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मरीजों का आरोप:हफ्ते में केवल एक बार कोरोना संक्रमित को देखने आते हैं डॉक्टर

नई दिल्ली5 महीने पहले
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दीपचंद बंधु अस्पताल में कोरोना संक्रमितों का जहां इलाज हो रहा वहां रिसेप्शन सूना पड़ा है।
  • दीपचंद बंधु अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों को सुरक्षाकर्मी व चपरासी देते है दवा
  • सांस लेने में दिक्कत होने पर अस्पताल में भर्ती मरीज खुद ही लगाते हैं ऑक्सीजन

(धर्मेंद्र डागर) कोरोना वायरस का संक्रमण दिल्ली समेत देश भर में लगातार बढ़ता जा रहा है। दिल्ली में इसके मरीजों की संख्या के हर रोज नए रिकार्ड बन रहे है। लेकिन कोरोना संक्रमित मरीजों को दिल्ली के सबसे बड़े अस्पतालों लोक नायक जय प्रकाश नारायण और गुरु तेग बहादुर से लेकर अन्य अस्पतालों की बदहाली और मरीजों को भर्ती व इलाज नहीं मिलने की काफी शिकायतें मिलने व वीडियो वायरल हुए है।

अब कोविड अस्पताल दीपचंद बंधु अस्पताल की लापरवाही से मरीजों की हालत बहुत खराब है। अस्पताल की लापरवाही का आलम यह है कि जहां मरीजों को देखने के लिए डॉक्टर एक सप्ताह बाद दिखाई देते है, वही अस्पताल के वार्डों में पानी भरा हुआ है। पीने का पानी नहीं है। वाटरकूलर में करंट आ रहा है, जो एक मरीज को भी लग चुका है।  दीपचंद बंधु अस्पताल में भर्ती एक मरीज दीपक ने बताया कि वह पिछले सोमवार को अस्पताल में भर्ती हुए थे। उस समय उन्हें तेज बुखार, सांस लेने में दिक्कत और खांसी हो रही थी। उन्होंने बताया कि सोमवार को जब वह भर्ती हुए थे तो उन्हें कोई होश नहीं था कि कौन डॉक्टर देख रहा है, या कौन नहीं देख रहा है।

दो दिन बाद उन्हें थोड़ा होश आया। 17 जून से लेकर दूसरे रविवार यानी 22 जून तक उन्हें कोई डॉक्टर देखने तक नहीं अाया। केवल फोर्थ क्लास के कर्मचारी व वहां के सुरक्षाकर्मी एक दवा की पुड़िया सुबह और शाम को दूर से फेंककर चले जाते है। कोई  मरीज दवा लेता है या नहीं इसका किसी को कोई मतलब नहीं है।

इसके बाद किसी डॉक्टर व अस्पताल के अन्य स्टॉफ का कोई पता नहीं चलता कि कहां है। चाहे किसी को कितनी भी अधिक परेशानी आई हो। मरीजों का कहना है कि सांस लेने में दिक्कत होती है तो खुद ही ऑक्सीजन लगानी पड़ती है।

कोरोना संक्रमित 70 साल के बुजुर्ग हो गए गायब

कोरोना से संक्रमित भर्ती मरीजों का कहना है कि वार्ड में एक 70 साल के बुजुर्ग भी भर्ती है। वे कोरोना पॉजिटिव है। पिछले दस दिन से अधिक समय से भर्ती है। बुजुर्ग बोल नही पा रहे हैं, कोई हेल्प के लिए वार्ड में नही आता। अकेले होने के कारण ना तो वे खुद दवा ले सकते है और ना ही पानी पी सकते है। अस्पताल का स्टॉफ दूर से दवा फेंककर चले जाते है।

बुजुर्ग को कोई वहां भर्ती मरीज दवा दे देता है तो खा लेते है। कोई नहीं देता है तो ऐसे ही पड़े रहते है। अस्पताल का कोई डॉक्टर व स्टॉफ देखने व सुनने वाला नहीं है। मरीजों का कहना है कि तीन दिन पहले यह बुजुर्ग अचानक लापता हो गए थे। शाम मे जब अस्पताल का स्टॉफ दवा देने आया तो उन्होंने देखा कि बुजुर्ग मरीज नहीं है। काफी खोजबीन के बाद बुजुर्ग को वार्ड में लाया गया। मरीजों का कहना है कि मरीज चाहे मरे या गिरे अस्पताल प्रशासन को कोई चिंता नहीं है।
अस्पताल खुद बीमार पड़े है
अस्पतालों में भर्ती मरीजों का कहना है कि दिल्ली के सरकारी अस्पताल खुद बीमार पड़े हैं। यहां अव्यवस्था, गंदगी, व इंफैक्शन इतना अधिक है कि जो मरीज ठीक होने लायक है, वह भी मर जाए। दिल्ली सरकार के अस्पतालों में केवल गरीब लोग ही भर्ती हो रहे है। पैसे वाले और मंत्री, नेता तो निजी अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे है। ताजा उदाहरण दिल्ली सरकार के सबसे बड़े अस्पताल लोक नायक जय प्रकाश नारायण के मेडिकल डायरेक्टर कोरोना होने पर निजी अस्पताल अपोलो में भर्ती हो गए।

अस्पताल में खाना घटिया क्वालिटी का मिलता है 

वार्ड मे भर्ती एक मरीज दीपक का कहना है कि अस्पताल में खाना ऐसा दिया जा रहा कि किसी स्ट्रीट डॉग के सामने रोटी फैंक देते है। काफी दूर से थाली को सरका दिया जाता है। प्लेट से रोटी और सब्जी जमीन में गिर जाती है। उनके साथ जानवरों सेे सलूक किया जाता है। जो खाना मिलता है उसकी क्वालिटी बहुत ही घटिया होती है जिसे कोई डॉग भी नहीं खा सकता। इस खाने से मरीज और ज्यादा बीमार होने का खतरा बना रहता है।
सुविधाएं इतनी की मरीज अपने घर ही नहीं जा रहे

^ अस्पताल में मरीजों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है। प्रत्येक मरीज को हर रोज बिसलेरी 2 बोतलें दी जा रही है।  खाने में अब मरीजों को एक जूस का पैकेट, एक बिस्किट का पैकेट, एक सेंडविच और एक पेटीज की एक्सट्रा व्यवस्था की जा रही है। मरीजों व डॉक्टरों के लिए अस्पताल में 194 एसी लगाए जा रहे है। जिनमें से 40 के करीब लग चुके है। वार्ड में ऐसे भी मरीज है जो ठीक होने के बाद भी नहीं जा रहे है। 
डॉ. विकास रामपाल, चिकित्सा अधीक्षक, दीप चंद बंधु अस्पताल

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