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20 राज्यों में रूठे बादल:मानसून में इस बार MP में 7% कम बारिश, राजस्थान में 10% तो गुजरात में 47% कम बरसे बादल

नई दिल्ली3 महीने पहले
  • अगस्त में 24.1% कम बारिश के बाद मौसम विभाग ने मानसून का पूर्वानुमान बदला
  • जून की शुरुआत में मानसून के 101% बरसने की उम्मीद थी, अब 96% रहने के आसार

जून में जो मानसून उम्मीद से ज्यादा नजर आ रहा था, उसके अब सामान्य की भी न्यूनतम रेंज में रहने के आसार दिख रहे हैं। बुधवार को भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मानसून के पूर्वानुमान में सुधार किया है। जून में मानसून की दस्तक से पहले IMD ने कहा था कि इस सीजन में 101% बारिश की संभावना है, लेकिन बुधवार को कहा कि मानसून सामान्य ही रहेगा।

वैसे तो मानसून सीजन में 96% से 104% के बीच की बारिश सामान्य मानी जाती है, लेकिन इस बार यह 96% के ही आसपास रहने के आसार हैं। स्थिति ये है कि अगस्त में सामान्य से 24.1% तक कम बारिश हुई है। पूरे मानसून के दौरान देश में 880 मिमी बारिश होती है। एक जून से 31 अगस्त के दौरान देशभर में सामान्य रूप से 710.4 मिमी बारिश होनी चाहिए, लेकिन इस बार 645 मिमी ही बारिश हुई यानी मानसूनी बारिश में अब तक 9% की कमी है।

राज्यवार देखें तो अब तक 20 राज्यों में सामान्य से कम बारिश हुई है। गुजरात में सामान्य से 47%, राजस्थान में 10% और मध्य प्रदेश में 7% कम बारिश हुई। वहीं 10 राज्यों में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है। बाढ़ से जूझ रहे बिहार में सामान्य से 17% तो तेलंगाना में सामान्य से 28% ज्यादा बारिश हो चुकी है।

यहां मानसून कम

121 साल में सिर्फ 15 बार ही अगस्त की बारिश में कमी 16% से ज्यादा
मौसम विभाग के 121 साल के रिकॉर्ड में अगस्त में जिन 15 वर्षों में 16% से ज्यादा की कमी रही है, उनमें से 9 वर्षों (1902, 1905, 1911, 1920, 1930, 2001, 2005, 2009, 2015) में अल-नीनो और नेगेटिव आईओडी (इंडियन ओशन डायपोल) रहा है। इस साल अल-नीनो न्यूट्रल रहा, लेकिन निगेटिव आईओडी के चलते अगस्त में बारिश 24.1% तक कम रही। सन 1901 से अब तक केवल 23 बार दक्षिणी पश्चिमी मानसून के दौरान निगेटिव आईओडी रहा है।

सितंबर में सामान्य से 10% ज्यादा बारिश के आसार
सितंबर में सामान्य से 10% ज्यादा बारिश होने के आसार हैं। इस महीने में देशभर में औसतन 170 मिमी बारिश होती है। मध्य भारत के कई इलाकों में सामान्य से अधिक और उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व और दक्षिणी प्रायद्वीप में सामान्य से कम बारिश की संभावना है।

हिंद महासागर के गर्म तापमान ने सोखी बारिश
IMD के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि अगस्त में आमतौर पर डिप्रेशन के दो क्षेत्र विकसित होते हैं जो इस बार बने ही नहीं। इसके अलावा कम से कम 4 कम दबाव के क्षेत्र बनते हैं, वो भी केवल 2 ही बने। इससे पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में टायफून गतिविधियां कम रहीं और मानसून ट्रफ ज्यादातर दिनों में अपनी सामान्य स्थिति से उत्तरी दिशा में बनी रही। इसके चलते मध्य भारत के इलाकों में बारिश में कमी बनी रही। ये सब कुछ खास तौर से निगेटिव इंडियन ओशन डायपोल की वजह से हुआ।

हिंद महासागर के दोनों सिरों के बीच तापमान का अंतर प्रभावित करता है मानसून की तीव्रता
इंडियन ओशन डायपोल पश्चिमी हिंद महासागर का पूर्वी हिंद महासागर की तुलना में बारी-बारी से गर्म या ठंडा होना है। जब पश्चिमी सिरा पूर्वी की तुलना में गर्म होता है तो उसे पॉजिटिव फेज कहते हैं, जब दोनों में अंतर नहीं रहता तब इसे न्यूट्रल फेज कहते हैं और जब पश्चिमी सिरा ठंडा हो जाता है तो उसे निगेटिव आईओडी फेज कहते हैं, जैसा अभी चल रहा है।

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