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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष:बुलंदियों को छूने वाली 21 महिलाओं की कहानी, कोरोनाकाल में मुंबई की मेयर बनीं नर्स, भारत में जन्मीं भव्या पर अमेरिकी स्पेस मिशन की जिम्मेदारी

एक महीने पहले
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ये उन महिलाओं की तस्वीरें हैं, जिन्होंने मेहनत के दम पर अपने करियर के साथ दुनिया को भी संवारा है। - Dainik Bhaskar
ये उन महिलाओं की तस्वीरें हैं, जिन्होंने मेहनत के दम पर अपने करियर के साथ दुनिया को भी संवारा है।

साल 2020, जब दुनिया ठहरी हुई थी। महिलाएं तब भी मोर्चे पर थीं। घरों में, कार्यस्थलों पर, गृहिणी के रूप में, कहीं नर्स के रूप में, कहीं टीचर के रूप में तो कहीं वैज्ञानिक के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को पूरा कर रही थीं। भास्कर का मानना है कि विश्व की प्रत्येक महिला अपने आप में अद्भुत है, किसी न किसी रूप में मिसाल है। आज पढ़िए उन 21 भारतीय महिलाओं के बारे में जो हमें प्रेरित कर रही हैं।

भव्या लाल: जिन पर अमेरिकी स्पेस मिशन का जिम्मा

भारत में जन्मी, पली-बढ़ी भव्या लाल दुनिया की सबसे बड़ी अंतरिक्ष एजेंसी नासा में एक्टिंग चीफ ऑफ स्टॉफ हैं। वे नासा के काम की रणनीति तय करेंगी। इन दिनों वे राेज 10 से 14 घंटे काम कर रही हैं। उनका हर दिन फोन पर लंबी मीटिंग करते हुए बीत रहा है।

भव्या की स्कूली शिक्षा भारत में हुई। वे 12वीं के बाद फुल स्कॉलरशिप पर न्यूक्लियर इंजीनियरिंग में स्नातक करने अमेरिका की मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गईं थीं। फिर यहीं से टेक्नोलॉजी और पॉलिसी स्ट्रीम में डबल मास्टर्स किया। इसके बाद द जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में पीएचडी की। दुनिया के टॉप जर्नल्स में उनके 50 से अधिक पेपर्स प्रकाशित हुए हैं।

किशोरी पेडनेकर: जिन्होंने नर्स बनकर लड़ी कोरोना से जंग

अप्रैल 2020 में जब मुंबई में कोरोना चरम पर था, तब मुंबई की महापौर किशोरी पेडनेकर नायर अस्पताल में नर्स की जिम्मेदारी निभाने पहुंच गईं थीं। 57 साल की किशोरी का सेवाभाव प्रेरणा बन गया। 1992 में शिवसेना की सदस्य बनने से पहले किशोरी जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट में एक दशक से ज्यादा समय तक नर्स रहीं। मुंबई की 77वीं मेयर किशोरी सुबह 8 बजे से रात के 2 बजे तक काम करती हैं। वे कहती हैं कि उनकी प्राथमिकता में शहर को साफ और सुरक्षित रखना है।

आर्या राजेंद्रन: महिला सुरक्षा इनकी पहली प्राथमिकता

दिसंबर 2020 में केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम की महापौर बनीं हैं। देश में सबसे कम उम्र की मेयर हैं। माकपा की इस नेता की पहली प्राथमिकता अपने शहर को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाना है।

आर्या के पिता इलेक्ट्रीशियन हैं। मां LIC एजेंट हैं। आर्या केरल स्टेट कमेटी की सदस्य भी हैं, जो स्थानीय प्रशासन की कम्युनिटी किचन, आपातकालीन चिकित्सा, जागरूकता कार्यक्रम चलाने में मदद करती है। निकाय चुनावों में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को 549 वोटों से हराया।

दिव्या गोकुलनाथ: सबसे बड़ा एजुकेशन ऐप दिया

बायजूस लर्निंग ऐप की सह-संस्थापक दिव्या गोकुलनाथ सिर्फ 34 साल की हैं। फोर्ब्स इंडिया रिच लिस्ट 2020 में अपने पति बायजू रवींद्रन के साथ वे 46वें स्थान पर हैं। संपत्ति 22.3 हजार करोड़ रुपए है। उन्होंने ऐप लॉन्च करने के सिर्फ छह साल में यह मुकाम पाया है।

