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पुलिस की कार्रवाई:फर्जी दस्तावेजों से बेच दिया डीडीए का प्लॉट, भगौड़ा घोषित महिला गिरफ्तार

नई दिल्ली9 दिन पहले
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फर्जी दस्तावेजों की मदद से डीडीए प्लॉट बेचने के मामले में शामिल एक महिला को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इसे सात साल बाद पकड़ा जा सका। इस केस में छह आरोपी पहले ही पकड़े जा चुके हैं जिनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल हो गई थी।

आर्थिक अपराध शाखा के मुताबिक मॉडल टाउन तीन निवासी संजय गोयल ने इस मामले में शिकायत दर्ज करायी थी, जिसमें बताया गया वह और उसके परिवार के लोगों को प्रॉपर्टी डीलर जितेन्द्र गुप्ता और उसके सहयोगियों ने ठगा है। फर्जी दस्तावेज बनाकर डीडीए प्लॉट बेचे गए। इस तरह से उनके परिवार से जुड़े लोगों को सात करोड़ की चपत लगाई गई।

जांच के दौरान पुलिस ने पाया इस फ्रॉड का मास्टरमाइंड जितेन्द्र गुप्ता ही है, जिसने अपने सहयोगियों के संग मिलकर ठग की। डीडीए में इंक्वायरी करने पर पीड़ित लोगों को पता चला था कि जालसाज डीडीए प्लॉट के असली मालिक नहीं थे। उन्होंने फर्जी दस्तावेजों की मदद से धोखाधड़ी की।

पकड़ी गई महिला आरोपियों के साथ साजिश का हिस्सा थी। उसने खुद की पहचान गुरिन्दर बेदी के तौर पर दी थी और पॉकेट पांच ब्लॉक सी सेक्टर 28 रोहिणी में एक प्लॉट का आवंटित बताया था। आर्थिक अपराध शाखा में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज होने के बाद इस महिला ने इंनेस्टीगेशन ज्वाइन नहीं की थी।

इस वजह से साल 2014 में उसे कोर्ट ने भगौड़ा घोषित कर दिया था। मामले में छह आरोपी जितेन्द्र गुप्ता, हर्ष कुमार खेरा, धीरज कुमार, विनोद शर्मा, पवन शर्मा और सुरेश शर्मा को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

पुलिस को इस केस में आरोपी महिला की तलाश थी। गिरफ्तारी के बढ़ते दबाव को देख उसने पांच जून को कोर्ट में सरेंडर कर दिया था, जिसके बाद पुलिस ने उसे पकड़ लिया। आरोपी महिला महज आठवीं तक पढ़ी है। उसका पति और बेटा भी धोखाधड़ी के मामले में शामिल थे, जो पहले पकड़े जा चुके हैं।

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