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  • Menon Said – For India's Strength, Focus On Neighbors, Foreign Trade And Active Diplomacy Will Have To Be Thought

पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की सलाह:भारत की मजबूती के लिए पड़ोसियों पर ध्यान, विदेशी कारोबार और सक्रिय कूटनीति पर सोचना होगा

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: शोमा चौधरी
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वैश्विक अर्थव्यवस्था नाजुक दौर से गुजर रही है, इसलिए हमें भी कारोबार की बेहतर नीति बनानी होगी। - Dainik Bhaskar
वैश्विक अर्थव्यवस्था नाजुक दौर से गुजर रही है, इसलिए हमें भी कारोबार की बेहतर नीति बनानी होगी।
  • भारत का दुनिया से जुड़कर रहना जरूरी

भारत बेहतर प्रदर्शन तभी कर सकता है जब वह बाकी दुनिया से जुड़कर चलता है। लेकिन कुछ वर्षों से हम अंतर्मुखी होते जा रहे हैंं। यह कहना है पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन का। पड़ोसियों से संबंध, विदेश नीति, वैक्सीन डिप्लोमेसी और अपनी किताब इंडिया एंड एशियन जियोपॉलिटिक्स पर मेनन ने मीडिया प्लेटफॉर्म इन्क्वॉयरी से विशेष चर्चा की। पढ़िए मुख्य अंश....

असाधारणता की भावना

इतिहास गवाह है कि जब भी हम दुनिया से जुड़कर कुछ करते हैं तो बेहतर करते हैं। हमें दुनिया की जरूरत है। चाहे वह ऊर्जा, निवेश या टेक्नोलॉजी या निर्यात की बात हो। एशिया-प्रशांत में नेविगेशन फ्रीडम या फिर क्लाइमेट चेंज, अकेले कुछ नहीं कर सकते। देश बदलना है, तो दुनिया से जुड़ना ही होगा। पर हाल के वर्षों में हमने ऐसा नहीं किया।

विश्व में भारत की स्थिति

वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए तीन चीजों पर फिर से सोचना होगा। पड़ोसियों के साथ एकाग्रता, सुसंगत विदेशी कारोबार नीति और सक्रिय कूटनीति पर बहुत ध्यान देना होगा। पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने होंगे। वैश्विक अर्थव्यवस्था नाजुक दौर से गुजर रही है। इसलिए हमें भी कारोबार की बेहतर नीति बनानी होगी। छवि की चिंता किए बगैर हमें फायदों पर ध्यान देना होगा। देश की संपन्नता, सुरक्षा के लिए यह जरूरी है।

चीन का चाल-चरित्र

चीन पहली बार सुपरपावर बनने के साथ, निर्भरता की स्थिति में है। उसकी 40% जीडीपी बाहरी सेक्टरों पर निर्भर है। इसी निर्भरता को कम करने के लिए वह सीपीसी और ओबीओआर लेकर आया है। वह यह बताना चाहता है कि दुनिया उसकी अनदेखी नहीं कर सकती। इसलिए वह अमेरिका और भारत पर दबाव बना रहा है।

चीन के रवैये से सहानुभूति

नेहरू जी को चीन को लेकर जो सहानुभूति थी, आज की सरकार को भी वैसी ही सहानुभूति मिली है। सब इस बात को मानते हैं कि चीन ने धोखा दिया। पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग को अहमदाबाद अपने घर बुलाया। पर बदले में उन्होंने क्या किया। चीन को लेकर नीतियां बनाने में नेहरू जी ने भी गलती की थी। उन्होंने कहा था- चीन के साथ कोई समस्या नहीं है। इस पर उन्होंने चर्चा करना जरूरी नहीं समझा। उन्होंने चीन पर दबाव भी नहीं डाला कि वो गलतियां सुधारे।

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