दिव्या मास्टर्स के लिए विदेश जाना चाहती थीं। GRI क्रैक करने, उन्होंने बायजू रवींद्रन की क्लासेस जॉइन कीं। परीक्षा के बाद 21 साल की दिव्या को रवींद्रन ने टीचिंग में आने की सलाह दी। वे रवींद्रन की क्लास में पढ़ाने लगीं। अधिकतर छात्र हमउम्र थे, इसलिए बड़ी दिखने के लिए वे साड़ी पहनती थीं। GRI के रिजल्ट में अमेरिका के लिए सिलेक्ट हो गईं, लेकिन नहीं जाने का फैसला किया।

अरुंधति काटजू: 158 साल पुराना कानून बदलवाया

समलैंगिक संबंधों को अपराध मानने वाली धारा 377 खत्म करवाने में अहम भूमिका निभाई। काटजू ने 158 साल पुराने कानून को चुनौती देने वाली नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ की याचिका में कोर्ट में पैरवी की। अप्रैल 2019 में टाइम मैग्जीन ने अरुंधति को दुनिया की 100 सर्वाधिक प्रभावशाली शख्सियतों में शामिल किया।

अरुंधति सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू की भतीजी हैं। वे इलाहाबाद में जन्मी हैं। 2005 में BA-LLB करने के बाद देश में 11 साल वकालत की। 2017 में कोलंबिया लॉ स्कूल से LLM किया। अरुंधति LGBT के अधिकारों की पैरोकार हैं, खुद भी अपने संबंधों पर मुखर हैं। 2019 में उन्होंने मेनका गुरुस्वामी से रिश्ता स्वीकार किया था।

रितु कारिधाल: देश की रॉकेट वुमेन

इसरो में इनकी भूमिका मिशन डिजाइन करने की है। रितु ने ही तय किया कि चंद्रयान-2 के लक्ष्य कैसे हासिल होंगे। वे चंद्रयान-2 की मिशन निदेशक रही हैं। रितु का जन्म मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। बचपन से ही इसरो और नासा की खबरों से जुड़ी हुई खबरों की अखबार की कतरन अपने पास काटकर रखती थीं। लखनऊ यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में BSc और फिर MSc पूरी की। रितु कहती हैं कि सफलता के लिए टाइम मैनेजमेंट जरूरी है और यह कला अनुशासन के साथ ही आ सकती है।

राधा वेंबू: सेल्फ मेड बिलेनियर

राधा वेंबू सबसे अमीर सेल्फ मेड महिलाओं में एक हैं। हुरुन की अमीर सेल्फमेड महिलाओं की 2020 की लिस्ट में वे 60वें नंबर पर रहीं। मद्रास हाईकोर्ट में स्टेनोग्राफर सम्बामूर्ति वेम्बू की बेटी राधा वेंबू को ‘अदृश्य’ सेल्फ मेड बिलेनियर भी कहा जाता है, क्योंकि वे मीडिया से दूर रहती हैं। 1997 में IIT मद्रास से ग्रेजुएशन के बाद राधा ने 2007 में बड़े भाई श्रीधर वेम्बू की कंपनी जोहो कॉरपोरेशन जॉइन की थी। राधा वेम्बू जोहो के 45 से अधिक प्रोडक्ट और प्रोजेक्ट देख रही हैं। जोहो के छह करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं।

मानसी जोशी: पैरा बैडमिंटन चैंपियन​​

मानसी पैरा बैडमिंटन की वर्ल्ड चैंपियन हैं। 2020 में वर्ल्ड रैंकिंग में दूसरे नंबर पर पहुंचीं हैं। टाइम मैगजीन ने नेक्स्ट जनरेशन लीडर की लिस्ट में रखा है। मानसी ने छह साल की उम्र से बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था। पिता भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में थे। 2011 में ट्रक हादसे के बाद जान बचाने के लिए मानसी का पैर काटना पड़ा। 50 दिन अस्पताल में रहीं। चार महीने बाद प्रॉस्थेटिक लैग लगाकर वापसी की। 2014 में पेशेवर खिलाड़ी बनीं। पुलेला गोपीचंद एकेडमी में ट्रेनिंग ली। बार्बी कंपनी मानसी को समर्पित ‘बार्बी डॉल’ लॉन्च कर चुकी है।

