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भास्कर 360:श्रमगणना का गणित, आखिर क्यों सरकार हर पेशे का रिकॉर्ड चाहती है

नई दिल्ली13 दिन पहले
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(फाइल फोटो)
  • सरकार के पास प्रवासियों मजदूरों के पलायन तक का रिकॉर्ड नहीं है

देश में पहली बार श्रमगणना होने जा रही है। यानी देश में हर पेशे से जुड़े पेशेवरों की गिनती की जाएगी। चाहे डॉक्टर हो या माली...सरकार हर पेशे से जुड़े लोगों का हिसाब रखेगी। गौरतलब है कि सरकार के पास लॉकडाउन में काम छोड़कर घर लौटे मजदूरों का भी वास्तविक आंकड़ा नहीं है। लोकसभा में इसी से जुड़े एक सवाल पर सरकार की आलोचना हुई थी। इसके बाद सरकार ने अब देश में पहली श्रमगणना करवाने का एलान किया है।

बता दें, लॉकडाउन में सबसे ज्यादा मार प्रवासी मजदूरों पर पड़ी थी। देश ने आजादी के बाद पलायन और विस्थापन की दर्दनाक तस्वीरें देखी थीं। हालांकि, केंद्र सरकार राेजगार और श्रम सुधार को लेकर लगातार काम करने की बात कह रही है। इसके तहत श्रम कानूनों में सरकार ने बदलाव भी किए हैं। इसके बावजूद देश की लेबर फोर्स में कोई संतोषजनक सुधार नहीं दिखता। स्थिति यह है कि देश के पास लेबर फोर्स के सही आंकड़े तक मौजूद नहीं हैं। सबसे बड़ी समस्या असंगठित क्षेत्र की है।

इकोनॉमिक सर्वे 2018-19 के मुताबिक- देश की कुल वर्क फोर्स में से 93 फीसदी हिस्सा असंगठित क्षेत्र का है। संख्या में ये करीब 41 करोड़ लोग हैं। 2018 में आई इंडिया स्पैंड की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में हर साल 47 लाख लोग वर्कफोर्स में जुड़ जाते हैं। लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट को देखें तो महिलाओं की हिस्सेदारी इसमें करीब 24 फीसदी है। ट्रेंडिंग इकोनॉमिक्स के अनुसार- देश में सितंबर 2020 में बेरोजगारी दर 6.7 फीसदी रही। अप्रैल के माह में यह रिकॉर्ड 23.5 फीसदी थी। आइए इस रिपोर्ट में जानते हैं सरकार किस तरह रोजगार प्रदान करने को लेकर आंकड़े जुटाती है...

6 बिंदुओं के आधार पर जानिए श्रमगणना क्या है?

1. 93% कामगार असंगठित क्षेत्र से, इसलिए अभी कोई रिकॉर्ड नहीं है...

देश में काम कर रहे या फिर काम की तलाश कर रहे अथवा काम के लिए उपलब्ध लोगों को वर्क फोर्स (श्रम बल) के तहत माना जाता है। वर्ष 2012 में सरकार द्वारा जारी एक आंकड़े के अनुसार देश में कुल कामगारों की संख्या लगभग 48.7 करोड़ थी। इनमें से लगभग 93% हिस्सा असंगठित क्षेत्र में काम करता है। वर्ष 2008 में श्रम मंत्रालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट में मंत्रालय ने इस असंगठित क्षेत्र को मुख्यत: चार हिस्सों में बांट रखा है।

इसमें पेशा और काम की प्रकृति मुख्य आधार है, लेकिन सरकार के पास अभी इस तरह का कोई भी स्पष्ट आंकड़ा नहीं है कि कितने लोग किस क्षेत्र में कौन सा काम कर रहे हैं। खासकर कोरोना वैश्विक महामारी के दौरान बड़ी संख्या में मजदूरों को शहरों से वापस पैदल अपने घरों को लौटना पड़ा। काम न होने पर वे वापस लौटे। इस बीच कितने मजदूर वापस लौटे और कितने फिर वापस काम पर आए, इसका आंकड़ा किसी के पास नहीं है। सरकार के श्रम मंत्रालय के अनुसार श्रमगणना की जरूरत इसलिए भी है क्योंकि राज्य कामगारों-पेशेवरों की सूचना समय पर नहीं मिल पाती या फिर नियोक्ता इसे देने में देरी करते हैं। देश में काम कर रहे या फिर काम की तलाश कर रहे अथवा काम के लिए उपलब्ध लोगों को वर्क फोर्स (श्रम बल) के तहत माना जाता है। वर्ष 2012 मंे सरकार द्वारा जारी एक आंकड़े के अनुसार देश में कुल कामगारों की संख्या लगभग 48.7 करोड़ थी। इनमें से लगभग 93% हिस्सा असंगठित क्षेत्र में काम करता है। वर्ष 2008 में श्रम मंत्रालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट में मंत्रालय ने इस असंगठित क्षेत्र को मुख्यत: चार हिस्सों में बांट रखा है। इसमें पेशा और काम की प्रकृति मुख्य आधार है, लेकिन सरकार के पास अभी इस तरह का कोई भी स्पष्ट आंकड़ा नहीं है कि कितने लोग किस क्षेत्र में कौन सा काम कर रहे हैं। खासकर कोरोना वैश्विक महामारी के दौरान बड़ी संख्या में मजदूरों को शहरों से वापस पैदल अपने घरों को लौटना पड़ा। काम न होने पर वे वापस लौटे। इस बीच कितने मजदूर वापस लौटे और कितने फिर वापस काम पर आए, इसका आंकड़ा किसी के पास नहीं है। सरकार के श्रम मंत्रालय के अनुसार श्रमगणना की जरूरत इसलिए भी है क्योंकि राज्य कामगारों-पेशेवरों की सूचना समय पर नहीं मिल पाती या फिर नियोक्ता इसे देने में देरी करते हैं।

