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छह करोड़ लोग दूसरी डोज लगवाने नहीं आए:देश में हर 5वां व्यक्ति टीके की दूसरी डोज नहीं लगवा रहा, छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा 47.8% लोगों ने 112 दिन बाद भी नहीं लगवाई

नई दिल्ली4 महीने पहलेलेखक: पवन कुमार
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देश में रोज औसतन 70 लाख  से ज्यादा टीके लग रहे हैं। - Dainik Bhaskar
देश में रोज औसतन 70 लाख से ज्यादा टीके लग रहे हैं।

कोरोना के खिलाफ जारी जंग में भारत के सामूहिक प्रयासों पर 6 करोड़ से ज्यादा लोगों की लापरवाही पानी फेर सकती है। देश में 6.12 करोड़ लोग ऐसे हैं, जो पहली डोज के 112 दिन बाद भी दूसरी डोज लगवाने नहीं आए हैं। इनमें 10% लोग कोवैक्सीन वाले हैं, जिन्हें 42 दिन के अंदर ही दूसरी डोज लगवानी थी। देश में शुक्रवार तक कुल 22 करोड़ लोगों को दोनों डोज लगी थीं, जबकि, 28 करोड़ लोगों को दोनों डोज लग जानी चाहिए थीं, क्योंकि 112 दिन पहले तक इतने लोगों को पहली डोज लग चुकी थी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि टीके की दूसरी डोज नहीं लगवाने वालों की संख्या बहुत बड़ी है। यह सरकार के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गया है। हम सभी राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों को कह रहे हैं कि ऐसे लापरवाह लोगों की सख्त मॉनिटरिंग की जाए।

दरअसल, मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति दूसरी डोज के लिए निर्धारित समयसीमा लांघ जाता है तो कोविन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं होता। उसे टीका केंद्र पर जाकर एंट्री करनी होती है। केंद्र सरकार कह चुकी है कि जो लोग दूसरी डोज से चूक गए हैं, वे बिना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कभी भी सीधे टीका केंद्रों पर जाकर वैक्सीन लगवा सकते हैं। राज्यों से कहा गया है कि ऐसे सभी लोगों को टीका सुनिश्चित किया जाए।

दोनों डोज के बाद संक्रमण हो जाए तो अस्पताल की आशंका 94% कम
अमेरिका में सीडीसी का शोध बताता है कि जो लोग एक डोज लगवाने के बाद संक्रमित हुए, उनमें से अस्पताल में भर्ती होने वाले लोग बिना टीकों वाले मरीजों से 65% कम थे। वहीं, दाेनों डोज लगवाने वाले 94% कम थे। दरअसल, भारत में लग रहीं तीनों वैक्सीन की पहली डोज तभी कामयाब होती है, जब दूसरी डोज लगती है।
क्योंकि, दूसरी डोज के 14 दिन बाद शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बननी शुरू होती है। यानी, दूसरा डोज नहीं लगवाने वाले लोगों को संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है। साथ ही संक्रमित होने के बाद गंभीर रूप से बीमार पड़ने की आशंका भी ज्यादा रहती है। भारत में टीकाकरण अनिवार्य नहीं किया गया है, इसलिए टीका नहीं लगवाने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

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