अपर्णा कुमार: सातों सर्वोच्च चाेटियों पर पहुंचीं

उत्तराखंड के चमोली में हुई त्रासदी में बचाव की जिम्मेदारी इनके कंधों पर थी। सातों महाद्वीपों के सर्वोच्च शिखरों की चढ़ाई करने वाली पहली सिविल सर्वेंट हैं। 2012 में UP के मुरादाबाद स्थित नाइंथ बटालियन PSE में बतौर कमांडेंट पदस्थापना हुई थी। पहले यह स्पेशल पुलिस फोर्स हुआ करती थी। 1992 तक ITBP के 20 हजार फुट ऊंचाई वाले बॉर्डर आउटपोस्ट इस बटालियन के पास होते थे। इस बटालियन में पर्वतारोहण में इस्तेमाल किए जाने वाले 1965-70 के दशक के उपकरण देखकर उनकी पर्वतारोहण में रुचि जागी।

बाला देवी: सबसे कामयाब फुटबॉलर

दिसंबर 2020 को यूरोप की प्रोफेशनल लीग में गोल करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। 38 मैचों में भारत के लिए 36 गोल किए हैं। एशियन फुटबॉल कन्फेडरेशन की ओर से इंटरनेशनल प्लेयर ऑफ द वीक चुनी जाने वाली पहली भारतीय हैं। 30 साल की नंगंगोम बाला देवी बचपन में लड़कों के साथ फुटबॉल खेलती थीं। 2005 से भारतीय महिला फुटबॉल टीम का हिस्सा हैं। अभी स्कॉटलैंड के क्लब रेंजर्स के लिए खेलती है।

ऐश्वर्या पिसे: वर्ल्ड मोटरस्पोर्ट चैंपियन

ऐश्वर्या ने 24 दिन में गुजरात से चेरापूंजी तक 8,000 किमी का सफर बाइक से पूरा किया था। फेडरेशन ऑफ मोटर स्पोर्ट्स क्लब ऑफ इंडिया ने 25 साल की ऐश्वर्या को 2016, 2017 और 2019 में ‘आउटस्टैंडिंग वीमेन इन मोटरस्पोर्ट्स अवार्ड’ से सम्मानित किया। नौ साल की उम्र में बाइक चलाना शुरू कर दिया था। 2015 में ट्रेनिंग शुरू की और इसके बाद सिर्फ चार साल में 2019 में मोटरस्पोर्ट वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।

अंशु जमसेन्पा: पांच बार एवरेस्ट को जीता

2018 में तेनजिंग नाॅर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड भी मिला। 2011 से 2017 के बीच पांच बार एवरेस्ट फतह किया। 2017 में 5 दिन में दो बार एवरेस्ट फतह कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। इस साल उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया है। माउंटेनियरिंग की शुरुआत 2009 में की थी। उनके पिता इंडो तिब्बत बॉर्डर पर पुलिस ऑफिसर हैं और मां नर्स हैं। 41 साल की अंशु दो बच्चों की मां भी हैं। अंशु ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की ब्रांड एंबेसडर भी रही हैं।

सोमा मंडल: सेल की पहली महिला चेयरपर्सन

मेटल इंडस्ट्री में काम का 35 साल का अनुभव। इनके नेतृत्व में सेल ने NEX (स्ट्रक्चरल) और SeQR (TMT बार) जैसे सफल प्रोडक्ट लॉन्च किए। 1 जनवरी को स्टील कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया के चेयरपर्सन का पद संभाला। वे इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला हैं। 1984 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन के बाद सरकारी एल्युमीनियम कंपनी नाल्को में ट्रेनी के रूप में कॅरिअर शुरू किया। इस कंपनी में डायरेक्टर (कमर्शियल) के पद तक पहुंचीं।

अभिजीता गुप्ता: सबसे छोटी, 7 साल की लेखिका

सात साल की अभिजीता को इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने सबसे कम उम्र की राइटर होने का खिताब दिया। गाजियाबाद की यह बच्ची कक्षा 2 में है। जब स्कूल बंद थे तो वक्त का इस्तेमाल करते हुए किताब लिखी। अब बच्चों पर कोरोना महामारी के असर पर किताब लिख रही हैं।

