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चक्रवात का असर:मानसून की विदाई में ‘गुलाब’ कराएगा देरी, खत्म होने तक 100% के आंकड़े तक पहुंच सकती है बारिश

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: अनिरुद्ध शर्मा
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बंगाल की खाड़ी में शनिवार को दिन में बना डीप डिप्रेशन शाम तक चक्रवाती तूफान ‘गुलाब’ में तब्दील हो गया। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
बंगाल की खाड़ी में शनिवार को दिन में बना डीप डिप्रेशन शाम तक चक्रवाती तूफान ‘गुलाब’ में तब्दील हो गया। (फाइल फोटो)

बंगाल की खाड़ी में शनिवार को दिन में बना डीप डिप्रेशन शाम तक चक्रवाती तूफान ‘गुलाब’ में तब्दील हो गया। रविवार की शाम यह तूफान उत्तरी आंध्र प्रदेश (विशाखापट्‌टनम) व दक्षिणी ओडिशा (गोपालपुर) के बीच कलिंगपट्‌टनम के पास तट से टकराएगा और लगातार पश्चिमी दिशा में बढ़ते हुए दक्षिणी छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात तक जाएगा। इस दौरान रविवार से मंगलवार सुबह तक इन सभी इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है।

हालांकि जैसे-जैसे यह सिस्टम आगे बढ़ता जाएगा इसकी तीव्रता कम होती जाएगी। गुजरात पहुंचने तक यह कम दबाव के क्षेत्र में तब्दील हो जाएगा। इसके बाद भी लगातार दो कम दबाव के क्षेत्र और विकसित होने की संभावना है। दोनों ही तीव्रता में कमजोर होंगे, लेकिन मानसून के प्रवाह को सितंबर के खत्म होने तक बनाए रखेंगे। सीजन खत्म होने की आखिरी तारीख यानी 30 सितंबर तक देश में शत-प्रतिशत के आसपास मानसूनी बारिश दर्ज होने के आसार हैं।

25 सितंबर तक देश में 838.5 मिमी बारिश हो चुकी है जो इस अवधि में होने वाली 859.9 मिमी बारिश से महज 2% ही कम है। देश में एक जून से 30 सितंबर के दौरान मानसूनी सीजन में सामान्य रूप से 880.6 मिमी बारिश होती है। रविवार शाम को जब यह आंध्र प्रदेश व ओडीशा के तट से टकराएगा उस समय हवा की गति 75-85 किमी प्रति घंटा रह सकती है। यदि गति यही रही तो इसे ‘गुलाब’ नाम दिया जाएगा।

तूफानों की सूची में यह नाम पाकिस्तान की ओर से दिया गया है। स्काईमेट के विज्ञानी महेश पलावत ने कहा कि ‘तूफान के विकसित होने के 24 घंटे से भी कम समय में यह जमीन पर पहुंच चुका होगा। इसलिए यह मानसून के दस्तक देने के पहले आए ताऊते और याश तूफान जितनी बारिश नहीं दे पाएगा। क्योंकि समुद्र से नमी लेने के लिए इसे ज्यादा वक्त नहीं मिल सकेगा। जो तूफान जमीन पर पहुंचने के पहले तीन से चार दिन तक समुद्र में ही रहते हैं, उनकी तीव्रता बहुत अधिक होती है।’

दलहन व सोयाबीन को होगा नुकसान
स्काईमेट के महेश पलावत ने कहा कि ‘सितंबर के अंतिम हफ्ते में मध्य भारत के राज्यों में भारी बारिश से सोयाबीन व दलहन की फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। यदि मानसून तय समय पर ही लौटना शुरू हो जाता तो यह ज्यादा फायदेमंद होता।’ आईएमडी के मौसम विज्ञानी आरके जेनामणि ने कहा कि ‘बीते कई वर्षों से मानसून में कुछेक इलाकों में ही कम दिनों में बहुत ज्यादा बारिश हो जाती है। इससे किसानों को पर्याप्त लाभ नहीं हो पाता। हालांकि जलभंडारण व बिजली उत्पादन के लिए यह बारिश फायदेमंद है।’

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