की सूचना मिली। दिल्ली आबकारी विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मंगलवार को भी दुकाने ज्यादातर जगह नहीं खुल पाईं। जहां खुली भी तो वहां 15 मिनट से 45 मिनट के बीच बंद करा दी गईं। भीड़ अधिक आने के कारण ऐसा हुआ। वहीं दिल्ली पुलिस कर्मी ने दुकानों के आसपास बताया कि लाइन लगवाने के लिए प्रशासन की टीम होनी चाहिए थी लेकिन नहीं थी। भीड़ ज्यादा थी और सोशल डिस्टेंसिंग की दिक्कत थी। ऊपर से आदेश आया इसलिए बंद करवा दी गईं। इधर, विश्वास नगर, चंद्र नगर, झील चौक, शिवपुरी पर दुकान शुरुआती एक घंटे से पहले ही बंद करा दी गईं। लेकिन दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक भी लोग आसपास डटे हुए थे। बिना हेलमेट किसी दुपहिया पर एक तो किसी पर दो लोग पहुंचकर रुकते रहे और वहां दुकान खुलने की जानकारी लेते रहे। 

आबकारी आयुक्त के पुलिस आयुक्त को पत्र लिखने का नहीं दिखा असर 

दिल्ली सरकार के सूत्रों ने बताया कि शराब बिक्री का जो आदेश हुआ है, उसमें पुलिस व्यवस्था दुरुस्त नहीं रख पा रही है। आबकारी आयुक्त रवि धवन ने पुलिस आयुक्त एस. एन. श्रीवास्तव को पत्र लिखा था लेकिन उसका असर भी मंगलवार को नहीं दिखा। फिर दुकान बंद करवा दी गईं। अब इसमें अधिकारी जल्द उपराज्यपाल के स्तर पर मामला उठा सकते हैं। वहां से कोई आदेश-निर्देश के बाद ही मामला सुलझने की संभावना है। वहीं एक अधिकारी ने कहा कि जितने लोगों को शराब दी जा सकती है, उसका एक टोकन बांटकर भी व्यवस्था बनाए जाने पर चर्चा चल रही है। जो टोकन लेकर खड़ा हो, उसी को वहां रहने दिया जाए।  बता दें कि सोमवार को भी लॉकडाउन के तीसरे फेज में ऑरेंज और ग्रीन जोन में शराब की दुकानें खोलने की इजाजत दी गई थी, लेकिन इन दुकानों पर लॉकडाउन की धज्जियां उड़ीं। लोग सोमवार सुबह 5 बजे से ही लाइनों में लग गए थे। 

दिल्ली सरकार को 1 महीने में ही तीन महीने का मिल सकता है राजस्व
दिल्ली सरकार को शराब की बिक्री से सालाना करीब 5000 करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है। वित्तवर्ष 2018-19 में 5028 करोड़ का राजस्व मिला था जिसके बाद 2019-20 में 6000 करोड़ का लक्ष्य रखा गया था। फरवरी 2020 तक के अपडेट डाटा के अनुसार 4669 करोड़ का राजस्व मिला था जो पिछले साल से 3.73 फीसदी अधिक है। ऐसे में यह बताना जरूरी है कि ब्रांड और कीमत के हिसाब से शराब पर 40-60% तक आबकारी कर लगता है। मसलन सालाना करीब 15 हजार करोड़ रुपए की शराब की बिक्री होती है। ऐसे में 70% कोरोना फीस लगाए जाने का मतलब है कि पुराने पैटर्न से शराब बिक्री हो तो एक महीने में करीब 875 करोड़ रुपए मिल सकते हैं। लेकिन अभी लोग ज्यादा शराब खरीद रहे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि अगर दुकान पूरी खुल जाए तो एक महीने में तीन महीने के बराबर राजस्व 1500-1700 करोड़ रुपए तक मिल सकता है।

शराब खरीदने के लिए लगी लंबी कतार
शराब खरीदने के लिए लगी लंबी कतार

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