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दिल्ली सरकार से योजना को वापिस लेने की मांग:विशेषज्ञों ने कहा- सरकार की 5000 हेल्थ असिस्टेंट भर्ती तबाही वाला, वोट बैंक एजेंडा

नई दिल्लीएक महीने पहले
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  • 15 दिन में नर्स और टैक्निशयन बनाने का लाई नायाब आइडिया
  • स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने उपराज्यपाल से किया इस योजना को वापिस लेने की मांग

दिल्ली में 5000 हेल्थ असिस्टेंट भर्ती करने की स्कीम को स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दिल्ली की तबाही वाली वोट बैंक एजेंडा स्कीम बताते हुए इसे तुंरत रोक लगाते हुए वापिस लेने की मांग की है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अरविंद केजरीवाल के हिसाब से चलें तो 15 दिन की ट्रेनिंग लेकर हिंदुस्तान के हर आदमी को डॉक्‍टर बनाया जा सकता है।

दरअसल दिल्ली सरकार 5000 युवाओं को स्‍वास्‍थ्‍य सहायक बनाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए दिल्ली के 12वीं पास युवाओं से इसके लिए आवेदन मांगे गए हैं। इन्हें 15 दिन की ट्रेनिंग देकर पैरामेडिकल हेल्थ असिस्टेंट के रूप में भर्ती किया जाएगा। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी मिश्र का कहना है कि यह केजरीवाल का तबाही वाला वोट बैंक एजेंडा है।

उन्होंने बताया कि 12वीं पास युवाओं को महज 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद इस इस तरह नर्सिंग सहायक के रूप में कैसे भर्ती किया जा सकता है। केजरीवाल के इस प्रस्‍ताव पर तत्‍काल रोक लगानी चाहिए। डॉ. मिश्र ने कहा कि यह वोट बैंक को बढ़ाने के लिए उठाया गया पॉलिटिकली मोटिवेटेड कदम लग रहा है।

नर्सिंग और मेडिकल फील्ड के युवाओं को दें मौका

एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी मिश्र का कहना है कि केजरीवाल के इस हेल्थ असिस्टेंट भर्ती से कोई लाभ नहीं होगा? डा. मिश्र ने कहा कि क्या दिल्ली सरकार के पास मेडिकल कॉलेज या नर्सिंग ट्रेनिंग सेंटर नहीं हैं। अगर लोगों को भर्ती करना ही है तो नर्सिंग और मेडिकल फील्‍ड के युवाओं को क्‍यों नहीं भर्ती किया जा रहा। क्या उन लोगों की कमी हो गई है देश में इस तरह की भर्ती से मरीजों का भला नहीं बल्कि बुरा ही होगा। ऐसे अधकचरे लोगों को अगर ये मरीजों के इलाज में लगाएंगे तो सोचिए क्या हालात होंगे।

कसा तंज : सीएम के हिसाब से बनाया जा सकता है डॉक्टर

नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल से रिटायर्ड पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. सतपाल कहना है कि अरविंद केजरीवाल के हिसाब से चलें तो 15 दिन की ट्रेनिंग लेकर हिंदुस्तान के हर आदमी को डॉक्टर बनाया जा सकता है। इनके हिसाब से चला जाए तो हर आदमी स्वास्थ्य संबंधी मामलों का एक्सपर्ट हो जाएगा और सभी के साथ-साथ अपना भी इलाज कर लेगा और कोरोना इस देश में आएगा ही नहीं। पैरामेडिकल स्वास्थ्य सहायक बनकर औरों की देखभाल करेंगे और कोरोना के इलाज में मदद करेंगे तो यह तो बेहद सस्ता सौदा है।

आईएमए और नर्सेज यूनियन बोले- फैसला वापस लिया जाए

वहीं एम्स नर्सिंग यूनियन के अध्‍यक्ष हरीश कुमार काजला कहते हैं कि जो नर्सेज पहले से काम कर रहे हैं उन्‍हें उनकी सैलरी न देकर बाहर से किसी को भी भर्ती करके और ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट देकर अब सरकार मरीजों का इलाज कराएगी और यह बेहद खतरनाक है।

वहीं ट्रेंड नर्सेज एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. रॉय के जॉर्ज का कहना है कि इस तरह ट्रेनिंग प्राप्‍त लोगों को नर्स या कम्युनिटी असिस्टेंट नहीं कहा जा सकता। नर्स होने के लिए एनाटॉमी और फिजियोलॉजी की अच्छी समझ होना जरूरी है।

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