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मान गया मानसून:यूपी-गुजरात के तीन जिलों में 6 दिन फंसी रही 4 राज्यों की मानसूनी बारिश

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: अनिरुद्ध शर्मा
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सिर्फ 9 दिन में देश के 80% हिस्से में आया मानसून, फिर हफ्तेभर रुका रहा; वरना अब तक देशभर में जल्दी आने का रिकॉर्ड बना होता - Dainik Bhaskar
सिर्फ 9 दिन में देश के 80% हिस्से में आया मानसून, फिर हफ्तेभर रुका रहा; वरना अब तक देशभर में जल्दी आने का रिकॉर्ड बना होता
  • मानसून 3 जून को प्रवेश कर चुका था, पश्चिमी हवाओं ने बढ़ने से रोका
  • अब सब सामान्य रहा तो एक हफ्ते में देशभर में छा जाएगा

देश के 80% हिस्से में मानसून 12 जून को ही छा चुका था। फिर कुछ ऐसा हुआ कि यूपी के सहारनपुर, पीलीभीत जिले और गुजरात के सूरत में मानसूनी हवाएं 6 दिन तक ठहर गईं। इस वजह से राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली की मानसूनी बारिश लेट हो गई। इस रुकावट की वजह बनी पश्चिमी हवाएं, जो मानसूनी हवाओं की विपरीत दिशा में बह रही थीं।

दोनों तरफ की हवाओं में पूरे छह दिन चला टकराव शुक्रवार को धीमा पड़ा तो मानसून धीरे-धीरे अपने रास्ते बढ़ना शुरू हुआ। दरअसल, देश में मानसून 3 जून को प्रवेश कर चुका था। मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि मानसून नहीं अटकता तो 13 या 14 दिन में देशभर में छा जाता, जो रिकॉर्ड होता।

अब सब सामान्य रहा तो एक हफ्ते में देशभर में छा जाएगा

मानसून 11 जून को सूरत, दीव पहुंच गया था। प्रतिकूल हवाओं की वजह से 6 दिन वहीं अटका रहा। शुक्रवार को मानसून के लिए अनुकूल हवाएं चलीं। फिर मानसूनी हवाएं सौराष्ट्र, दक्षिण-पूर्व राजस्थान, उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्से की ओर बढ़ीं।

मानसून के पूरे देश में छाने के सबसे कम समय वाले साल

2013:15 दिन

1 जून को दस्तक, 16 जून को पूरे देश में सक्रिय।

1941: 19 दिन

23 मई को दस्तक, 11 जून को पूरे देश में सक्रिय।

1961: 30 दिन

21 मई को दस्तक, 21 जून को पूरे देश में सक्रिय।

मौसम विभाग के अब तक के रिकॉर्ड के मुताबिक, मानसून को देशभर में छाने में औसतन 45 दिन लगे हैं। 2020 में मौसम विभाग ने मानसून कैलेंडर में संशोधन कर मानसून के देशभर में छाने की अवधि 45 दिन से घटाकर 38 दिन कर दी। यानी, अगर मानसून 8 जुलाई से पहले पूरे देश को कवर कर लेता है तो इसे अच्छी स्थिति माना जाएगा।

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