आयशा अजीज: सबसे कम उम्र की पायलट

कश्मीर के बारामूला की 25 वर्षीय आयशा देश की सबसे कम उम्र की कमर्शियल पायलट हैं। 16 साल की उम्र में रूस में जेट मिग 29 विमान उड़ाने की ट्रेनिंग ली। 2017 में कमर्शियल पायलट बनने का लाइसेंस हासिल किया। अब वह जेट मिग 29 विमान उड़ाने को तैयार हैं।

भावना कांत: कॉम्बैट मिशन पर पहली पायलट

फ्लाइट लेफ्टिनेंट भावना कॉम्बैट मिशन के लिए क्वालिफाई करने वाली पहली महिला फाइटर पायलट हैं। बिहार के दरभंगा की भावना ने बीई करने के बाद 2016 में वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर जॉइन किया। मार्च 2020 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हेें नारी शक्ति सम्मान से भी नवाजा।

अलीना आलम: दिव्यांगों को सम्मान देने की मुहिम

मिट्टी कैफे की संस्थापक और सीईओ अलीना 2020 के राष्ट्रमंडल युवा पुरस्कारों के लिए चुनी गईं। इनका कैफे मानसिक और शारीरिक विकलांगों को प्रशिक्षण देकर रोजगार देता है। विप्रो, इन्फोसिस, एसेंचर जैसी कंपनियों और बड़े कॉलेजों में 14 से अधिक मिट्टी कैफे चल रहे हैं।

जुबैदा बाई: गहने बेचकर बनाई बर्थ किट

लो कॉस्ट बर्थ किट बनाने वाली कंंपनी आइस की संस्थापक हैं। यह किट निशुल्क वितरित किया जाता है। बर्थ किट में छह चीजें होती हैं- एक एप्रन, चादर, हैंड सैनिटाइजर, एंटीसेप्टिक साबुन, कॉर्ड क्लिप और एक सर्जिकल ब्लेड। अपने गहने बेचकर इसके प्रोजेक्ट के लिए राशि जुटाई थी।

बेनो जेफाइन: पहली दृष्टिहीन IFS ऑफिसर

तमिलनाडु की 25 वर्षीय बेनो जेफाइन देश की पहली पूरी तरह से दृष्टिहीन IFS ऑफिसर हैं। बेनो की मां मैरी पद्‌मजा उन्हें किताबें पढ़कर सुनातीं और बेना की स्मृति में वह शब्द जमते जाते। मां के शब्दों और पिता के सहारे वेे हर चुनौती, हर परीक्षा पास करती गईं।

जीया मोदी: कॉरपोरेट लॉ की क्वीन

जीया मोदी: कॉरपोरेट लॉ की क्वीन ​​​​​​​रिलायंस इंडस्ट्रीज ने पिछले साल जियाे प्लेटफॉर्म के लिए 20 अरब डॉलर जुटाए हैं, इसके लिए इनकी कंपनी एजेडबी पार्टनर ने कानूनी पक्ष तैयार किया।​​​​​​​ जीया कॉरपोरेट लॉ में जाना माना नाम हैं। कानूनी शिक्षा सिलविन कॉलेज कैंब्रिज से और मास्टर की डिग्री हाेवार्ड लॉ स्कूल से ली है।​

अमीरा शाह: पिता की एक लैब को 125 लैब चेन वाली कंपनी बना दिया

इनकी कंपनी मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर कोविड-19 की टेस्टिंग करने वाली भारत की पहली प्राइवेट फर्म बनी थी। देश के बड़े शहरों में इस चेन की 125 लैब हैं, जिनमें 4 हजार से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं।अमीरा शाह, फोर्ब्स की 2020 की एशिया की 25 पावर बिजनेसवुमेन की लिस्ट में शामिल हैं।

टेक्सास यूनिवर्सिटी से फाइनेंस में डिग्री लेकर लौटीं अमीरा ने साउथ मुंबई में अपने पिता की पैथोलॉजी लैब में कस्टमर केयर एक्जीक्यूटिव के तौर पर कॅरिअर की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे दूसरी प्रतिष्ठित लेबोरेटरीज को साथ जोड़ा। आज छह देशों में कंपनी की लैब हैं।

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