2. अब लेबर ब्यूरो गणना करवाएगा, संस्थानों को यह जानकारी देनी होगी

गणना केंद्रीय श्रम मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाला लेबर ब्यूरो करेगा। इसमें हर पेशे से जुड़े व्यक्ति की गणना होगी। सर्वे में जिला स्तर पर फैक्ट्री, दफ्तर, अस्पताल और आरडब्ल्यूए जैसे संस्थानों से पेशेवरों का आंकड़ा लिया जाएगा। इसके साथ ही हर जिले में सीमित हाउसहोल्ड सर्वे भी किए जाएंगे। इसके तहत देश में डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, सीए से लेकर मजदूर, माली, कुक और यहां तक की ड्राइवर की गिनती भी शामिल की जाएगी।

3. अभी तक बेरोजगारी से जुड़ा सर्वे एनएसएसओ करता है, यूं काम होता है

देश में आधिकारिक रूप से रोजगार के सरकारी आंकड़े नेशनल सैम्पल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन (एनएसएसओ) जारी करता है। यही संस्था विभिन्न माध्यम से रोजगार संबंधी आंकड़े एकत्रित करती है। एनएसएसओ के मुख्यत: चार भाग हैं।

सर्वेक्षण अभिकल्प और अनुसंधान प्रभाग: इसका काम सर्वेक्षणों की तकनीकी योजना, कॉन्सेप्ट, परिभाषा, डिजाइन मॉडल, इन्क्यॉयरी शेड्यूल आिद बनाने से लेकर सर्वेक्षण परिणामों का विश्लेषण करना है।

फील्ड कार्य प्रभाग (एफओडी): इसका 6 आंचलिक कार्यालय, 49 क्षेत्रीय कार्यालय और 118 उप-क्षेत्रीय कार्यालयों का नेटवर्क है। यह प्राथमिक डेटा के संकलन का काम करता है।

डेटा संसाधन प्रभाग (डीपीडी) : यह विभाग सैम्पल सलेक्शन, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, रिसोर्स, सर्वेक्षण के माध्यम से एकत्र किए जाने वाले डेटा के वैधीकरण और तालिका तैयार करने का काम करता है।

समन्वय और प्रकाशन विभाग : यह प्रभाग एनएसएसओ के सभी क्रियाकलापों का समन्वय कर विभिन्न सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण के परिणामों के संबंध में राष्ट्रीय स्तर पर जानकारी प्रदान करता है।

4. बेरोजगारी दर की गणना किस तरह की जाती है?

सरकार की आलोचनाओं में बेरोजगारी दर का बढ़ना एक प्रमुख मुद्दा रहता है। अर्थशास्त्रियों ने बेरोजगारी दर को मापने का भी एक फॉर्मूला तैयार किया है।

बेरोजगारी की दर, बेरोजगारों की संख्या/श्रम शक्ति (लेबर फोर्स)

इसका अर्थ है जितने लोग काम करने के लिए उपलब्ध हैं, उन्हें मौजूदा काम की संख्या से भाग दे दिया जाए तो जो नंबर मिलता है, उसे 100 से गुणा करने पर बेरोजगारी दर मिलती है। उदाहरण के तौर पर अगर 30,000 बेरोजगार हैं और 1 लाख की श्रम शक्ति है या 1 लाख लोग काम करने लायक हैं तो बेरोजगारी दर कुछ इस तरह निकाली जाएगी।

30,000/100000 = 0.3, अब इसे 100 से गुणा करने पर मिलेगा 30। यानी बेरोजगारी दर 30 फीसदी होगी

5. भारत में पिछले पांच साल से बेरोजगारी दर क्या है

(स्रोत: वर्ल्ड बैंक, एनएसएसओ, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम मंत्रालय, यूएस लेबर ब्यूरो की रिपोर्ट)

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