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कच्चे तेल की कीमत कम होने का फायदा:पेट्रोल-डीजल पर ज्यादा टैक्स से सरकार, कंपनियों ने 3 माह में 25 हजार करोड़ ज्यादा कमाए

नई दिल्ली3 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • सरकार: 55,733 करोड़ रु. टैक्स लिया, पिछले साल की समान तिमाही से 18,741 करोड़ रु. ज्यादा
  • कंपनियां: इंडियन आॅयल, बीपीसीएल, एचपीसीएल का लाभ 3,323 करोड़ से 10,951 करोड़ रुपए
  • आम आदमी: कच्चे तेल की कीमतों में कमी के बावजूद 10 रु. प्रति लीटर ज्यादा चुकाने पड़ रहे हैं

(स्कन्द विवेक धर) कोरोनाकाल में जब लोग आर्थिक संकट में थे, तब सरकार और तेल कंपनियां कच्चे तेल की कीमतों में आई कमी का फायदा ग्राहकों को देने के बजाय अपनी जेबें भर रही थीं। सितंबर में समाप्त तिमाही में तेल कंपनियों का शुद्ध मुनाफा तीन गुना बढ़कर 10,951 करोड़ हो गया, वहीं सरकार को टैक्स के रूप में 18,741 करोड़ रुपए अतिरिक्त हासिल हुए।

पेट्रोलियम उत्पादों में 80% लागत कच्चे तेल की होती है। पिछले साल जुलाई से सितंबर तिमाही में भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की प्रति बैरल लागत 4,100 से 4,400 रु. के बीच थी, यह अप्रैल-मई में 2,000 रु. प्रति बैरल तक आ गई थी। उस समय पेट्रोल-डीजल की कीमत कम करने के बजाय सरकार ने 6 मई से पेट्रोल पर 10 रु. और डीजल पर 13 रु. प्रति लीटर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लगा दी।

यह अब तक लागू है। कच्चे तेल की कीमतें 3,000 रु. के आसपास हैं, जो 2019 की तुलना में 1000 रु. प्रति बैरल कम है। इसके बाद भी लोगों को पेट्रोल पर 10 रु. अधिक चुकाने पड़ रहे हैं। वहीं, डीजल की कीमतें 64 रु. से बढ़कर 75 से 76 रु. प्रति लीटर हो गई हैं।

बढ़े टैक्स से सरकार को जहां सितंबर 2020 तिमाही में अतिरिक्त 18,741 करोड़ रुपए की एक्साइज ड्यूटी मिली, वहीं देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल का मुनाफा सितंबर 2019 तिमाही के 563.42 करोड़ रु. से 10 गुना से अधिक बढ़कर 6,227 करोड़ रु. हो गया। एचपीसीएल का मुनाफा 1,052 करोड़ रु. से बढ़कर 2,477 करोड़ और बीपीसीएल का 1,708 करोड़ से बढ़कर 2247 करोड़ रु. हो गया।

पूरी तिमाही के दौरान यानी 92 दिन तक तेल कंपनियों ने भाव स्थिर रखे, जबकि 13 दिन कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज हुई। सितंबर के आखिर में सिर्फ 7 दिन कीमत में मामूली कमी की गई। एक सरकारी तेल कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि तेल कंपनियों के मुनाफा कमाने में कोई बुराई नहीं है।

पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स के चीफ इकोनॉमिस्ट डॉ. एस पी शर्मा कहते हैं कि इंटरनेशनल लेवल पर अगर क्रूड ऑयल के रेट कम हुए हैं तो इसका फायदा ग्राहकों को मिलना चाहिए। तेल के रेट कम नहीं करने से मालभाड़ा अधिक बना रहेगा। इससे महंगाई बढ़ेगी। जनता को राहत देने के लिए सरकार को इंटरनेशनल क्रूड ऑयल के रेट के साथ ही खुदरा दाम कम करने चाहिए।

एक साल में कच्चा तेल सस्ता हुआ, जबकि पेट्रोल-डीजल महंगे
2019 2020
(दूसरी तिमाही) (दूसरी तिमाही)
कच्चा तेल 4300 रु. 3300 रु.
पेट्रोल 74.42 रु. 82.08 रु.
डीजल 67.49 रु. 80.53 रु.
नोट: कच्चे तेल के भाव प्रति बैरल भारतीय बास्केट के, पेट्रोल-डीजल के भाव प्रति लीटर दिल्ली के।

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